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Panchkula News: नायब तहसीलदार की नकली मुहर से बनाते थे जमानत के कागजात, दो गिरफ्तार
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संवाद न्यूज एजेंसी
खन्ना। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अदालत से जमानत दिलवाने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ खन्ना पुलिस ने किया है। इस मामले में दो आरोपियों सुरजीत सिंह पटियाला और उसके साथी महिमा सिंह निवासी राजपुरा को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इन आरोपियों के पास से नौ नकली आधार कार्ड, नायब तहसीलदार की जाली मुहर, एक फर्जी वैल्यूएशन सर्टिफिकेट और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि आरोपी इन नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अदालत से जमानत मंजूर करवाते था। अब तक आरोपी 25 से अधिक मामलों में फर्जी जमानत करवा चुके हैं। एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने बताया कि खन्ना पुलिस को इस गिरोह के बारे में एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली थी। यह गिरोह खन्ना क्षेत्र में लगातार फर्जी दस्तावेजों के सहारे अदालतों को गुमराह कर रहा था। इस सूचना के बाद थाना सिटी-1 के एसएचओ विनोद कुमार और एएसआई परगट सिंह ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तहसील खन्ना में दबिश दी और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारियों के दौरान भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य पहले किसी वास्तविक व्यक्ति का आधार कार्ड लेकर उसमें मामूली बदलाव कर देते थे। जैसे जन्मतिथि या नाम का एक अक्षर बदल देते थे। इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति की फोटो लगाकर नया फर्जी आधार कार्ड तैयार कर लिया जाता था। उसके बाद फर्जी फर्द तैयार की जाती थी, जिस पर नायब तहसीलदार या बीडीपीओ की नकली मुहर लगा दी जाती थी। इन नकली कागजों के आधार पर अदालत में आरोपियों के लिए जमानत याचिका दायर की जाती थी। हैरानी की बात यह है कि अक्सर बिना गंभीर जांच के अदालत से जमानत मंजूर हो जाती थीं। एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने कहा कि इस गिरोह को रिमांड पर लेकर गहराई से जांच की जाएगी। एसएसपी ने कहा कि इस मामले में यह जांच की जा रही है कि क्या रैकेट में किसी सरकारी कर्मचारी, अदालत या तहसील कार्यालय से जुड़े किसी व्यक्ति की संलिप्तता है। यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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गिरोह से जुड़े चार अन्य व्यक्तियों की पहचान
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस गिरोह से जुड़े चार अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें हरविंदर सिंह (निवासी मोगा), शमशेर खान, राजवीर सिंह उर्फ राजा उर्फ गुरमीत सिंह और हरमीत सिंह (निवासी भादसों) शामिल हैं। इन सभी की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह आर्थिक लाभ के लिए वर्षों से सक्रिय था। एक फर्जी जमानत के लिए आरोपी 50 से 70 हजार रुपये तक वसूलते थे। वहीं गंभीर आपराधिक मामलों में यह राशि लाखों रुपये तक जा सकती थी। एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने स्पष्ट किया कि खन्ना पुलिस इस प्रकार की फर्जीवाड़े को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी और इस नेटवर्क की पूरी तह तक जाकर सभी आरोपियों को कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।
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खन्ना। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अदालत से जमानत दिलवाने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ खन्ना पुलिस ने किया है। इस मामले में दो आरोपियों सुरजीत सिंह पटियाला और उसके साथी महिमा सिंह निवासी राजपुरा को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इन आरोपियों के पास से नौ नकली आधार कार्ड, नायब तहसीलदार की जाली मुहर, एक फर्जी वैल्यूएशन सर्टिफिकेट और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि आरोपी इन नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अदालत से जमानत मंजूर करवाते था। अब तक आरोपी 25 से अधिक मामलों में फर्जी जमानत करवा चुके हैं। एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने बताया कि खन्ना पुलिस को इस गिरोह के बारे में एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली थी। यह गिरोह खन्ना क्षेत्र में लगातार फर्जी दस्तावेजों के सहारे अदालतों को गुमराह कर रहा था। इस सूचना के बाद थाना सिटी-1 के एसएचओ विनोद कुमार और एएसआई परगट सिंह ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तहसील खन्ना में दबिश दी और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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गिरफ्तारियों के दौरान भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य पहले किसी वास्तविक व्यक्ति का आधार कार्ड लेकर उसमें मामूली बदलाव कर देते थे। जैसे जन्मतिथि या नाम का एक अक्षर बदल देते थे। इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति की फोटो लगाकर नया फर्जी आधार कार्ड तैयार कर लिया जाता था। उसके बाद फर्जी फर्द तैयार की जाती थी, जिस पर नायब तहसीलदार या बीडीपीओ की नकली मुहर लगा दी जाती थी। इन नकली कागजों के आधार पर अदालत में आरोपियों के लिए जमानत याचिका दायर की जाती थी। हैरानी की बात यह है कि अक्सर बिना गंभीर जांच के अदालत से जमानत मंजूर हो जाती थीं। एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने कहा कि इस गिरोह को रिमांड पर लेकर गहराई से जांच की जाएगी। एसएसपी ने कहा कि इस मामले में यह जांच की जा रही है कि क्या रैकेट में किसी सरकारी कर्मचारी, अदालत या तहसील कार्यालय से जुड़े किसी व्यक्ति की संलिप्तता है। यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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गिरोह से जुड़े चार अन्य व्यक्तियों की पहचान
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस गिरोह से जुड़े चार अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें हरविंदर सिंह (निवासी मोगा), शमशेर खान, राजवीर सिंह उर्फ राजा उर्फ गुरमीत सिंह और हरमीत सिंह (निवासी भादसों) शामिल हैं। इन सभी की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह गिरोह आर्थिक लाभ के लिए वर्षों से सक्रिय था। एक फर्जी जमानत के लिए आरोपी 50 से 70 हजार रुपये तक वसूलते थे। वहीं गंभीर आपराधिक मामलों में यह राशि लाखों रुपये तक जा सकती थी। एसएसपी डॉ. ज्योति यादव ने स्पष्ट किया कि खन्ना पुलिस इस प्रकार की फर्जीवाड़े को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगी और इस नेटवर्क की पूरी तह तक जाकर सभी आरोपियों को कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।