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Panchkula News: सेक्टर-6 सिविल अस्पताल का काम वर्षों से अधूरा, पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर से विस्तृत रिपोर्ट तलब
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मानवाधिकार आयोग ने पीडब्ल्यूडी को लगाई फटकार
फायर एनओसी नहीं, निर्माण 70% ही पूरा; इंजीनियर-इन-चीफ से तलब की गई विस्तृत रिपोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल का निर्माण वर्षों बाद भी अधूरा रहने और फायर सेफ्टी इंतजामों की गंभीर कमी को लेकर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि विभाग अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है। अयोग ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि अस्पताल भवन का निर्माण अभी तक लगभग 70 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। फायर सेफ्टी उपकरण भी पूरी तरह स्थापित नहीं किए गए हैं। फायर एनओसी न मिलने के कारण मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हो सका है, जिससे आम जनता, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फायर एनओसी के लिए दो बार आवेदन
सुनवाई में उपस्थित फायर ऑफिसर पंचकूला रविंदर पराशर ने बताया कि बीते दो महीनों में विभाग की ओर से अस्थायी फायर एनओसी के लिए दो बार आवेदन किया गया। पहला आवेदन खारिज कर दिया गया जबकि दूसरा अभी लंबित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फायर सेफ्टी से जुड़े उपकरणों की स्थापना पीडब्ल्यूडी द्वारा की जानी है, जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
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स्वास्थ्य विभाग ने झाड़ा पल्ला
सुनवाई में मौजूद एडीए कोमल ने आयोग को बताया कि सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) लगातार पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के लिए पत्र लिख रहे हैं। हालांकि निर्माण कार्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता इसलिए विभाग सीधे हस्तक्षेप करने में असमर्थ है।
जनता के मानवाधिकारों का उल्लंघन
शिकायतकर्ता सेक्टर-15 निवासी समाजसेवी एसके नैय्यर ने आयोग के समक्ष अस्पताल में मौजूद अनियमितताओं की जानकारी देते हुए कहा कि निर्माण में हो रही देरी सीधे तौर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों का हनन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई में पूरे रिकॉर्ड के साथ वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सेक्टर-6 सिविल अस्पताल पंचकूला की जनता के लिए जीवनरेखा है और इसके निर्माण में हो रही देरी की पूरी जवाबदेही पीडब्ल्यूडी की है। विभाग जिम्मेदारी से बच नहीं सकता और उसे ईमानदारी से कार्य करना होगा।
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फायर एनओसी नहीं, निर्माण 70% ही पूरा
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल का निर्माण वर्षों बाद भी अधूरा रहने और फायर सेफ्टी इंतजामों की गंभीर कमी को लेकर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि विभाग अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहा है। अयोग ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि अस्पताल भवन का निर्माण अभी तक लगभग 70 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। फायर सेफ्टी उपकरण भी पूरी तरह स्थापित नहीं किए गए हैं। फायर एनओसी न मिलने के कारण मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हो सका है, जिससे आम जनता, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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फायर एनओसी के लिए दो बार आवेदन
सुनवाई में उपस्थित फायर ऑफिसर पंचकूला रविंदर पराशर ने बताया कि बीते दो महीनों में विभाग की ओर से अस्थायी फायर एनओसी के लिए दो बार आवेदन किया गया। पहला आवेदन खारिज कर दिया गया जबकि दूसरा अभी लंबित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फायर सेफ्टी से जुड़े उपकरणों की स्थापना पीडब्ल्यूडी द्वारा की जानी है, जो अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
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स्वास्थ्य विभाग ने झाड़ा पल्ला
सुनवाई में मौजूद एडीए कोमल ने आयोग को बताया कि सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) लगातार पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के लिए पत्र लिख रहे हैं। हालांकि निर्माण कार्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता इसलिए विभाग सीधे हस्तक्षेप करने में असमर्थ है।
जनता के मानवाधिकारों का उल्लंघन
शिकायतकर्ता सेक्टर-15 निवासी समाजसेवी एसके नैय्यर ने आयोग के समक्ष अस्पताल में मौजूद अनियमितताओं की जानकारी देते हुए कहा कि निर्माण में हो रही देरी सीधे तौर पर आम नागरिकों के स्वास्थ्य अधिकारों का हनन है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मानवाधिकार आयोग ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ से विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई में पूरे रिकॉर्ड के साथ वरिष्ठ अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सेक्टर-6 सिविल अस्पताल पंचकूला की जनता के लिए जीवनरेखा है और इसके निर्माण में हो रही देरी की पूरी जवाबदेही पीडब्ल्यूडी की है। विभाग जिम्मेदारी से बच नहीं सकता और उसे ईमानदारी से कार्य करना होगा।