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Panchkula News: शिक्षक को इंसाफ के लिए करना पड़ा 20 साल का इंतजार, चिकित्सा प्रतिपूर्ति का आदेश बरकरार

Fri, 30 Jan 2026 10:05 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jan 2026 10:05 PM IST
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Teacher waited 20 years for justice, medical reimbursement order upheld
हाईकोर्ट ने प्रतिपूर्ति का आदेश देते हुए कहा कि राज्य सरकार को होना चाहिए उदार
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पंजाब सरकार की दूसरी अपील खारिज, मानसा की अदालत का 2006 का फैसला बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। चिकित्सा प्रतिपूर्ति को लेकर 20 साल की कानूनी लड़ाई समाप्त करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 2002 में आपातकालीन हृदय शल्य चिकित्सा कराने वाले एक सरकारी स्कूल शिक्षक के पूरे दावे को बरकरार रखा है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने फैसला सुनाते हुए पंजाब राज्य द्वारा दायर नियमित दूसरी अपील को खारिज कर दिया और मानसा के जिला न्यायाधीश के 2006 के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें भूपिंदर सिंह के मुआवजे के दावे को स्वीकार किया गया था।
भूपेंद्र सिंह मानसा के फुस मंडी स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। उन्होंने नवंबर 2002 में नई दिल्ली के एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी करवाई थी। उस वर्ष 18 से 30 नवंबर तक अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनका खर्च 2,20,677 और 11,000 रुपये आया था।
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हाईकोर्ट ने पाया कि एंजियोग्राफी में दिल की गंभीर समस्याएं सामने आने के बाद भूपेंद्र को आधिकारिक चैनलों के माध्यम से अस्पताल भेजा गया था। मुख्य कानूनी मुद्दा यह था कि क्या किसी सरकारी कर्मचारी को आपातकालीन स्थिति में निजी अस्पताल में भेजे जाने पर चिकित्सा बिलों को एम्स की दरों तक सीमित किया जा सकता है। जस्टिस शर्मा ने इस तरह की सीमा के विरुद्ध फैसला सुनाते हुए कहा कि सिंह पूर्ण प्रतिपूर्ति के हकदार हैं क्योंकि रेफरल सरकार द्वारा किया गया था और अस्पताल मान्यता प्राप्त था।
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अदालत ने मामले के निपटारे में हुई लंबी देरी की आलोचना की। जस्टिस शर्मा ने कहा कि निष्कर्ष निकालने से पहले, अदालत को इस बात का दुख है कि ऐसे मामलों का फैसला लगभग 20 वर्षों के बाद हो रहा है, जबकि इन्हें तुरंत निपटाया जाना चाहिए था क्योंकि इसमें खर्च की भरपाई का मामला शामिल है। अदालत ने कहा कि सरकार को चिकित्सा उपचार और प्रतिपूर्ति के लिए नीतियां बनाते समय उदार होना चाहिए।
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