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41 डीडीए की नियुक्ति प्रक्रिया पर क्यों न लगा दी जाए रोक: हाईकोर्ट
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विज्ञापन जारी होने के बाद भर्ती के बीच में नियमों को बदलने का पंजाब सरकार पर आरोप
सफल उम्मीदवारों को वकालत के हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने का दिया पीपीएससी ने आदेश
डीडीए पद पर भर्ती के लिए वकालत का सात वर्ष का अनुभव है अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब की अदालतों में 41 डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटार्नी (डीडीए) के पदों पर की जा रही भर्ती में नियमों को विज्ञापन जारी होने के बाद बदलने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न भर्ती पर रोक लगा दी जाए।
अमृतसर निवासी इशा मेहरा व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब की अदालतों में 41 डीडीए के पदों को भरने के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में उन्होंने हिस्सा लिया था। इसके बाद लिखित परीक्षा को भी वह पास कर चुके हैं। इस दौरान आयोग ने सफल आवेदकों को नियुक्ति देने के लिए अजीब शर्त लगा दी है। सभी सफल आवेदकों को वकालत के अनुभव के तौर पर हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने को कहा है जिससे साबित हो की वो अदालतों में पेश होते थे।
कोर्ट को बताया गया कि डीडीए पद के लिए सात साल का वकालत का अनुभव अनिवार्य है। ऐसे में सात साल के अनुभव को साबित करने के लिए यह अजीबो गरीब शर्त रखी गई है। इसके साथ ही यह दलील दी कि किसी भी भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह शर्त विज्ञापन में नहीं थी और जब लिखित परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है तब यह शर्त जोड़ी गई है।
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याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। इसके साथ ही पूछा है कि क्यों ना इस नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाए।
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सफल उम्मीदवारों को वकालत के हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने का दिया पीपीएससी ने आदेश
डीडीए पद पर भर्ती के लिए वकालत का सात वर्ष का अनुभव है अनिवार्य
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब की अदालतों में 41 डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटार्नी (डीडीए) के पदों पर की जा रही भर्ती में नियमों को विज्ञापन जारी होने के बाद बदलने को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन (पीपीएससी) को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न भर्ती पर रोक लगा दी जाए।
अमृतसर निवासी इशा मेहरा व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब की अदालतों में 41 डीडीए के पदों को भरने के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में उन्होंने हिस्सा लिया था। इसके बाद लिखित परीक्षा को भी वह पास कर चुके हैं। इस दौरान आयोग ने सफल आवेदकों को नियुक्ति देने के लिए अजीब शर्त लगा दी है। सभी सफल आवेदकों को वकालत के अनुभव के तौर पर हर साल के छह अंतरिम आदेश पेश करने को कहा है जिससे साबित हो की वो अदालतों में पेश होते थे।
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कोर्ट को बताया गया कि डीडीए पद के लिए सात साल का वकालत का अनुभव अनिवार्य है। ऐसे में सात साल के अनुभव को साबित करने के लिए यह अजीबो गरीब शर्त रखी गई है। इसके साथ ही यह दलील दी कि किसी भी भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। यह शर्त विज्ञापन में नहीं थी और जब लिखित परीक्षा का परिणाम जारी हो चुका है तब यह शर्त जोड़ी गई है।
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याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है। इसके साथ ही पूछा है कि क्यों ना इस नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाए।