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शहरी क्षेत्रों में चल रही हजारों डेयरियां हटेंगी

Thu, 11 Aug 2022 01:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 01:33 AM IST
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Thousands of dairies running in urban areas will be removed
चंडीगढ़। हरियाणा के शहरी क्षेत्रों में चल रही हजारों डेयरियां हटाई जाएंगी। शहरों में अब दुधारू और अन्य पशुओं को भी नहीं पाल सकेंगे। सरकार की मंजूरी के बाद कुत्ता, बिल्ली और अन्य पक्षी पालने की ही अनुमति होगी। इसके लिए बुधवार को विधानसभा में हरियाणा नगर निगम और नगर पालिका संशोधन विधेयक-2022 पारित किए गए। मंगलवार को दो अलग-अलग विधेयकों को चर्चा के बाद पारित करने के लिए सदन पटल पर रखा गया था।
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सरकार बीते सत्र में भी ये विधेयक लाई थी, लेकिन विपक्ष की आपत्तियों के बाद इन्हें प्रवर समिति को भेज दिया गया। डिप्टी स्पीकर रणवीर गंगवा की अध्यक्षता वाली समिति में सभी दलों के विधायक शामिल थे। समिति की सिफारिशों को मानते हुए शहरी क्षेत्र में गाय-भैंस व अन्य पशु पालने पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
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शहरों में चल रही डेयरियां अब बंद हो जाएंगी। उन्हें गांव या शहरी निकायों की परिधि से बाहर स्थानांतरित किया जा सकता है। शहरी में डेयरियां होने से अनेक समस्याएं खड़ी हो रही थीं। गोबर के सीवरेज सिस्टम ठप होने के अलावा शहरों की खूबसूरती पर भी ग्रहण लग रहा था। इसे देखते हुए शहरी निकाय विभाग ने सरकार को डेयरियां हटाने का प्रस्ताव भेजा था। संशोधन विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि घरों में कुत्ता, बिल्ली इत्यादि पाल सकेंगे, लेकिन संबंधित निकाय से मंजूरी लेनी होगी।
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जिला नगर आयुक्तों की बढ़ाई शक्तियां
सरकार ने जिला नगर आयुक्तों की शक्तियां बढ़ा दी हैं। अब वे नगर परिषद के सीईओ भी होंगे। अधिकांश नगरपरिषदों के क्षेत्रफल व जनसंख्या में वृद्धि हुई है, जिससे कार्यों एवं निगरानी का दायरा कई गुणा बढ़ गया है।
शहरी विकास पर खर्च होगी दो फीसदी स्टांप डयूटी
निकायों की आमदनी बढ़ाने के लिए एक और फार्मूला तय किया है। तहसीलों में जमीनों की रजिस्ट्री व ट्रांसफर आदि पर लगने वाली स्टॉम्प ड्यूटी में दो फीसदी शहरों के विकास कार्यों के लिए होगी। दो फीसदी स्टॉम्प ड्यूटी में से एक फीसदी संबंधित निकाय के खाते में ट्रांसफर होगी। बाकी एक प्रतिशत स्टॉम्प ड्यूटी शहरी स्थानीय निकाय विभाग के पास जाएगी। यह राज्य सरकार तय करेगी कि किन प्रोजेक्ट्स पर कितनी राशि खर्च की जाएगी। योजना के अनुसार इस राशि को ऐसी जगह खर्च किया जाएगा, जहां से नियमित आय शुरू हो जाए
व्यवसायिक फीस दरें होंगी एक समान
प्रदेश की सभी नगर परिषदों एवं नगर पालिकाओं में व्यावसायिक लाइसेंस फीस की दरें एक समान की जाएंगी। पालिका क्षेत्रों में चर्बी पिघलाने, कच्चा चमड़ा साफ करने, हड्डियों या रक्त उबालने, साबुन के कारखाने, तेल उबालने के कारखाने, चर्मशोधन के कारखाने, ईंट-भट्ठों, मिट्टी के बर्तनों के कारखाने, भंडार या कारोबार के ऐसे स्थान, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, उन्हें चलाने की मंजूरी नहीं दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, अनबुझा चूना, सूखी घास, लकड़ी, काठ, कोयला या अन्य खतरनाक सामग्री में व्यापार करने के लिए डिपो, किसी विस्फोटक के लिए या पैट्रोल या स्प्रिट के लिए भण्डार गृह निषेध होगा। यदि कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करेगा, तो उसे 6 महीने कारावास या कम से कम 1000 रुपए और अधिक से अधिक 5000 रुपए तक जुर्माना देना पड़ेगा।

शोधित जल और थोक पेयजल होगा मंहगा
हरियाणा में लगातार बढ़ते जा रहे जल संकट को देखते हुए पानी का थोक इस्तेमाल और शोधित जल उपयोग को महंगा करने का निर्णय लिया गया है। बुधवार को विधानसभा हरियाणा जल संसाधान विधेयक पारित किया गया। शोधित जल को सिंचाई के अलावा बड़े कारखानों, पावर प्लांट व निर्माण इत्यादित में उपयोग लाया जाएगा। जल संसाधन प्राधिकरण के नियमों में संशोधन कर सरकार शोधित पानी इस्तेमाल की दरें तय करेगी। पानी के लिए क्या दरें होंगी, ये अधिकार जल संसाधन प्राधिकरण को दिए गए हैं। इसके साथ ही थोक जलापूर्ति वाले विभागों के लिए भी पानी महंगा होगा। इसका असर आने वाले दिनों में आम आदमी पर भी पड़ सकता है।
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