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मुख्यमंत्री की वीटो पावर से महिला आईपीएस कला रामचंद्रन को मिली परिवहन विभाग की कमान
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चंडीगढ़। गृहमंत्री अनिल विज की आपत्ति को दरकिनार कर आईएएस लॉबी को झटका देते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने परिवहन विभाग की कमान आईपीएस अधिकारी को सौंप दी है। सीएम ने अपनी वीटो पावर का इस्तेमाल करते हुए महिला आईपीएस कला रामचंद्रन को परिवहन विभाग का प्रमुख सचिव बना दिया है। इससे पहले विजिलेंस के डीजी शत्रुजीत कपूर के हाथ में परिवहन विभाग की कमान थी। सूबे की आईएएस लॉबी ने भी इस काडर पोस्ट को हथियाने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। आईएएस लॉबी में सरकार के निर्णय से रोष है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने गृह सचिव से सीधे फाइल मंगवा कर ऑर्डर किए हैं। दो दिन पूर्व इस मामले में अनिल विज ने फाइल पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने फाइल पर यह लिख दिया था कि इस मामले में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की अनुमति जरूरी है। डीओपीटी के आदेशों का हवाला देते हुए कला रामचंद्रन को रिलीव करने से इनकार कर दिया था। मामला मीडिया में आया उसके बाद आईपीएस लॉबी को इस बात पर झटका लगा, लेकिन आज इस मामले में अंतिम आदेश हो गए हैं।
यह है असल मामला
विज का शुरुआत से स्टैंड रहा है कि जो अधिकारी पुलिसिंग केअलावा दूसरे कार्यों में लगे हैं, उन्हें उनके मूल काडर में वापस लाकर पुलिसिंग का काम करवाया जाए। प्रदेश की आईएएस लॉबी भी चाहती है कि आईएएस की काडर पोस्ट पर किसी आईपीएस को न लगाया जाए, लेकिन खुलकर विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। इस प्रकरण में डीओपीटी को अपनी आपत्ति लिखित में दर्ज करवाने वाले आईएएस अशोक खेमका पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने अपना विरोध कागज पर दर्ज किया है।
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सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने गृह सचिव से सीधे फाइल मंगवा कर ऑर्डर किए हैं। दो दिन पूर्व इस मामले में अनिल विज ने फाइल पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने फाइल पर यह लिख दिया था कि इस मामले में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की अनुमति जरूरी है। डीओपीटी के आदेशों का हवाला देते हुए कला रामचंद्रन को रिलीव करने से इनकार कर दिया था। मामला मीडिया में आया उसके बाद आईपीएस लॉबी को इस बात पर झटका लगा, लेकिन आज इस मामले में अंतिम आदेश हो गए हैं।
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यह है असल मामला
विज का शुरुआत से स्टैंड रहा है कि जो अधिकारी पुलिसिंग केअलावा दूसरे कार्यों में लगे हैं, उन्हें उनके मूल काडर में वापस लाकर पुलिसिंग का काम करवाया जाए। प्रदेश की आईएएस लॉबी भी चाहती है कि आईएएस की काडर पोस्ट पर किसी आईपीएस को न लगाया जाए, लेकिन खुलकर विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। इस प्रकरण में डीओपीटी को अपनी आपत्ति लिखित में दर्ज करवाने वाले आईएएस अशोक खेमका पहले ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने अपना विरोध कागज पर दर्ज किया है।
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