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Panchkula News: 8 महीने में ध्वस्त हो गई लाखों की सिंथेटिक ट्रैक, निर्माण गुणवत्ता पर सवाल
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सेक्टर-9, सेक्टर-11 और अभयपुर के पार्कों में बदहाल हुई ट्रैक, पार्षदों ने दोषी ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग उठाई
आदित्य शर्मा
पंचकूला। शहर में लोगों को वॉक और व्यायाम की बेहतर सुविधा देने के लिए नगर निगम द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सिंथेटिक ट्रैक महज आठ महीने में ही उखड़ने लगी हैं। सेक्टर-9, सेक्टर-11 और अभयपुर के पार्कों में बनी ट्रैक कई जगह से क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। अभयपुर में स्थिति इतनी खराब है कि ट्रैक की परत हाथ से खींचने पर निकल रही है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। वार्ड-4, 10 और 12 के पार्षदों ने नगर निगम आयुक्त को शिकायत देकर संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।
एक सप्ताह में ही टूट गई 16 लाख रुपये की ट्रैक
सरकारी क्वार्टरों के पार्क में नगर निगम ने एक सप्ताह पहले 16 लाख रुपये की लागत से सिंथेटिक ट्रैक बनवाई थी, लेकिन अब उसमें टूट-फूट शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के बाद ठेकेदार ने ट्रैक दोबारा बनाने का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। वार्ड नंबर-12 के पार्षद राकेश कुमार ने बताया कि ठेकेदार ने नई ट्रैक बनाने के लिए दो माह का समय मांगा है। मामले में नगर निगम आयुक्त से कार्रवाई की मांग की जाएगी।
छह महीने में खस्ता हुई 35 लाख रुपये की ट्रैक
सेक्टर-9 के पार्क में करीब 35 लाख रुपये की लागत से बनी ट्रैक तीन से चार स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। क्षेत्रीय पार्षद भारत हितैषी ने कहा कि मात्र छह महीने में ट्रैक की यह स्थिति निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो निर्माण की गुणवत्ता की उचित जांच की गई और न ही आरडब्ल्यूए को विश्वास में लिया गया। लोगों को सुबह-शाम टहलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मामले से नगर निगम आयुक्त विनय कुमार को अवगत कराया गया है। आयुक्त ने संबंधित ठेकेदार को मरम्मत और स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया है।
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अभयपुर में सबसे खराब हालत
अभयपुर के पार्क में नवंबर में करीब 27 लाख रुपये की लागत से बनाई गई ईपीडीएम ट्रैक की हालत सबसे खराब बताई जा रही है। कई स्थानों पर ट्रैक पूरी तरह उखड़ चुकी है। क्षेत्रीय पार्षद शेखर पांडेय ने कहा कि वह यह मामला नगर निगम सदन में भी उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि के तहत ट्रैक की मरम्मत कराई जाएगी, लेकिन ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। जब लोग ट्रैक का उपयोग ही नहीं कर पा रहे हैं तो लाखों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या है। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार को नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि के दौरान हुई क्षति की मरम्मत संबंधित ठेकेदार को अपने खर्च पर करनी होगी। जांच में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं, स्थानीय लोगों और पार्षदों का आरोप है कि बिना थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच के निर्माण कार्यों को मंजूरी दी जा रही है। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, सरकारी धन की बर्बादी इसी तरह जारी रहेगी।
कोट
सिर्फ छह महीने में ट्रैक टूट गई। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। नगर निगम अधिकारियों के साथ-साथ आरडब्ल्यूए को भी ऐसे कार्यों पर नजर रखनी चाहिए। ट्रैक क्षतिग्रस्त होने से लोगों को परेशानी हो रही है। इस निर्माण कार्य के लिए 35 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। - भारत हितैषी, पार्षद, सेक्टर-9
कोट
यह मुद्दा नगर निगम सदन में उठा चुका हूं। डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि के तहत ठेकेदार से मरम्मत करवाई जाएगी, लेकिन ऐसे ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। ट्रैक पर 27 लाख रुपये खर्च हुए थे और इसका निर्माण नवंबर में हुआ था। - शेखर पांडेय, पार्षद, अभयपुर
कोट
सरकारी क्वार्टरों के पार्क में एक सप्ताह पहले बनाई गई सिंथेटिक ट्रैक टूटने लगी है। निर्माण में कम गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के बाद ठेकेदार ने ट्रैक दोबारा बनाने का आश्वासन दिया है। इस ट्रैक के निर्माण के लिए 16 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। - राकेश कुमार, पार्षद, वार्ड-12
कोट
