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पेंशन निर्धारित करने के पंजाब सरकार के निर्देशों पर क्यों न लगा दें रोक: हाईकोर्ट

Tue, 13 Jan 2026 10:39 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2026 10:39 PM IST
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Why not ban Punjab Government's instructions on determining pension: High Court
2016 से पूर्व के पेंशनरों की याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी
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29 अक्तूबर 2021 के निर्देशों के अनुसार ही पेंशन तय करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 2016 से पहले के पेंशनरों की पेंशन संशोधन से जुड़े मामले में पंजाब सरकार के 28 नवंबर 2025 के निर्देशों को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा है कि क्यों न इन निर्देशों पर रोक लगा दी जाए।
सुभाष चंद्र मित्तल व अन्य ने याचिका दायर कर 28 नवंबर 2025 को जारी सरकारी निर्देशों को रद्द करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने 29 अक्तूबर 2021 के निर्देशों के अनुसार नेशनल फिक्सेशन मेथड के तहत संशोधित पेंशन और उसके बकाया (01.01.2016 से देय) किस्तों सहित 18 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान का आग्रह किया है।
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याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि वे सभी 2016 से पहले के पेंशनर हैं और छठे वेतन आयोग के बाद पंजाब सरकार ने 29 अक्तूबर 2021 के निर्देश जारी कर पेंशन संशोधन की स्पष्ट पद्धति तय की थी। संबंधित मामले में सरकार ने हलफनामे में भी इसी पद्धति के अनुसार पेंशन निर्धारण की बात स्वीकार की गई थी। इसके अलावा, मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद 18 जून 2021 को वेतन आयोग की सिफारिशें मंजूर की गईं और 18 फरवरी 2025 को पेंशनरों के बकाया भुगतान संबंधी अधिसूचना जारी हुई।
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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद राज्य सरकार ने 28 नवंबर 2025 को अचानक नए निर्देश जारी कर 2021 की पद्धति को एकतरफा रूप से बदल दिया, वह भी बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई के और बिना मंत्रिमंडल की स्वीकृति के। याचिका में इसे वैध अपेक्षा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया गया। हाईकोर्ट ने मामले में पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए निर्देश पर रोक लगाने पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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