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Panchkula News: वेलनेस सेंटर में स्टाफ की कमी से बढ़ा मरीजों का दबाव, व्यवस्था चरमराई
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पंचकूला। सेक्टर 16 स्थित सीजीएचएस वेलनेस सेंटर पंचकूला में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी के कारण मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते ओपीडी की टाइमिंग में भी फेरबदल करना पड़ा। वेलनेस सेंटर में भीड़ दिन-ब-दिन बढ़ रही है क्योंकि नए कार्ड जारी किए जा रहे हैं। आलम यह है कि आने वाले लोगों के लिए बैठने तक की पर्याप्त जगह नहीं है और चेकअप में काफी समय लग रहा है। ऑनलाइन बुकिंग सुविधा होने के बावजूद बुकिंग के मरीजों के अलावा दूसरे वेलनेस सेंटरों के लाभार्थी भी पंचकूला में अलग-अलग सुविधाओं का लाभ लेने नियमित रूप से आते हैं, जिससे व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
सेंटर में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति का मुद्दा एडवाइजरी कमेटी की बैठक में कई बार उठ चुका है। एडवाइजर कमेटी में चीफ मेडिकल ऑफिसर और चार अन्य सदस्य हैं। सीएमओ डॉ. रजनीश सिंघल की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई प्रस्तावों की सिफारिश कर उन्हें सीजीएचएस के एडी के पास भेजा गया। एडवाइजरी सदस्यों का सुझाव है कि सेंटर में और स्टाफ और डॉक्टर नियुक्त किए जाएं। कई बार याद दिलाने के बावजूद पंचकूला में अतिरिक्त डॉक्टर या स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई। पिछले साल नवंबर में जॉइन करने वाले एक एलडीसी का कुछ दिन बाद ही एडी ऑफिस में तबादला कर दिया गया और उनकी जगह अब तक कोई कर्मचारी नहीं दिया गया। स्टाफ की भारी कमी को देखते हुए एडी से बार-बार अनुरोध किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, सीएमओ ऑफिस का संपर्क नंबर बंद होने से संपर्क नहीं हो सका। स्टाफ की कमी का हवाला देकर ओपीडी पंजीकरण काउंटर निर्धारित समय से पहले बंद कर दिए जाने से वरिष्ठ नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है।
एसआईयू नियमों की अनदेखी से बढ़ा संकट
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इंप्लाइज एंड वर्कर्स, नई दिल्ली के अनुसार देशभर में हर एलोपैथिक वेलनेस सेंटर के लिए एक जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर और एक फार्मासिस्ट ही मंजूर किया गया है, जबकि एसआईयू नियमों के अनुसार 4 एमओ और 3 फार्मासिस्ट होने चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय 2022 तक इन नियमों का पालन करता रहा, लेकिन अब पदों की मंजूरी में अनदेखी के कारण नए केंद्रों में भारी कमी हो गई है।
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एक एमओ और एक फार्मासिस्ट 15,000 से 25,000 सीजीएचएस लाभार्थियों की जरूरतें पूरी नहीं कर पाते। यदि डॉक्टर या फार्मासिस्ट छुट्टी पर जाएं तो पूरा सेंटर बंद रहता है। सामान्य स्थिति में भी एक डॉक्टर 55 से 65 मरीज ही देख सकता है। हर साल 10% की दर से लाभार्थी बढ़ रहे हैं, जबकि एमओ की संख्या घट रही है। खाली पद न भरने और छुट्टियों के कारण स्टाफ में 30% की कमी आई है।
मैं 22 जून को प्रातः लगभग 8 बजे चिकित्सा सहायता हेतु वेलनेस सेंटर पहुंचा, लेकिन पंजीकरण काउंटर पहले ही बंद किया जा चुका था। पंजीकरण का निर्धारित समय दोपहर 1 बजे तक है। स्टाफ की कमी बताकर सुबह 8 बजे ही काउंटर बंद कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत है। लाभार्थियों ने मांग की है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इस परेशानी से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। – अनिल किशोर टंडन, सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी, सीजीएचएस लाभार्थी
चंडीगढ़ में रीइम्बर्समेंट क्लेम में भी देरी
मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम में देरी की शिकायत की है। उनके स्वर्गीय पति अश्वनी कुमार जैन के लिए जमा 19,42,545 रुपये का क्लेम 16 फरवरी 2024 को सीजीएचएस डिस्पेंसरी सेक्टर 45, चंडीगढ़ में जमा किया गया था। सीजीएचएस ऑफिस सेक्टर 9, चंडीगढ़ में कई बार फॉलोअप के बावजूद क्लेम के स्टेटस की कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।- सरोज बाला, सीजीएचएस पेंशनर
