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Panchkula News: नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों की पर्ची, केवल सेक्टर-6 में है चलती
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में भले ही मरीजों को सभी दवाइयां दिए जाने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत इससे अलग है। हार्ट, फैटी लीवर सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। कमीशन के बड़े खेल से तीमारदार और मरीज परेशान हैं। हालात यह हैं कि महंगी दवाइयों की कुछ दुकानें निर्धारित हैं। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के डॉक्टर जब मरीज को पर्ची लिखकर देते हैं, ताे वे दवाइयां केवल सेक्टर-6 की कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही मिलती हैं। मरीज या तीमारदार अगर दूसरे सेक्टर में पहुंच जाए तो केमिस्ट शॉप संचालकों का जवाब होता है कि यह दवाइयां केवल सेक्टर-6 में ही मिलेंगी। इस कारण मरीज और तीमारदार सेक्टर-6 की कुछ दुकानों पर ही लुटने को मजबूर हैं।
मौसम बदलने के साथ लगातार सिविल अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसमें रोजाना जहां आम दिनों में तीन हजार मरीज आ रहे हैं। वहीं इसमें अब साढ़े तीन हजार मरीज आ रहे हैं। इसमें हार्ट, मेडिसिन वार्ड में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दवाओं में कमीशन का खेल भी शुरू हो गया है। इससे मरीज और उनके तीमारदार परेशान हैं।
हार्ट की दवा बाहर से मिली
मुझे सीने में दर्द था। डॉक्टर ने कंपनी की दवाई लिखी है। पहली बार तो सेक्टर-6 से ले गए। इसके बाद रामगढ़ में यह दवा नहीं मिली। दवा नहीं मिलने के कारण दोबारा सेक्टर-6 के दवाखाना पर आना पड़ा। यह केवल कमीशन का खेल है। मरीजों को परेशान किया जाता है। - अंकुश, रामगढ़
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फैटी लीवर की दवा नहीं मिली
मेरा फैटी लीवर होने के कारण इलाज के लिए सिविल अस्पताल आया। इलाज के बाद दवा खरीदने मनीमाजरा चला गया। वहां दवा नहीं मिली। दवा नहीं मिलने के बाद दोबारा यहां आकर दवा ले गया। इस कारण परेशानी हुई है। यह सरासर डॉक्टरों का कमीशन का खेल है। कुछ दुकानों पर ही यह दवाई मिलती है। - जसपाल, मनीमाजरा
पांच हजार की दवा बाहर से आए
मेरे भाई को हार्ट की दिक्कत है। वह हार्ट सेंटर में भर्ती है। एक सप्ताह के अंदर उन्हें स्टंट लगा है। इसके लिए पांच हजार की दवाइयां बाहर से ले आए हैं। यह दवाएं हमें किसी अन्य कंपनी की कहीं नहीं मिली हैं। इस कारण परेशानी हुई है। - संजीव कुमार, तीमारदार
कंपनी की होती है दिक्कत
दवाओं के साल्ट एक जैसे सभी सेक्टर की मार्केट में मिल जाते हैं। कंपनी अलग होने के कारण दवाइयां खरीदने में मरीज और तीमारदार कंफ्यूज हो जाते हैं। लगातार डॉक्टरों की तरफ से कंपनी की दवाओं का मरीजों पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए। - बीबी सिंघल, मेंबर, हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल
मरीजों को इलाज के दौरान अस्पताल स्तर पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ओपीडी की सभी दवाएं उपलब्ध होती हैं। कई बार गंभीर मरीजों की दवाइयां बाहर से लानी पड़ती है। डॉक्टरों की इसके लिए गाइडलाइन जारी की गई है कि वह बाहर की दवाइयां मरीजों को नहीं लिखें। इसके लिए जेनेरिक दवाइयां सस्ते रेट में मरीजों को लिखने के आदेश जारी किए गए हैं। इस तरह की कोई शिकायत आती है, तो डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई करेंगे। -डॉ. उमेश मोदी, पीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर-6
