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Panchkula News: स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के निर्माण में मानकों का नहीं रखा ध्यान

Sun, 14 Apr 2024 03:50 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2024 03:50 AM IST
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Standards were not taken into account in the construction of stilt plus four floors
सेक्टर-11 में स्टिल्ट प्लस फोर के निर्माण के चलते दो मकानों में आई थी दरारें, पीड़ित ने पेक से जांच कराने की मांग की थी
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। स्टिल्ट प्लस चार मंजिल फ्लैटों में अपने सपनों का घर बसाने से पहले उसकी अच्छे से पड़ताल कर लें। पंचकूला सेक्टर-11 के एक स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के निर्माण में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया है। इसका खुलासा पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) की टीम की जांच रिपोर्ट में सामने आया है। पेक की टीम ने जिन पिलरों के सहारे स्टिल्ट प्लस चार मंजिल बिल्डिंग का ढांचा खड़ा किया, उसकी बुनियाद पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मानकों को ताक पर रखकर बनाए निर्माण को सही करने के सुझाव दिए गए हैं। दरअसल पंचकूला के शहरी क्षेत्र में 300 से ज्यादा स्टिल्ट प्लस चार मंजिल इमारतों का निर्माण किया गया है। इसके चलते पास में बने मकानों को काफी नुकसान पहुंचा। इसके मद्देनजर 100 से ज्यादा शिकायतें हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के पास आई थीं। पेक टीम की रिपोर्ट आने के बाद स्थानीय लोगों की मांग है कि पंचकूला के सभी स्टिल्ट प्लस चार मंजिल निर्माणों की बुनियादों की जांच सरकारी विभाग के बजाय आईआईटी रूड़की, पेक जैसे तकनीकी शिक्षण संस्थानों से कराना चाहिए।
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24 जनवरी 2023 को पेक से इंस्पेक्शन कराने की मिली इजाजत
सेक्टर-11 निवासी हरीचंद हंस और प्रमोद हंस सहित उनके परिवार ने जिला अदालत में पेक की जांच पूरी होने तक निर्माणाधीन मकान में काम बंद कराने की मांग की थी। इसके बाद 24 जनवरी 2023 को पेक से इंस्पेक्शन कराने की अदालत ने अनुमति दी। मकान में कंस्ट्रक्शन का काम अभी बंद है। इस इंस्पेक्शन के लिए पेक की टीम ने 5.90 लाख रुपये जीएसटी समेत फीस मांगी थी। जिला अदालत ने दोनों पार्टियों को 50-50 फीसदी फीस बांटने के निर्देश दिए थे। जांच के बाद 5 अप्रैल 2024 को पेक की टीम ने रिपोर्ट जिला अदालत में जमा करवा दिया है।
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करीब 15 पिलरों में महज तीन की हुई जांच, मिली कई खामियां
- स्टिल्ट प्लस चार मंजिल के निर्माण में ड्राइंग के मुताबिक बीम नहीं डाला गया
- स्टिल्ट प्लस चार मंजिल जिन पिलरों पर खड़ा किया है, उनमें मानकों के अनुसार कंक्रीट नहीं भरा गया है
- सभी पिलरों के कॉलम छोटे कर दिए गए हैं, इसमें 600 एमएम के पिलर बनाए जाने थे, जो महज 200 एमएम के बनाए गए हैं
- पिलर के दोनों किनारों की मोटाई 300 एमएम होनी चाहिए। जो महज 100 से 125 एमएम के बीच मिली
- पुराने मकानों की नींव 3 फुट है, जबकि नए मकानों की नींव 5 से 7 फुट पर डाली गई है। आसपास के दोनों मकानों में दरारें आई हैं।


स्टिल्ट प्लस चार मंजिल निर्माण से हुआ नुकसान
सेक्टर-11 के मकान नंबर 706 निवासी प्रमोद हंस ने बताया कि उनके मकान के पास स्टिल्ट प्लस चार मंजिल का स्ट्रक्चर खड़ा किया गया है। इसके चलते उनके मकान की छत, दीवारों और फर्श पर दरारें आ गई हैं। दीवार के साथ लगती फर्श धंसने लगे है। यहां तक की खिड़कियों में लगी ग्रिल टेढ़ी हो गई है। फर्श धंसने के चलते दरवाजे भी बंद नहीं होते।


कब मिली स्टिल्ट प्लस फोर की इजाजत, विवाद के बाद जांच कमेटी बनाई
हरियाणा सरकार ने बिल्डिंग कोड में बदलाव कर स्टिल्ट प्लस थ्री फ्लोर बनाने की इजाजत दी थी। इसके बाद 2017 में बदलाव कर स्टिल्ट प्लस फोर बनाने की इजाजत दे दी। इसके बाद शहर में करीब हर सेक्टर के अंदर 10 से 12 मकान तोड़कर नए बिल्डिंग कोड के हिसाब से बनाए गए। इनमें अधिकतर मकान बनकर तैयार हो गए हैं। कुछ अंतिम चरण में हैं। इन मकानों के निर्माण के दौरान पड़ोसियों के मकानों के दरारें आई और इसकी शिकायतें पूरे प्रदेश भर से प्रदेश सरकार और एचएसवीपी के पास पहुंची थी। इसके बाद आए दिन हो रहे विवादों के निपटारे के लिए हरियाणा सरकार ने 17 मार्च 2023 को एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित किया था। कमेटी ने स्टिल्ट प्लस चार मंजिल मकानों की जांच के बाद जून 2023 में अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। आज नौ माह बाद भी सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट पर अभी निर्णय नहीं लिया।

सेक्टर-11 स्टील्ट प्लस फोर की जांच रिपोर्ट पेक ने जिला अदालत में 5 अप्रैल को पेश कर दी है। इसके एक कॉपी एचएसवीपी को भी उपलब्ध करवाई गई है। - लविश अरोड़ा, एडवोकेट, जिला अदालत पंचकूला
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