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हालात : मोरनी की राह में दुश्वारियां हजार, खतरनाक मोड़-सड़कें बदहाल, सैलानी संभलकर जाएं टिक्करताल
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मोरनी स्थित टिक्कर ताल का मनोहारी दृश्य।
- फोटो : PKL OFFICE
पंचकूला। मोरनी के प्राकृतिक सौंदर्य और वाटर स्पोर्ट्स एंड एक्टिविटी का आनंद लेने के लिए पर्यटक अपनी जान जोखिम में डालकर टिक्करताल तक पहुंचते हैं। पर्यटकों को मार्ग में जहां करीब 100 खतरनाक मोड़ों का सामना करना पड़ता है, वहीं टूटी-फूटी सड़कों और एक हजार से ज्यादा गड्ढे भी पार करने पड़ते हैं। प्रदेश के बाहर से आने वाले लोग विभाग की निष्क्रियता से परेशान होकर दोबारा यहां आने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। किसी तरह पंचकूला से 35 किलोमीटर दूर पहाड़ी रास्तों से होकर पर्यटक मोरनी तक पहुंचते हैं, लेकिन टिक्करताल तक का 13 किलोमीटर का सफर रुलाने वाला होता है। मोरनी जाने वाले मार्ग पर दोनों तरफ रेलिंग और पैराफिट नहीं होने से पर्यटकों की सांसें अटकी रहती हैं।
पैराग्लाइडिंग की आस, मिलती है मायूसी
हरियाणा का एक मात्र हिल स्टेशन मोरनी है, जहां देशभर से सैैलानी सैकड़ों की तादात में हर सप्ताह यहां पहुंचते हैं। यहां आने वाले पर्यटक स्पोर्ट्स गतिविधियों को लेकर भी उत्साहित रहते हैं, लेकिन पैराग्लाइडिंग का लुत्फ उठाने के लिए दूर दूर से आने वाले सैलानियों के हाथ मायूसी लग रही है। सितंबर-2021 में सीएम मनोहर लाल ने पैराग्लाइडिंग की शुरुआत की थी, इसके पांच माह बाद पैराग्लाइडिंग और पैरासैलिंग शुरू नहीं हो सकी है। सोमवार को दिल्ली से मंजू, मुस्कान और यूपी से पुष्पा और अरुण समेत उत्तराखंड सहित कई राज्यों से यहां सैलानी घूमने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ा।
घायल होने पर 13 किलोमीटर दूर मिलेगा उपचार
मोरनी से टिक्करताल तक या फिर टिक्करताल में बोटिंग के दौरान किसी पर्यटक की तबीयत खराब होने पर यहां प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता है। यहां पर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कोई व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में पर्यटकों को 13 किलोमीटर दूर मोरनी के स्वास्थ्य केंद्र तक बदहाल सड़कों और खतरनाक मोड़ों से होकर पहुंचना पड़ता है।
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तीन से चार मिनट के 500 रुपये, पर्यटक बोले लूट रहे
टिक्कर ताल में छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए कुछ भी नहीं है। यहां आकर पर्यटक ठगा सा महसूस करते हैं। यहां पर जेट्स राइड के लिए प्रत्येक व्यक्ति का 500 रुपये लिया जाता है, वहीं इसके पीछे सोफा लगाया गया है, जिस पर बैठने वालों को भी 500 रुपये ही चार्ज देेने पड़ता है।
सिर्फ टिक्करताल पर ध्यान, प्राचीन मंदिरों को भूले
मोरनी में जिला प्रशासन की तरफ से महज टिक्करताल पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि यहां प्राचीन काली माता मंदिर, देवी दुर्गा का मंदिर व प्राचीन हनुमान मंदिर है, जो पर्यटकों को लुभा सकते हैं, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। जबकि यह एरिया पर्यटन के साथ-साथ तीर्थ स्थल के रूप में भी विकसित हो सकता है। इन मंदिरों तक जाने के लिए रास्ता भी सही नहीं है।
पंचकूला से टिक्करताल तक रिकारपेटिंग के टेंडर हो चुके हैं। इस मार्ग का विस्तारीकरण किया जाना है। मार्च आखिरी माह तक काम शुरू हो जाएगा। वीरेंद्र कुमार, पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी
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पैराग्लाइडिंग की आस, मिलती है मायूसी
हरियाणा का एक मात्र हिल स्टेशन मोरनी है, जहां देशभर से सैैलानी सैकड़ों की तादात में हर सप्ताह यहां पहुंचते हैं। यहां आने वाले पर्यटक स्पोर्ट्स गतिविधियों को लेकर भी उत्साहित रहते हैं, लेकिन पैराग्लाइडिंग का लुत्फ उठाने के लिए दूर दूर से आने वाले सैलानियों के हाथ मायूसी लग रही है। सितंबर-2021 में सीएम मनोहर लाल ने पैराग्लाइडिंग की शुरुआत की थी, इसके पांच माह बाद पैराग्लाइडिंग और पैरासैलिंग शुरू नहीं हो सकी है। सोमवार को दिल्ली से मंजू, मुस्कान और यूपी से पुष्पा और अरुण समेत उत्तराखंड सहित कई राज्यों से यहां सैलानी घूमने के लिए पहुंचे थे, लेकिन उन्हें निराश लौटना पड़ा।
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घायल होने पर 13 किलोमीटर दूर मिलेगा उपचार
मोरनी से टिक्करताल तक या फिर टिक्करताल में बोटिंग के दौरान किसी पर्यटक की तबीयत खराब होने पर यहां प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाता है। यहां पर स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कोई व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में पर्यटकों को 13 किलोमीटर दूर मोरनी के स्वास्थ्य केंद्र तक बदहाल सड़कों और खतरनाक मोड़ों से होकर पहुंचना पड़ता है।
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तीन से चार मिनट के 500 रुपये, पर्यटक बोले लूट रहे
टिक्कर ताल में छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए कुछ भी नहीं है। यहां आकर पर्यटक ठगा सा महसूस करते हैं। यहां पर जेट्स राइड के लिए प्रत्येक व्यक्ति का 500 रुपये लिया जाता है, वहीं इसके पीछे सोफा लगाया गया है, जिस पर बैठने वालों को भी 500 रुपये ही चार्ज देेने पड़ता है।
सिर्फ टिक्करताल पर ध्यान, प्राचीन मंदिरों को भूले
मोरनी में जिला प्रशासन की तरफ से महज टिक्करताल पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि यहां प्राचीन काली माता मंदिर, देवी दुर्गा का मंदिर व प्राचीन हनुमान मंदिर है, जो पर्यटकों को लुभा सकते हैं, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। जबकि यह एरिया पर्यटन के साथ-साथ तीर्थ स्थल के रूप में भी विकसित हो सकता है। इन मंदिरों तक जाने के लिए रास्ता भी सही नहीं है।
पंचकूला से टिक्करताल तक रिकारपेटिंग के टेंडर हो चुके हैं। इस मार्ग का विस्तारीकरण किया जाना है। मार्च आखिरी माह तक काम शुरू हो जाएगा। वीरेंद्र कुमार, पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग विंग के अधिकारी