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Panchkula News: अवैध कॉलोनियों पर लटकी तलवार, निर्माण रोकने की मांग पर पंजाब सरकार को नोटिस
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2018 में पंजाब सरकार अवैध कॉलोनियों के लिए लेकर आई थी रेगुलाइजेशन पॉलिसी
इसके बाद की सभी अवैध कॉलोनियों की पहचान करने व तुरंत निर्माण रुकवाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में वर्ष 2018 के बाद की अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इन कॉलोनियों की पहचान करने और तुरंत निर्माण रुकवाने की मांग पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
लुधियाना निवासी प्रेम प्रकाश ने एडवोकेट आयुष गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए बताया कि पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट के तहत अवैध कॉलोनियों को पंजीकृत करने पर पाबंदी थी। 2014 और फिर बाद में 2018 में वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत अवैध कॉलोनियों को पंजीकृत करने के सरकार ने निर्देश जारी किए थे। यह तय किया गया था कि सब-रजिस्ट्रार ऐसी किसी संपत्ति को पंजीकृत नहीं करेंगे जिसकी एनओसी नहीं होगी। 12 दिसंबर, 2019 को सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर एनओसी की बाध्यता हटा दी थी जिसे मुख्य याचिका में चुनौती दी गई थी। याची की दलील थी कि ऐसा करके अवैध कॉलोनियों के पंजीकरण का रास्ता सरकार ने साफ कर दिया है। हरियाणा के एक मामले में हाईकोर्ट पहले ही तय कर चुका है कि बिना एनओसी सेल डीड नहीं हो सकती।
इस मामले में अब अर्जी दाखिल करते हुए याची ने बताया कि सरकार की 2018 की रेगुलाइजेशन पॉलिसी के बाद भी पंजाब में बड़े स्तर पर अवैध कॉलोनियों में निर्माण कार्य जारी है। पंजाब सरकार की ओर से इन कॉलोनियों की पहचान के लिए कोई सर्वे नहीं किया गया है। यदि इनकी अभी पहचान नहीं की गई और निर्माण नहीं रुकवाया गया तो इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा। जानकारी के अभाव में आम लोग प्रॉपर्टी खरीद कर फंस जाएंगे। हाईकोर्ट से अपील की गई कि इन कॉलोनियों में निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने का आदेश जारी किया जाए। हाईकोर्ट ने इस अर्जी पर पंजाब सरकार व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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इसके बाद की सभी अवैध कॉलोनियों की पहचान करने व तुरंत निर्माण रुकवाने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में वर्ष 2018 के बाद की अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इन कॉलोनियों की पहचान करने और तुरंत निर्माण रुकवाने की मांग पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
लुधियाना निवासी प्रेम प्रकाश ने एडवोकेट आयुष गुप्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए बताया कि पंजाब अपार्टमेंट एंड प्रॉपर्टी रेगुलेशन एक्ट के तहत अवैध कॉलोनियों को पंजीकृत करने पर पाबंदी थी। 2014 और फिर बाद में 2018 में वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत अवैध कॉलोनियों को पंजीकृत करने के सरकार ने निर्देश जारी किए थे। यह तय किया गया था कि सब-रजिस्ट्रार ऐसी किसी संपत्ति को पंजीकृत नहीं करेंगे जिसकी एनओसी नहीं होगी। 12 दिसंबर, 2019 को सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर एनओसी की बाध्यता हटा दी थी जिसे मुख्य याचिका में चुनौती दी गई थी। याची की दलील थी कि ऐसा करके अवैध कॉलोनियों के पंजीकरण का रास्ता सरकार ने साफ कर दिया है। हरियाणा के एक मामले में हाईकोर्ट पहले ही तय कर चुका है कि बिना एनओसी सेल डीड नहीं हो सकती।
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इस मामले में अब अर्जी दाखिल करते हुए याची ने बताया कि सरकार की 2018 की रेगुलाइजेशन पॉलिसी के बाद भी पंजाब में बड़े स्तर पर अवैध कॉलोनियों में निर्माण कार्य जारी है। पंजाब सरकार की ओर से इन कॉलोनियों की पहचान के लिए कोई सर्वे नहीं किया गया है। यदि इनकी अभी पहचान नहीं की गई और निर्माण नहीं रुकवाया गया तो इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा। जानकारी के अभाव में आम लोग प्रॉपर्टी खरीद कर फंस जाएंगे। हाईकोर्ट से अपील की गई कि इन कॉलोनियों में निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगाने का आदेश जारी किया जाए। हाईकोर्ट ने इस अर्जी पर पंजाब सरकार व अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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