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परेशानी : स्कूल बसों में मानक अधूरे, नहीं हो रहे उपायुक्त के आदेश पूरे, सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत की गई जांच में कई बसों में मिली खामियां

Sat, 25 Dec 2021 01:06 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 25 Dec 2021 01:06 AM IST
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Trouble: Standards are incomplete in school buses, orders of the Deputy Commissioner are not being fulfilled, flaws found in many buses in the investigation done under the Safe School Vehicle Policy
पंचकूला। जिले में स्कूल संचालकों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बसें चलाई जा रही हैं। सेक्टर-20 अंडरपास के पास शुक्रवार को हुई चेकिंग में किसी बस में प्राथमिक उपचार बॉक्स नहीं मिला तो कई बसों में लेडीज अटेंडेंट नहीं मिली। वहीं कुछ बसों में सीसीटीवी कैमरे लगे नजर आए, लेकिन चल नहीं रहे थे। जांच टीम का कहना था कि जिले में चल रहे करीब 60 फीसदी स्कूल बसों में अटेंडेंट के पास फर्स्ट एड का सर्टिफिकेट तक नहीं है। रोड सेफ्टी की बैठक में बार-बार उपायुक्त द्वारा निर्देश दिए जाते हैं कि स्कूल बसों के अटेंडेंट के पास प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग होनी चाहिए।
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इसके बाद भी स्कूल बसों के अटेंडेंट बिना ट्रेनिंग काम कर रहे हैं। कई स्कूल बसों में तो फर्स्ट एड बॉक्स तक अपडेट नहीं किए जाते। पंचकूला ट्रैफिक एसएचओ यशदीप ने शुक्रवार को सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी को सख्ती से लागू कराने के लिए पंचकूला में करीब एक दर्जन निजी स्कूल बसों की चेकिंग की। एसएचओ ने बस चालकों को दोबारा कमियां मिलने पर उचित कार्रवाई की हिदायत देकर छोड़ दिया। एसएचओ यशदीप ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर सेफ स्कूल वाहन पॉलिसी को सख्ती से लागू करवाया जाएगा।
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ये सुविधा अनिवार्य
- बसों की खिड़कियों में सेफ्टी राड्स लगी हों
- दरवाजे से सटी सीट पर सुरक्षित जाली या मेटेलिक कवर होना चाहिए
- बस में सीसीटीवी कैमरे
- बस में दो इमरजेंसी गेट एक साइड पर और एक पीछे।
- प्राथमिक उपचार बॉक्स होना चाहिए।
- आग बुझाओ यंत्र मौजूद होना चाहिए।
- स्टोरेज रैक ऊपर की जगह बच्चे की सीट के नीचे हो।
- बस के चारों इंडिकेटर चलते हैं तो बीप होना जरूरी।
- बस में लड़की है तो लेडी अटेंडेंट का होना अनिवार्य।
- बस में चढ़ने के दौरान स्टैप का साइज छह इंच होना चाहिए।
- कंडक्टर बहुत जरूरी और उसे पूरी ट्रेनिंग होना जरूरी।
- एक महीने की सीसीटीवी रिकार्डिंग का रिकार्ड होना जरूरी बसों का रंग पीला हो।
- गोल्डन ब्राउन रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम लिखा होना चाहिए।
- बस पर डीटीओ का मोबाइल नंबर लिखा होना जरूरी।
- स्कूल बस कंडक्टर और ड्राइवर के पास आई कार्ड होना चाहिए
स्कूल बसों की स्कूल सेफ्टी कमेटी की तरफ से रूटीन चेकिंग नहीं की जा रही है। इसके चलते स्कूल बसों में तमाम खामियां देखने को मिलती हैं, एक तो अधिकतर स्कूल बसों में स्पीडोमीटर नहीं लगे होते हैं। वहीं प्राथमिक उपचार बॉक्स समय के हिसाब से अपडेट नहीं किया जाता। साथ ही स्कूल बसों में महिला अटेंडेंट नहीं होती है। - मनीष बांगड़, प्रधान, पैरेंट्स एसोसिएशन पंचकूला
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