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पंचकूला। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में भले ही मरीजों को सभी दवाइयां दिए जाने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन हकीकत इससे अलग है। हार्ट, फैटी लीवर सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी बाहर से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। कमीशन के बड़े खेल से तीमारदार और मरीज परेशान हैं। हालात यह हैं कि महंगी दवाइयों की कुछ दुकानें निर्धारित हैं। सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के डॉक्टर जब मरीज को पर्ची लिखकर देते हैं, ताे वे दवाइयां केवल सेक्टर-6 की कुछ चुनिंदा दुकानों पर ही मिलती हैं। मरीज या तीमारदार अगर दूसरे सेक्टर में पहुंच जाए तो केमिस्ट शॉप संचालकों का जवाब होता है कि यह दवाइयां केवल सेक्टर-6 में ही मिलेंगी। इस कारण मरीज और तीमारदार सेक्टर-6 की कुछ दुकानों पर ही लुटने को मजबूर हैं।
मौसम बदलने के साथ लगातार सिविल अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसमें रोजाना जहां आम दिनों में तीन हजार मरीज आ रहे हैं। वहीं इसमें अब साढ़े तीन हजार मरीज आ रहे हैं। इसमें हार्ट, मेडिसिन वार्ड में लगातार मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए दवाओं में कमीशन का खेल भी शुरू हो गया है। इससे मरीज और उनके तीमारदार परेशान हैं।
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हार्ट की दवा बाहर से मिली
मुझे सीने में दर्द था। डॉक्टर ने कंपनी की दवाई लिखी है। पहली बार तो सेक्टर-6 से ले गए। इसके बाद रामगढ़ में यह दवा नहीं मिली। दवा नहीं मिलने के कारण दोबारा सेक्टर-6 के दवाखाना पर आना पड़ा। यह केवल कमीशन का खेल है। मरीजों को परेशान किया जाता है। - अंकुश, रामगढ़
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फैटी लीवर की दवा नहीं मिली
मेरा फैटी लीवर होने के कारण इलाज के लिए सिविल अस्पताल आया। इलाज के बाद दवा खरीदने मनीमाजरा चला गया। वहां दवा नहीं मिली। दवा नहीं मिलने के बाद दोबारा यहां आकर दवा ले गया। इस कारण परेशानी हुई है। यह सरासर डॉक्टरों का कमीशन का खेल है। कुछ दुकानों पर ही यह दवाई मिलती है। - जसपाल, मनीमाजरा
पांच हजार की दवा बाहर से आए
मेरे भाई को हार्ट की दिक्कत है। वह हार्ट सेंटर में भर्ती है। एक सप्ताह के अंदर उन्हें स्टंट लगा है। इसके लिए पांच हजार की दवाइयां बाहर से ले आए हैं। यह दवाएं हमें किसी अन्य कंपनी की कहीं नहीं मिली हैं। इस कारण परेशानी हुई है। - संजीव कुमार, तीमारदार
कंपनी की होती है दिक्कत
दवाओं के साल्ट एक जैसे सभी सेक्टर की मार्केट में मिल जाते हैं। कंपनी अलग होने के कारण दवाइयां खरीदने में मरीज और तीमारदार कंफ्यूज हो जाते हैं। लगातार डॉक्टरों की तरफ से कंपनी की दवाओं का मरीजों पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए। - बीबी सिंघल, मेंबर, हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल
मरीजों को इलाज के दौरान अस्पताल स्तर पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ओपीडी की सभी दवाएं उपलब्ध होती हैं। कई बार गंभीर मरीजों की दवाइयां बाहर से लानी पड़ती है। डॉक्टरों की इसके लिए गाइडलाइन जारी की गई है कि वह बाहर की दवाइयां मरीजों को नहीं लिखें। इसके लिए जेनेरिक दवाइयां सस्ते रेट में मरीजों को लिखने के आदेश जारी किए गए हैं। इस तरह की कोई शिकायत आती है, तो डॉक्टर पर सख्त कार्रवाई करेंगे। -डॉ. उमेश मोदी, पीएमओ, सिविल अस्पताल सेक्टर-6