हर महीने पहले सप्ताह के शनिवार को एडवाइजरी कमेटी की बैठक होती है। बैठक में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने पर चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में विचार कर प्रस्ताव आगे भेजे जाते हैं। –चंद्रकांत सिन्हा, सदस्य एडवाइजरी कमेटी, सेक्टर 16 पंचकूला
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सेंटर में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति का मुद्दा एडवाइजरी कमेटी की बैठक में कई बार उठ चुका है। एडवाइजर कमेटी में चीफ मेडिकल ऑफिसर और चार अन्य सदस्य हैं। सीएमओ डॉ. रजनीश सिंघल की अध्यक्षता में हुई बैठक में कई प्रस्तावों की सिफारिश कर उन्हें सीजीएचएस के एडी के पास भेजा गया। एडवाइजरी सदस्यों का सुझाव है कि सेंटर में और स्टाफ और डॉक्टर नियुक्त किए जाएं। कई बार याद दिलाने के बावजूद पंचकूला में अतिरिक्त डॉक्टर या स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई। पिछले साल नवंबर में जॉइन करने वाले एक एलडीसी का कुछ दिन बाद ही एडी ऑफिस में तबादला कर दिया गया और उनकी जगह अब तक कोई कर्मचारी नहीं दिया गया। स्टाफ की भारी कमी को देखते हुए एडी से बार-बार अनुरोध किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, सीएमओ ऑफिस का संपर्क नंबर बंद होने से संपर्क नहीं हो सका। स्टाफ की कमी का हवाला देकर ओपीडी पंजीकरण काउंटर निर्धारित समय से पहले बंद कर दिए जाने से वरिष्ठ नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है।
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एसआईयू नियमों की अनदेखी से बढ़ा संकट
कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट इंप्लाइज एंड वर्कर्स, नई दिल्ली के अनुसार देशभर में हर एलोपैथिक वेलनेस सेंटर के लिए एक जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर और एक फार्मासिस्ट ही मंजूर किया गया है, जबकि एसआईयू नियमों के अनुसार 4 एमओ और 3 फार्मासिस्ट होने चाहिए। स्वास्थ्य मंत्रालय 2022 तक इन नियमों का पालन करता रहा, लेकिन अब पदों की मंजूरी में अनदेखी के कारण नए केंद्रों में भारी कमी हो गई है।
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एक एमओ और एक फार्मासिस्ट 15,000 से 25,000 सीजीएचएस लाभार्थियों की जरूरतें पूरी नहीं कर पाते। यदि डॉक्टर या फार्मासिस्ट छुट्टी पर जाएं तो पूरा सेंटर बंद रहता है। सामान्य स्थिति में भी एक डॉक्टर 55 से 65 मरीज ही देख सकता है। हर साल 10% की दर से लाभार्थी बढ़ रहे हैं, जबकि एमओ की संख्या घट रही है। खाली पद न भरने और छुट्टियों के कारण स्टाफ में 30% की कमी आई है।
मैं 22 जून को प्रातः लगभग 8 बजे चिकित्सा सहायता हेतु वेलनेस सेंटर पहुंचा, लेकिन पंजीकरण काउंटर पहले ही बंद किया जा चुका था। पंजीकरण का निर्धारित समय दोपहर 1 बजे तक है। स्टाफ की कमी बताकर सुबह 8 बजे ही काउंटर बंद कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत है। लाभार्थियों ने मांग की है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को इस परेशानी से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। – अनिल किशोर टंडन, सेवानिवृत्त वरिष्ठ लेखा परीक्षा अधिकारी, सीजीएचएस लाभार्थी
चंडीगढ़ में रीइम्बर्समेंट क्लेम में भी देरी
मेडिकल रीइम्बर्समेंट क्लेम में देरी की शिकायत की है। उनके स्वर्गीय पति अश्वनी कुमार जैन के लिए जमा 19,42,545 रुपये का क्लेम 16 फरवरी 2024 को सीजीएचएस डिस्पेंसरी सेक्टर 45, चंडीगढ़ में जमा किया गया था। सीजीएचएस ऑफिस सेक्टर 9, चंडीगढ़ में कई बार फॉलोअप के बावजूद क्लेम के स्टेटस की कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।- सरोज बाला, सीजीएचएस पेंशनर
हर महीने पहले सप्ताह के शनिवार को एडवाइजरी कमेटी की बैठक होती है। बैठक में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने पर चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने और मूलभूत सुविधाओं के संबंध में विचार कर प्रस्ताव आगे भेजे जाते हैं। –चंद्रकांत सिन्हा, सदस्य एडवाइजरी कमेटी, सेक्टर 16 पंचकूला