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Panchkula News: 80 करोड़ में बनेंगे दो फ्लाईओवर, नए सिरे से होगा काम

Tue, 10 Mar 2026 02:25 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 02:25 AM IST
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Two flyovers will be built for Rs 80 crore, work will be done afresh.
चंडीमंदिर। एनएच-5 पर बुर्जकोटिया और एचएमटी क्लब के पास दो शानदार फ्लाईओवर बनाने के लिए 80 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इन फ्लाईओवरों के बनने से न केवल ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि शहर की कनेक्टिविटी को भी मेट्रो की तर्ज पर और बेहतर बनाया जाएगा। यह कालका-पिंजौर अर्बन कॉम्प्लेक्स के सेक्टरों और अमरावती एन्क्लेव के हजारों निवासियों के लिए राहत भरी खबर है।
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पिछले कई सालों से धूल फांक रहे बुर्ज कोटियां और एचएमटी गेट के पास बनने वाले दो प्रस्तावित फ्लाईओवरों की फाइलें एक बार फिर खुल गई हैं। अब इस प्रोजेक्ट को पीएमडीए पूरा करेगा। इन फ्लाईओवरों के बनने से सेक्टर 2, 3, 4, 5 और कौशल्या डैम के लिए सीधा और सुरक्षित रास्ता मिल सकेगा, जिससे दुर्घटनाओं और जाम में कमी आएगी।
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क्या है पूरा मामला?
अमरावती एन्क्लेव रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शमशेर शर्मा ने समाधान शिविर में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। उन्होंने शिकायत की थी कि एनएच-5 पर लाइट पॉइंट न होने और फ्लाईओवर न बनने के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं और लोगों को भारी जाम का सामना करना पड़ता है। इसी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए एनएचआईए के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने स्पष्ट किया है कि इन फ्लाईओवरों के लिए प्रक्रिया शुरू करने के लिए एचएसवीपी को पत्र लिखा गया था।
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क्यों लटका था प्रोजेक्ट?
बजट का पेंच : 2023 में बुर्ज कोटियां फ्लाईओवर के लिए 35 करोड़ रुपये का अनुमान भेजा गया था, लेकिन एचएसवीपी से वित्तीय मंजूरी नहीं मिल पाई थी। एचएमटी गेट के पास प्रस्तावित फ्लाईओवर का काम जमीन की उपलब्धता न होने और कोर्ट केस (लिटिगेशन) के कारण अटका हुआ था। अनुबंध खत्म, मंजूरी न मिलने के कारण पिछला कंसल्टेंसी एग्रीमेंट भी बंद कर दिया गया था।



अब आगे क्या होगा?
एनएचएआई ने अब एचएसवीपी के सामने नई शर्तें रखी हैं ताकि काम को रफ्तार दी जा सके
नया सर्वे : पुरानी स्थिति को देखते हुए अब नए सिरे से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए नई एजेंसी नियुक्त की जाएगी।
लागत: एनएचएआई ने डीपीआर कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए 15 लाख रुपये प्लस 18 फीसदी जीएसटी के खर्च पर एचएसवीपी की सहमति मांगी है।

डिपॉजिट वर्क: यह स्पष्ट किया गया है कि इन फ्लाईओवरों के निर्माण का सारा खर्च एचएसवीपी उठाएगा और एनएचआईए इसे डिपॉजिट वर्क के तौर पर पूरा करेगा।
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए प्रस्ताव की नए सिरे से समीक्षा करना बेहद जरूरी है। एचएसवीपी की सहमति मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।


2010 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट पर काम
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के एक्सईएन एनके पायल ने बताया कि इन दोनों पुलों को लेकर कवायद साल 2010 में ही शुरू हो गई थी। उस समय एचएसवीपी ने पुल निर्माण के लिए एनएचएआई को 20 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया था, लेकिन एक साल तक एनएसएआई ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए वह राशि वापस कर दी थी। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2019 में एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने की कोशिश की गई। एचएसवीपी ने दोनों पुलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए 27.80 लाख रुपये जारी किए थे। तमाम प्रशासनिक तैयारियों के बावजूद विभाग ने एनओसी और तालमेल की कमी के कारण योजना धरातल पर नहीं उतर सकी थी।
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