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Panchkula News: 100 रुपये से शुरू किया कारोबार, आज हजारों महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
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फुलकारी की कला से आत्मनिर्भर बनी सुरजीत कौर, पंजाब-हरियाणा में देती हैं प्रशिक्षण और नई जिंदगी की राह
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। कभी सिर्फ शौक थी, आज लाखों में बदल गई। फिरोजपुर की सुरजीत कौर ने 100 रुपये से फुलकारी का काम शुरू किया और अब यह कला हजारों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का जरिया बन गई है। पंचकूला सेक्टर-5 के सरस मेले में अपने स्टाल पर पहुंचीं सुरजीत कौर ने बताया कि बचपन से ही फुलकारी का शौक था जिसे उन्होंने जुनून में बदलकर कारोबार का रूप दे दिया।
जरूरतमंद महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
साल 2015 में सेल्फ हेल्प ग्रुप बना कर सुरजीत कौर ने 2018 में मशीन लगाकर कारोबार शुरू किया। सात साल में उन्होंने न केवल खुद को सफल बनाया बल्कि पंजाब और हरियाणा की कई जरूरतमंद महिलाओं को भी फुलकारी सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने बताया कि विदेशी महिलाएं भी उनकी बनाई फुलकारी को बेहद पसंद करती हैं।
फुलकारी को नए कलेवर में प्रस्तुत किया
सुरजीत ने बताया कि अब लड़कियां पारंपरिक साड़ी या सूट की जगह स्टाल, क्रॉप टॉप और शॉर्ट कुर्ती पहनना पसंद करती हैं। इसलिए उन्होंने फुलकारी में नए डिजाइन तैयार किए हैं। पहले रेशम के धागों से ही कढ़ाई होती थी अब इसमें स्टोन, मोती, जरकन और गोटा का भी इस्तेमाल किया जाता है।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। कभी सिर्फ शौक थी, आज लाखों में बदल गई। फिरोजपुर की सुरजीत कौर ने 100 रुपये से फुलकारी का काम शुरू किया और अब यह कला हजारों महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का जरिया बन गई है। पंचकूला सेक्टर-5 के सरस मेले में अपने स्टाल पर पहुंचीं सुरजीत कौर ने बताया कि बचपन से ही फुलकारी का शौक था जिसे उन्होंने जुनून में बदलकर कारोबार का रूप दे दिया।
जरूरतमंद महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
साल 2015 में सेल्फ हेल्प ग्रुप बना कर सुरजीत कौर ने 2018 में मशीन लगाकर कारोबार शुरू किया। सात साल में उन्होंने न केवल खुद को सफल बनाया बल्कि पंजाब और हरियाणा की कई जरूरतमंद महिलाओं को भी फुलकारी सिखाकर आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने बताया कि विदेशी महिलाएं भी उनकी बनाई फुलकारी को बेहद पसंद करती हैं।
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फुलकारी को नए कलेवर में प्रस्तुत किया
सुरजीत ने बताया कि अब लड़कियां पारंपरिक साड़ी या सूट की जगह स्टाल, क्रॉप टॉप और शॉर्ट कुर्ती पहनना पसंद करती हैं। इसलिए उन्होंने फुलकारी में नए डिजाइन तैयार किए हैं। पहले रेशम के धागों से ही कढ़ाई होती थी अब इसमें स्टोन, मोती, जरकन और गोटा का भी इस्तेमाल किया जाता है।
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