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Panchkula News: फर्जी दस्तावेज लगाकर लोन लेने के मामले में दो गिरफ्तार

Sat, 06 Dec 2025 12:19 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Dec 2025 12:19 AM IST
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Two arrested for taking loan by using fake documents

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पंचकूला। सरकारी कर्मचारियों की पहचान बदलकर फर्जी सर्विस बुक और बैंक स्टेटमेंट तैयार कर एसबीआई से लोन लेने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला तब सामने आया जब एसबीआई सेक्टर-15 पंचकूला शाखा ने पुलिस को शिकायत देकर अवगत कराया कि एक व्यक्ति ने 13.63 लाख रुपये का पर्सनल लोन लेने के लिए फर्जी दस्तावेज जमा किए थे। गिरफ्तार आरोपियों में जसवंत सिंह अमृतसर, अभिषेक जीरकपुर और राहुल पीरमुछल्ला शामिल हैं।

शिकायत के अनुसार अमृतसर स्थित 24 पंजाब बटालियन एनसीसी, टेलर रोड पर ड्राइवर के पद पर कार्यरत जसवंत सिंह ने फरवरी 2025 में लोन के लिए आवेदन किया था। जांच में पाया कि उसने मोरनी, पंचकूला और मोहाली से संबंधित कई दस्तावेज जमा करवाकर अपनी नियुक्ति और पता का विवरण गलत दर्शाया। जांच में उसके सर्विंग सर्टिफिकेट, छह पेज की सैलरी स्लिप, सेवा पुस्तिका, बैंक स्टेटमेंट और एनओसी फर्जी पाए गए। साथ ही उसने सैलरी प्राप्त करने वाला बैंक भी बदल दिया था और पुराने लोन की ईएमआई चुकानी भी बंद कर दी थी।
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अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार

आर्थिक अपराध शाखा ने सबसे पहले जसवंत सिंह को गिरफ्तार किया। पूछताछ के आधार पर टीम ने जीरकपुर निवासी अभिषेक को गिरफ्तार किया जिसे कोर्ट ने तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया। रिमांड के दौरान उससे 1 लाख रुपये और एक लैपटॉप बरामद हुआ। अभिषेक की निशानदेही पर पुलिस ने तीसरे आरोपी पीरमुछल्ला निवासी राहुल को गिरफ्तार किया। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया जहां से अभिषेक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और राहुल 4 दिन के पुलिस रिमांड पर है।
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इस तरह काम करता था पूरा रैकेट

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क सरकारी कर्मचारियों की आईडी बदलकर, फर्जी सर्विस बुक, फर्जी सैलरी स्लिप, फर्जी बैंक स्टेटमेंट तैयार करवाता था। इसके बाद आरोपी सरकारी बैंकों में लोन के लिए आवेदन करवाते थे। लोन स्वीकृत होने पर रकम सीधे खाते में आती थी। आरोप है कि जिन खातों में लोन जाता था उनसे पैसे ले लेते थे।


बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

आर्थिक अपराध शाखा अब पता लगा रही है कि लोन प्रक्रिया के दौरान किसी बैंक अधिकारी की लापरवाही या संलिप्तता तो नहीं रही। जिन अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच की, उनके बयान भी लिए जा रहे हैं। आरोपियों ने अब तक कितने फर्जी खाते खुलवाए, कितने लोन स्वीकृत कराए गए और ठगी के पैसे का कहां खर्च किए इसकी जांच की जा रही है।
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