चंडीगढ़। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ में कितने रसूखदारों को पुलिस सुरक्षा दी गई है, कितने जवान सुरक्षा में तैनात हैं और उनकी सुरक्षा पर कितना खर्च आ रहा है पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर यह जानकारी तीनों पुलिस प्रमुखों को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि सुरक्षा पाने वाले किस राजनीतिक पार्टी/धार्मिक संस्था से जुड़े हैं और उन्हें सुरक्षा देने का क्या कारण है। 2019 में एक आपराधिक मामले में एक गवाह को सुरक्षा दी गई थी, अभी तक इस मामले में केवल एक गवाही हुई थी। एक गवाह को खतरे के चलते बीते कई सालों से सुरक्षा जारी रखी गई थी। इस मामले का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई आरंभ की है। वीरवार को हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपी को विस्तृत जानकारी सौंपने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि प्रदेश में कितने वीआईपी लोगों को सुरक्षा दी गई है और उनकी सुरक्षा में किस रैंक के कितने अधिकारी तैनात हैं। प्रत्येक की सुरक्षा का सरकारों व प्रशासन पर कितना वित्तीय बोझ पड़ रहा है। इन लोगों को सुरक्षा देने के लिए क्या आधार बनाया गया है और क्या इनमें से कोई सुरक्षा के लिए भुगतान कर रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस सुरक्षा लेना समाज में प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। ऐसी झूठी शान और प्रतिष्ठा जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बनाए रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई मंगलवार तक स्थगित करते हुए सुरक्षा से जुड़ी मांगी गई जानकारी तीनों डीजीपी को सौंपने का आदेश दिया है।