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यूक्रेन-रूस जंग : पांच दिन से खारकीव के मेट्रो स्टेशन पर फंसे 100 विद्यार्थियों को निकाला

Thu, 03 Mar 2022 01:56 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 01:56 AM IST
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Ukraine-Russia war: 100 students trapped at Kharkiv metro station for five days rescued
खारकीव मेट्रो स्टेशन पर बैठे भारतीय विद्यार्थी। - फोटो : PKL OFFICE
पंचकूला। यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग के कारण यूक्रेन के खारकीव शहर के एक मेट्रो स्टेशन पर 100 से ज्यादा भारतीय विद्यार्थी पांच दिन तक फंसे रहे। मंगलवार देर रात विद्यार्थियों को वहां से निकाला गया है। बुधवार रात आठ बजे सभी हंगरी बॉर्डर पर पहुंचेंगे। सभी विद्यार्थी सही सलामत हैं, मगर सभी घबराए हुए हैं। जब तक वह सभी अपने घर नहीं पहुंच जाते अभिभावकों में चिंता बनी रहेगी।
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शहर के नजदीक हरमिलाप नगर फेज-1 निवासी शेफाली शर्मा यूक्रेन में एमबीबीएस के पांचवें साल की पढ़ाई कर रही है। वह नवंबर में भारत आई थीं और दिसंबर में वापस चली गईं। शेफाली की बहन दीपाली ने बताया कि बहन के यूक्रेन में फंसे होने के कारण उन्हें बहुत ज्यादा चिंता हो रही है। वहीं, सेक्टर-15 निवासी विशु रोहिल्ला भी वहीं पर फंसे हैं। वह भी एमबीबीएस करने के लिए यूक्रेन गए थे।
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हर वक्त रहती है टीवी पर नजर
शेफाली की बहन दीपाली ने बताया कि कि चिंता के कारण हर समय टीवी देखते रहते हैं और वहां के हालात का जायजा लेते हैं। इसके अलावा नेटवर्क में दिक्कत होने के कारण शेफाली से भी बात बहुत कम हो पाती हैं। यूक्रेन से निकलने की जद्दोजहद में सभी विद्यार्थी लगे हुए हैं।
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बुधवार दोपहर तीन बजे पहुंचे लवीव शहर
खारकीव से ट्रेन के माध्यम से सभी विद्यार्थियों को खारकीव से रवाना किया गया। इसके बाद भारतीय समय के अनुसार बुधवार दोपहर तीन बजे वे सभी लवीव शहर में पहुंचे। वहां से बसों में सवार होकर सभी हंगरी बॉर्डर के लिए रवाना हुए हैं। रात आठ बजे तक हंगरी बॉर्डर पर पहुंचने की उम्मीद है।
एक-दूसरे को हौसला दे काट रहे समय
खारकीव के जिस मेट्रो स्टेशन पर भारतीय विद्यार्थी पांच दिन तक फंसे रहे, वहां गोलियां और बमबारी की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। सभी विद्यार्थी सहमे हुए हैं, मगर एक दूसरे को हौसला दे रहे हैं। सभी एक-दूसरे को कह रहे हैं कि वो सही सलामत अपने वतन जरूर लौटेंगे।
सरकार से नहीं मिली खास मदद
दीपाली बताती हैं कि खारकीव में फंसे भारतीय विद्यार्थियों को अभी सरकार से कोई मदद नहीं मिल पाई है। सभी अपने रिस्क पर ही खारकीव छोड़कर हंगरी बॉर्डर पर जा रहे हैं। सरकार से अपील है कि सभी भारतीय विद्यार्थियों की सकुशल वतन वापसी कराई जाए ताकि यहां चिंता में पड़े उनके परिवारों को राहत मिल सके।

पिता करते हैं प्राइवेट नौकरी
शेफाली शर्मा के पिता पवन शर्मा एक कंपनी में नौकरी करते हैं। माता का नाम नीलम शर्मा है। शेफाली तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी है। उससे छोटी बहन दीपाली शर्मा है जो एमबीए कर रही है। सबसे छोटा भाई परिचय शर्मा है।
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