चंडीगढ़। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के अवर सचिव ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर पिंजौर स्थित एचएमटी ट्रैक्टर प्लांट के कर्मचारियों के मकान खाली कराने पर रोक के आदेश को वापस लेने की मांग की है। केंद्र सरकार की इस अर्जी पर हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
अर्जी में हाईकोर्ट को बताया कि यह कर्मचारी अब एचएमटी के पूर्व कर्मचारी हैं और उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है। कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने के आदेश पर किसी कोर्ट से रोक नहीं है। ऐसे में जब केंद्र सरकार उनकी सेवा समाप्त कर चुकी है तो उन्हें मकान खाली करना होगा। 2016 में एचएमटी ट्रैक्टर प्लांट को केंद्र सरकार द्वारा बंद कर दिया गया था और कर्मचारियों को जबरन वीआरएस लेने पर मजबूर होना पड़ा था। 150 से अधिक कर्मचारियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, ऐसे कर्मचारी अभी भी एचएमटी क्वार्टरों में रह रहे है। एचएमटी प्रंबधन ने इन कर्मचािरयों को बिजली व पानी के बिल भरने तथा मकान खाली करने के लिए 13 अगस्त 2021 को नोटिस दे दिया था। इसमें साफ तौर पर कर्मियों को कहा गया था कि यदि बिजली व पानी के बिल नही भरे तो उनका कनेक्शन काट दिया जाएगा। पब्लिक प्रेमिसिस एविक्शन ऑफ अनऑथोराइज़्ड ऑक्यूपेंट्स एक्ट 1971 के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेश को कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी तथा इस पर रोक लगाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने सितंबर माह में एचएमटी प्रबंधन के आदेश पर रोक लगा दी थी। इसी आदेश को वापस लेने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने अर्जी दायर की है।