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कश्मीरी पंडितों का तीस साल का लंबा इंतजार खत्म : मनोहर

Fri, 08 Apr 2022 01:51 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 08 Apr 2022 01:51 AM IST
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The long wait of 30 years of Kashmiri Pandits is over : Manohar
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि कश्मीरी पंडितों का 30 वर्ष का लंबा इंतजार वीरवार को खत्म हो गया। वर्ष 1991 से 1993 तक बहादुरगढ़ के सेक्टर -2 में कश्मीरी पंडितपरिवारों ने जमीन खरीदी थी, जिसका उन्हें अब मालिकाना हक मिलने जा रहा है। उन्होंने चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित कुछ लाभार्थियों को मालिकाना हक के कागजात सौंपे। हरियाणा के इतिहास में आज का दिन बड़ा ही ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि 1991-1993 के दौरान कांग्रेस के कार्यकाल में जमीन खरीदने वाले कश्मीरी पंडितों के परिवार अभी तक अपने हक से वंचित थे। 30 वर्षों में इन परिवारों ने अपनी जमीन पाने की उम्मीद लगभग खो ही दी थी।1997 में कुछ उपयुक्त संशोधन करने के बाद, कुछ भूखंड कश्मीरी पंडितों के पक्ष में जारी किए गए थे, जिन परिवारों को उस समय जमीन नहीं मिली उन्हें करीब 3 दशक तक इंतजार करना पड़ा। 6 अप्रैल 2022 को उस समय दर्ज जमीन के माप के सत्यापन के बाद ड्रा के माध्यम से हक की अदायगी की गई। कुछ परिवारों को उनकी जमीन पहले ही मिल चुकी है। आज तक पूरी प्रक्रिया के माध्यम से कुल 209 परिवारों को प्रदेश सरकार ने वचनपूर्ति की है। यह विपक्ष के झूठे दावों का करारा जवाब है।
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एक कश्मीरी पंडित परिवार को मिल रही आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीरी पंडित परिवारों को दी जाने वाली 5000 रुपये की वित्तीय सहायता रोकने के विपक्ष के आरोप निराधार हैं। इन परिवारों को आर्थिक सहायता के रूप में 5000 रुपये देने की योजना के नियम कांग्रेस शासनकाल में बनाए गए थे। ऐसे किसी भी परिवार को आवेदन करने की तिथि से 5 साल की अवधि तक ही यह राशि मिलती है। कुल 5 परिवारों में से आज केवल एक परिवार को यह सहायता मिल रही है, क्योंकि इसके अभी तक 5 साल पूरे नहीं हुए हैं, जबकि बाकी परिवारों का पांच साल का मानदंड पूरा हो गया है। विपक्ष ‘कश्मीर फाइल्स’ फिल्म की सफलता को पचा नहीं पा रहा है, इसलिए बेबुनियाद बयानबाजी कर रहा है।
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कश्मीरी पंडितों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार, टीस भी दिखी
मेहनत की कमाई से लगभग 30 साल पहले खरीदी गई जमीन का हक दिलाने के लिए कश्मीरी पंडितों ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। कश्मीरी पंडित एसोसिएशन के प्रधान दिलीप कुमार पांडू ने कहा कि वर्ष 1990 में उनके खिलाफ हुए अत्याचारों के कारण घर छोड़ना पड़ा था और 1991-92 में बहादुरगढ़ आए। यहां आने के बाद अपने जीवन को फिर से शुरू करने की उम्मीद में जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा खरीदा, लेकिन हमें इसका कब्जा लेने में ही लगभग तीन दशक लग गए। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आभारी हैं, उनके कारण जमीन का मालिकाना हक मिला है। कश्मीरी पंडित विजय वैष्णवी ने कहा कि सरकार जमीन का मालिकाना हक तो दे रही है, लेकिन उनके विकास शुल्क को माफ करे। तीन करोड़ का विकास शुल्क वे पहले ही जमा करा चुके हैं।
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