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प्रेम, विश्वास और करुणा से जुड़े रहना ही मानव जीवन की सार्थकता : संपूर्णानंद ब्रह्मचारी
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संपूर्णानंद ब्रहमचारी व अन्य
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मानव जीवन की सार्थकता केवल सांस लेने और भौतिक सुविधाओं के भोग में नहीं बल्कि प्रेम, विश्वास और करुणा से जुड़े संबंधों में निहित है। संबंध हमारे अस्तित्व को अर्थ प्रदान करते हैं, हमें दिशा देते हैं और आत्मा को विस्तार का अनुभव कराते हैं। यह बात महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी महाराज ने एक समागम में कही।
उन्होंने कहा कि सभी प्राणी एक ही दिव्य स्रोत से जुड़े होने के कारण हमारे बीच जो संबंध बनते हैं, वे केवल देह आधारित नहीं होते, बल्कि आत्मा से आत्मा का मिलन होते हैं। उनका समाजसेवी प्रदीप गोयल, गौसेवक मंजीत सिंह, राकेश गर्ग बिट्टू, पार्षद जय कौशिक, सुनील कुमार सहित अन्य ने स्वागत किया और आशीर्वाद लिया। संपूर्णानंद ब्रहमचारी ने कहा कि जब हम दूसरों के दुःख में सहभागी होते हैं तो हम परमात्मा की ही सेवा कर रहे होते हैं। संबंध ही अस्तित्व का बोध कराते हैं। दार्शनिक रूप से प्रत्येक संबंध एक जिम्मेदारी है, जिसे निभाना मानव धर्म है।
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पंचकूला। मानव जीवन की सार्थकता केवल सांस लेने और भौतिक सुविधाओं के भोग में नहीं बल्कि प्रेम, विश्वास और करुणा से जुड़े संबंधों में निहित है। संबंध हमारे अस्तित्व को अर्थ प्रदान करते हैं, हमें दिशा देते हैं और आत्मा को विस्तार का अनुभव कराते हैं। यह बात महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी महाराज ने एक समागम में कही।
उन्होंने कहा कि सभी प्राणी एक ही दिव्य स्रोत से जुड़े होने के कारण हमारे बीच जो संबंध बनते हैं, वे केवल देह आधारित नहीं होते, बल्कि आत्मा से आत्मा का मिलन होते हैं। उनका समाजसेवी प्रदीप गोयल, गौसेवक मंजीत सिंह, राकेश गर्ग बिट्टू, पार्षद जय कौशिक, सुनील कुमार सहित अन्य ने स्वागत किया और आशीर्वाद लिया। संपूर्णानंद ब्रहमचारी ने कहा कि जब हम दूसरों के दुःख में सहभागी होते हैं तो हम परमात्मा की ही सेवा कर रहे होते हैं। संबंध ही अस्तित्व का बोध कराते हैं। दार्शनिक रूप से प्रत्येक संबंध एक जिम्मेदारी है, जिसे निभाना मानव धर्म है।
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