{"_id":"6154d6a28ebc3e0997371662","slug":"the-administration-opposed-the-demand-for-basic-facilities-in-sukhna-catchment-panchkula-news-pkl428465627","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुखना कैचमेंट में मूल-भूत सुविधाओं की मांग का प्रशासन ने किया विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुखना कैचमेंट में मूल-भूत सुविधाओं की मांग का प्रशासन ने किया विरोध
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंडीगढ़। सुखना कैचमेंट में रहने वाले मूलभूत सुविधाओं से वंचित लोगों द्वारा खराब सड़कों, सीवर व बिजली-पानी की समस्या का समाधान करवाने का निर्देश जारी करने की अपील का चंडीगढ़ प्रशासन ने विरोध किया है। यूटी प्रशासन, पंजाब और केंद्र तीनों ने इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए समय देने की मांग की है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुखना कैचमेंट एरिया को लेकर लिए गए संज्ञान का मार्च 2020 में निपटारा किया था। आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार ही कैचमेंट एरिया माना जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा था कि कैचमेंट एरिया में मौजूद सभी निर्माणों को गिराया जाए और जिन लोगों ने निर्माण के लिए स्वीकृति ली थी उनको वैकल्पिक स्थान के साथ 25-25 लाख रुपये मुआवजा जारी करने का पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को आदेश दिया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के चलते पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी। पिछली वर्ष दिसंबर में हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्माण गिराने के आदेश पर रोक लगा दी थी। आदेश पर रोक लगाने के साथ ही हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि इस क्षेत्र में न तो कोई निर्माण कार्य होगा और न ही बिना हाईकोर्ट की अनुमति के बिजली व पानी के कनेक्शन दिए जाएंगे।
विज्ञापन
अब स्थानीय लोगों ने अर्जी दाखिल कर बताया कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई 18 मार्च को होनी थी, लेकिन कोरोना के चलते लगातार सुनवाई स्थगित हो रही है। याची ने बताया कि सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं, बिजली-पानी और सीवर की समस्या बनी हुई है। सरकार के पास जाते हैं तो हाईकोर्ट की रोक बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। लोगों ने हाईकोर्ट से अपील की है कि आदेश में संशोधन किया जाए या अन्य कोई राहत दी जाए ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
विज्ञापन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सुखना कैचमेंट एरिया को लेकर लिए गए संज्ञान का मार्च 2020 में निपटारा किया था। आदेश में हाईकोर्ट ने कहा था कि सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार ही कैचमेंट एरिया माना जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा था कि कैचमेंट एरिया में मौजूद सभी निर्माणों को गिराया जाए और जिन लोगों ने निर्माण के लिए स्वीकृति ली थी उनको वैकल्पिक स्थान के साथ 25-25 लाख रुपये मुआवजा जारी करने का पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को आदेश दिया था।
विज्ञापन
हाईकोर्ट के इस फैसले के चलते पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई थी। पिछली वर्ष दिसंबर में हाईकोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्माण गिराने के आदेश पर रोक लगा दी थी। आदेश पर रोक लगाने के साथ ही हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा था कि इस क्षेत्र में न तो कोई निर्माण कार्य होगा और न ही बिना हाईकोर्ट की अनुमति के बिजली व पानी के कनेक्शन दिए जाएंगे।
विज्ञापन
अब स्थानीय लोगों ने अर्जी दाखिल कर बताया कि पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई 18 मार्च को होनी थी, लेकिन कोरोना के चलते लगातार सुनवाई स्थगित हो रही है। याची ने बताया कि सड़कें पूरी तरह से टूट चुकी हैं, बिजली-पानी और सीवर की समस्या बनी हुई है। सरकार के पास जाते हैं तो हाईकोर्ट की रोक बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। लोगों ने हाईकोर्ट से अपील की है कि आदेश में संशोधन किया जाए या अन्य कोई राहत दी जाए ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।