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प्रदेश का एक मात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी बनता जा रहा कंक्रीट का जंगल
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पंचकूला। पहाड़ी क्षेत्र मोरनी कंकरीट के जंगल में तबदील होता जा रहा है। अवैध खनन और कब्जों से मोरनी के जंगलों की अस्मिता पर खतरा मंडराने लगा है। वन क्षेत्र में कटाव लगातार जारी है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। पेड़ों को काटा जा रहा है। ऐसे में वन शहीदी दिवस का औचित्य केवल विज्ञापनों तक ही सीमित रह गया है। मोरनी का वन क्षेत्र खत्म होता जा रहा है। आज वन शहीदी दिवस है, लेकिन वन को बचाने के लिए वर्तमान सरकार के पास कोई नीति नहीं है। वर्तमान सरकार एक तरफ तो मोरनी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उनकी सुंदरता को छीना जा रहा है। बाहरी लोग जमीन खरीद कर होटल रेस्टोरेंट बना रहे हैं।
शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एवं एडवोकेट विजय बंसल ने बताया कि आज से तीन शतक पहले वर्ष 1730 में 11 सितंबर को राजस्थान के जोधपुर में एक पेड़ को कटने से बचाने के लिए बिश्नोई परिवार की एक मां और तीन बेटियों के बलिदान समेत 363 से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोगों बलिदान दिया था। तभी से हर साल 11 सितंबर को वन शहीदी दिवस मनाया जाता रहा है। बंसल ने बताया कि डीएफओ मोरनी, पिंजौर द्वारा आरटीआई में दी गई जानकारी के अनुसार वन मंडल मोरनी-पिंजौर की कुल 38216.09 वर्ग मीटर एरिया में से 8628.72 वर्ग मीटर रिजर्व फोरेस्ट एरिया है। 24499.60 वर्ग मीटर प्रोटेक्टिड वन एरिया, 684.54 वर्ग मीटर रोड, 125.56 वर्ग मीटर रेलवे, 7.94 वर्ग मीटर बूंद, 8.39 वर्ग मीटर अनक्लासिफाइड वन एरिया व पीएलपीए की धारा 4 व 5 के अंतर्गत 4311.34 वन एरिया है।
गांव शेर गुजरान ऐसा है जहां अवैध माइनिंग से पहाड़ खिसकने शुरू हो गए हैं और लोगों के घरों व सड़क किनारे बने डंगो में दरारें आने लगी है। मोरनी में किसानों को नौतोड़ भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला है। बाहरी लोग जमीन खरीदकर अवैध कब्जे कर रहे हैं। हालांकि इसके लिए भी उन्होंने हाईकोर्ट में पीआईएल दायर करके किसानों को नौतोड़ का मालिकाना हक दिलवाने की मांग की है।
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शिवालिक विकास मंच के अध्यक्ष एवं एडवोकेट विजय बंसल ने बताया कि आज से तीन शतक पहले वर्ष 1730 में 11 सितंबर को राजस्थान के जोधपुर में एक पेड़ को कटने से बचाने के लिए बिश्नोई परिवार की एक मां और तीन बेटियों के बलिदान समेत 363 से ज्यादा बिश्नोई समाज के लोगों बलिदान दिया था। तभी से हर साल 11 सितंबर को वन शहीदी दिवस मनाया जाता रहा है। बंसल ने बताया कि डीएफओ मोरनी, पिंजौर द्वारा आरटीआई में दी गई जानकारी के अनुसार वन मंडल मोरनी-पिंजौर की कुल 38216.09 वर्ग मीटर एरिया में से 8628.72 वर्ग मीटर रिजर्व फोरेस्ट एरिया है। 24499.60 वर्ग मीटर प्रोटेक्टिड वन एरिया, 684.54 वर्ग मीटर रोड, 125.56 वर्ग मीटर रेलवे, 7.94 वर्ग मीटर बूंद, 8.39 वर्ग मीटर अनक्लासिफाइड वन एरिया व पीएलपीए की धारा 4 व 5 के अंतर्गत 4311.34 वन एरिया है।
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गांव शेर गुजरान ऐसा है जहां अवैध माइनिंग से पहाड़ खिसकने शुरू हो गए हैं और लोगों के घरों व सड़क किनारे बने डंगो में दरारें आने लगी है। मोरनी में किसानों को नौतोड़ भूमि का मालिकाना हक नहीं मिला है। बाहरी लोग जमीन खरीदकर अवैध कब्जे कर रहे हैं। हालांकि इसके लिए भी उन्होंने हाईकोर्ट में पीआईएल दायर करके किसानों को नौतोड़ का मालिकाना हक दिलवाने की मांग की है।
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