सेक्टर 11 में सरकारी क्वार्टरों में स्थित पार्क में सिंथेटिक ट्रैक हाल ही में बनाया गया है। ट्रैक के टूटने के बाद एजेंसी इसे दोबारा बनाएगी। कांट्रैक्टर को एक सप्ताह के भीतर इसे बनाने को कहा गया है।
ललित, जेई, नगर निगम
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आदित्य शर्मा
पंचकूला। शहर में लोगों को वॉक और व्यायाम की बेहतर सुविधा देने के लिए नगर निगम द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई सिंथेटिक ट्रैक महज आठ महीने में ही उखड़ने लगी हैं। सेक्टर-9, सेक्टर-11 और अभयपुर के पार्कों में बनी ट्रैक कई जगह से क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। अभयपुर में स्थिति इतनी खराब है कि ट्रैक की परत हाथ से खींचने पर निकल रही है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। वार्ड-4, 10 और 12 के पार्षदों ने नगर निगम आयुक्त को शिकायत देकर संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।
एक सप्ताह में ही टूट गई 16 लाख रुपये की ट्रैक
सरकारी क्वार्टरों के पार्क में नगर निगम ने एक सप्ताह पहले 16 लाख रुपये की लागत से सिंथेटिक ट्रैक बनवाई थी, लेकिन अब उसमें टूट-फूट शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के बाद ठेकेदार ने ट्रैक दोबारा बनाने का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है। वार्ड नंबर-12 के पार्षद राकेश कुमार ने बताया कि ठेकेदार ने नई ट्रैक बनाने के लिए दो माह का समय मांगा है। मामले में नगर निगम आयुक्त से कार्रवाई की मांग की जाएगी।
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छह महीने में खस्ता हुई 35 लाख रुपये की ट्रैक
सेक्टर-9 के पार्क में करीब 35 लाख रुपये की लागत से बनी ट्रैक तीन से चार स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। क्षेत्रीय पार्षद भारत हितैषी ने कहा कि मात्र छह महीने में ट्रैक की यह स्थिति निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो निर्माण की गुणवत्ता की उचित जांच की गई और न ही आरडब्ल्यूए को विश्वास में लिया गया। लोगों को सुबह-शाम टहलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मामले से नगर निगम आयुक्त विनय कुमार को अवगत कराया गया है। आयुक्त ने संबंधित ठेकेदार को मरम्मत और स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया है।
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अभयपुर में सबसे खराब हालत
अभयपुर के पार्क में नवंबर में करीब 27 लाख रुपये की लागत से बनाई गई ईपीडीएम ट्रैक की हालत सबसे खराब बताई जा रही है। कई स्थानों पर ट्रैक पूरी तरह उखड़ चुकी है। क्षेत्रीय पार्षद शेखर पांडेय ने कहा कि वह यह मामला नगर निगम सदन में भी उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि के तहत ट्रैक की मरम्मत कराई जाएगी, लेकिन ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। जब लोग ट्रैक का उपयोग ही नहीं कर पा रहे हैं तो लाखों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या है। उन्होंने बताया कि संबंधित ठेकेदार को नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि के दौरान हुई क्षति की मरम्मत संबंधित ठेकेदार को अपने खर्च पर करनी होगी। जांच में दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं, स्थानीय लोगों और पार्षदों का आरोप है कि बिना थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच के निर्माण कार्यों को मंजूरी दी जा रही है। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, सरकारी धन की बर्बादी इसी तरह जारी रहेगी।
कोट
सिर्फ छह महीने में ट्रैक टूट गई। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। नगर निगम अधिकारियों के साथ-साथ आरडब्ल्यूए को भी ऐसे कार्यों पर नजर रखनी चाहिए। ट्रैक क्षतिग्रस्त होने से लोगों को परेशानी हो रही है। इस निर्माण कार्य के लिए 35 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। - भारत हितैषी, पार्षद, सेक्टर-9
कोट
यह मुद्दा नगर निगम सदन में उठा चुका हूं। डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि के तहत ठेकेदार से मरम्मत करवाई जाएगी, लेकिन ऐसे ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। ट्रैक पर 27 लाख रुपये खर्च हुए थे और इसका निर्माण नवंबर में हुआ था। - शेखर पांडेय, पार्षद, अभयपुर
कोट
सरकारी क्वार्टरों के पार्क में एक सप्ताह पहले बनाई गई सिंथेटिक ट्रैक टूटने लगी है। निर्माण में कम गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के बाद ठेकेदार ने ट्रैक दोबारा बनाने का आश्वासन दिया है। इस ट्रैक के निर्माण के लिए 16 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था। - राकेश कुमार, पार्षद, वार्ड-12
कोट
सेक्टर 11 में सरकारी क्वार्टरों में स्थित पार्क में सिंथेटिक ट्रैक हाल ही में बनाया गया है। ट्रैक के टूटने के बाद एजेंसी इसे दोबारा बनाएगी। कांट्रैक्टर को एक सप्ताह के भीतर इसे बनाने को कहा गया है।
ललित, जेई, नगर निगम