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रंगदारी की धमकियों का चलन पंजाब में तेजी से फैल रहा: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब में रंगदारी की धमकियों के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि शांतिप्रिय नागरिकों को धमकाकर रंगदारी मांगने की प्रवृत्ति राज्य में तेजी से फैल रही है और ऐसे मामलों में जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
यह मामला बटाला जिले के एक थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है जिसमें एक पूर्व सैनिक ने आरोप लगाया था कि उससे 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। शिकायतकर्ता 58 वर्षीय सेवानिवृत्त आर्मी कैप्टन हैं जिसके बच्चे विदेश में बसे हुए हैं और वह गांव के बाहरी इलाके में अकेला रहता है। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता से व्हाट्सएप कॉल के जरिये रंगदारी की मांग की गई और रकम न देने पर उसे, उसकी बहू और उसके पोते को जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपी ने इस मामले में अग्रिम जमानत की मांग की थी।
याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि रंगदारी की धमकियों का खतरा पंजाब राज्य में तेजी से फैल रहा है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और बिना हिरासत में पूछताछ के आरोपी की भूमिका सामने नहीं आ सकती।
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अदालत को बताया गया कि एक अन्य आरोपी को देसी पिस्तौल और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसका खुलासा बयान के आधार पर ही याचिकाकर्ता को सह-आरोपी के रूप में नामजद किया गया। अदालत ने चेतावनी दी कि गंभीर मामलों में समय से पहले संरक्षण देने से जांच प्रभावित हो सकती है। जांच एजेंसी का हिरासत में पूछताछ का अधिकार एक महत्वपूर्ण अधिकार है और यदि इसे रोका गया तो न्याय में चूक हो सकती है।
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यह मामला बटाला जिले के एक थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है जिसमें एक पूर्व सैनिक ने आरोप लगाया था कि उससे 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। शिकायतकर्ता 58 वर्षीय सेवानिवृत्त आर्मी कैप्टन हैं जिसके बच्चे विदेश में बसे हुए हैं और वह गांव के बाहरी इलाके में अकेला रहता है। अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता से व्हाट्सएप कॉल के जरिये रंगदारी की मांग की गई और रकम न देने पर उसे, उसकी बहू और उसके पोते को जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपी ने इस मामले में अग्रिम जमानत की मांग की थी।
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याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि रंगदारी की धमकियों का खतरा पंजाब राज्य में तेजी से फैल रहा है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और बिना हिरासत में पूछताछ के आरोपी की भूमिका सामने नहीं आ सकती।
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अदालत को बताया गया कि एक अन्य आरोपी को देसी पिस्तौल और कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसका खुलासा बयान के आधार पर ही याचिकाकर्ता को सह-आरोपी के रूप में नामजद किया गया। अदालत ने चेतावनी दी कि गंभीर मामलों में समय से पहले संरक्षण देने से जांच प्रभावित हो सकती है। जांच एजेंसी का हिरासत में पूछताछ का अधिकार एक महत्वपूर्ण अधिकार है और यदि इसे रोका गया तो न्याय में चूक हो सकती है।