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अपने नायकों को झांकियों की ‘नामंजूर श्रेणी’ में नहीं जोड़ेंगे: मान
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चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि राज्य सरकार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ‘नामंजूर श्रेणी’ में अपनी झलकियां नहीं भेजेगी क्योंकि देश के शहीदों के बारे में भाजपा से एनओसी लेने की जरूरत नहीं है।
रविवार को जारी बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु, शहीद सुखदेव, लाला लाजपत राय, शहीद उधम सिंह, शहीद करतार सिंह सराभा, माई भागो, गदरी बाबो सहित महान शहीदों को रद्द की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। केंद्र सरकार गणतंत्र दिवस की परेड में पंजाब की झांकी को शामिल न करके इन नायकों के महान योगदान और बलिदानों का महत्व कम करने की कोशिश कर रही है। यह व्यवहार सहन नहीं किया जा सकता क्योंकि यह कदम हमारे महान देश भक्तों और राष्ट्रीय नेताओं का घोर निरादर है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 30 दिसंबर को एक पत्र लिखकर राज्य सरकार से कहा है कि गणतंत्र दिवस की परेड के लिए राज्य के साथ किए एमओयू के क्लॉज-8 के अनुसार राज्य हो या यूटी, जिसका गणतंत्र दिवस की परेड के लिए चुनाव नहीं होता, उस राज्य या यूटी को 23-31 जनवरी के दौरान नई दिल्ली में लाल किले पर होने वाले ‘भारत पर्व’ के दौरान अपनी झांकी दिखाने का मौका दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रसिद्ध पकवानों, रिवायतों, वस्तुओं, दस्तकारी और त्योहारों पर आधारित होता है। मान ने कहा कि ‘भारत पर्व’ के बाद राज्य या यूटी की झांकी उनकी मंजूरी अनुसार संबंधित राज्य या यूटी के समागमों में प्रदर्शित की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि राज्य अपनी झांकी नहीं भेजेगा क्योंकि देश के शहीदों को भाजपा से एनओसी लेने की जरूरत नहीं है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब अपने देश भक्तों और शहीदों का सत्कार करना अच्छी तरह जानता है। यह शहीद हमारे नायक हैं और इन योद्धाओं द्वारा देश के लिए किए बेमिसाल बलिदान के लिए देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा। राज्य सरकार को अपने नायकों के योगदान को दर्शाने के लिए केंद्र सरकार के सहारे की आवश्यकता नहीं है बल्कि राज्य अपने स्तर पर शहीदों को श्रद्धा और सत्कार देने में समर्थ है।
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रविवार को जारी बयान में मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु, शहीद सुखदेव, लाला लाजपत राय, शहीद उधम सिंह, शहीद करतार सिंह सराभा, माई भागो, गदरी बाबो सहित महान शहीदों को रद्द की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। केंद्र सरकार गणतंत्र दिवस की परेड में पंजाब की झांकी को शामिल न करके इन नायकों के महान योगदान और बलिदानों का महत्व कम करने की कोशिश कर रही है। यह व्यवहार सहन नहीं किया जा सकता क्योंकि यह कदम हमारे महान देश भक्तों और राष्ट्रीय नेताओं का घोर निरादर है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने 30 दिसंबर को एक पत्र लिखकर राज्य सरकार से कहा है कि गणतंत्र दिवस की परेड के लिए राज्य के साथ किए एमओयू के क्लॉज-8 के अनुसार राज्य हो या यूटी, जिसका गणतंत्र दिवस की परेड के लिए चुनाव नहीं होता, उस राज्य या यूटी को 23-31 जनवरी के दौरान नई दिल्ली में लाल किले पर होने वाले ‘भारत पर्व’ के दौरान अपनी झांकी दिखाने का मौका दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रसिद्ध पकवानों, रिवायतों, वस्तुओं, दस्तकारी और त्योहारों पर आधारित होता है। मान ने कहा कि ‘भारत पर्व’ के बाद राज्य या यूटी की झांकी उनकी मंजूरी अनुसार संबंधित राज्य या यूटी के समागमों में प्रदर्शित की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि राज्य अपनी झांकी नहीं भेजेगा क्योंकि देश के शहीदों को भाजपा से एनओसी लेने की जरूरत नहीं है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब अपने देश भक्तों और शहीदों का सत्कार करना अच्छी तरह जानता है। यह शहीद हमारे नायक हैं और इन योद्धाओं द्वारा देश के लिए किए बेमिसाल बलिदान के लिए देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा। राज्य सरकार को अपने नायकों के योगदान को दर्शाने के लिए केंद्र सरकार के सहारे की आवश्यकता नहीं है बल्कि राज्य अपने स्तर पर शहीदों को श्रद्धा और सत्कार देने में समर्थ है।