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सिद्धू को जाखड़ ने बताया क्रिप्टो करेंसी, बोले- बिकती तो है, लेकिन विश्वसनीय नहीं है
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पंजाब कांग्रेस में पूर्व पार्टी प्रधान सुनील जाखड़ और कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच जुबानी जंग जारी है। रविवार को जाखड़ ने सिद्धू पर तंज कसते हुए उन्हें क्रिप्टो करेंसी बताया। यह बिकती तो ज्यादा है, लेकिन विश्वसनीय नहीं है। वहीं जाखड़ पर कांग्रेस प्रधान सिद्धू भी लगातार हमला कर रहे हैं। जाखड़ को हटाकर ही नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब कांग्रेस की जिम्मेदारी दी गई है। जिसके बाद से जाखड़ लगातार नाराज चल रहे हैं।
पार्टी और कांग्रेस प्रधान इन दिनों उनके निशाने पर हैं। हाल ही में कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी भी उन्हें मनाने के लिए जा चुके हैं, लेकिन जाखड़ नहीं माने हैं। इसके बाद सेे लगातार वह ट्विटर के जरिए कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू और कांग्रेस सरकार को निशाना बनाए हुए हैं। कांग्रेस जाखड़ को इसलिए भी मनाना चाहती है कि वह इस समय पार्टी में बड़ा हिंदू चेहरा हैं।
कैप्टन के इस्तीफे के बाद कांग्रेस अब जाखड़ को नाराज नहीं कर सकती है, इसलिए आलाकमान जाखड़ को मनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। जबकि नाराज जाखड़ सीधे तौर पर सिद्धू पर निशाना साथ रहे हैं। इससे पहले जाखड़ ने सिद्धू पर शायराना हमला करते हुए कहा था कि ‘बुत हम कहे काफिर, अल्लाह की मर्जी है, सूरज में लगे धब्बा, फितरत के करिश्मे हैं, बरकत जो नहीं होती, नीयत की खराबी है।’
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सिद्धू भी जाखड़ पर हमलावर
अमृतसर दौरे के दौरान कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने जाखड़ पर सीधे हमला करते हुए कहा था कि यदि पहले जाखड़ उनकी तरह मुद्दे उठाते तो ये हालात नहीं होते। इससे पहले जाखड़ मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सिद्धू की केदारनाथ यात्रा को राजनीतिक तीर्थयात्रा बता चुके हैं।
इसलिए जाखड़ कांग्रेस के लिए जरूरी
कांग्रेस के लिए 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सुनील जाखड़ भी उतने ही महत्वपूर्ण है जितने कि सिद्धू। इसकी वजह यह है कि सिद्धू को कांग्रेस प्रधान बनाकर आलाकमान ने जट सिख और चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर अनुसूचित जाति के वोट वर्ग पर दाव खेला है। अब जाखड़ को पार्टी में रखकर पार्टी सूबे के हिंदू वोट को साधना चाहती है।
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पार्टी और कांग्रेस प्रधान इन दिनों उनके निशाने पर हैं। हाल ही में कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी भी उन्हें मनाने के लिए जा चुके हैं, लेकिन जाखड़ नहीं माने हैं। इसके बाद सेे लगातार वह ट्विटर के जरिए कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू और कांग्रेस सरकार को निशाना बनाए हुए हैं। कांग्रेस जाखड़ को इसलिए भी मनाना चाहती है कि वह इस समय पार्टी में बड़ा हिंदू चेहरा हैं।
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कैप्टन के इस्तीफे के बाद कांग्रेस अब जाखड़ को नाराज नहीं कर सकती है, इसलिए आलाकमान जाखड़ को मनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। जबकि नाराज जाखड़ सीधे तौर पर सिद्धू पर निशाना साथ रहे हैं। इससे पहले जाखड़ ने सिद्धू पर शायराना हमला करते हुए कहा था कि ‘बुत हम कहे काफिर, अल्लाह की मर्जी है, सूरज में लगे धब्बा, फितरत के करिश्मे हैं, बरकत जो नहीं होती, नीयत की खराबी है।’
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सिद्धू भी जाखड़ पर हमलावर
अमृतसर दौरे के दौरान कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने जाखड़ पर सीधे हमला करते हुए कहा था कि यदि पहले जाखड़ उनकी तरह मुद्दे उठाते तो ये हालात नहीं होते। इससे पहले जाखड़ मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सिद्धू की केदारनाथ यात्रा को राजनीतिक तीर्थयात्रा बता चुके हैं।
इसलिए जाखड़ कांग्रेस के लिए जरूरी
कांग्रेस के लिए 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सुनील जाखड़ भी उतने ही महत्वपूर्ण है जितने कि सिद्धू। इसकी वजह यह है कि सिद्धू को कांग्रेस प्रधान बनाकर आलाकमान ने जट सिख और चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर अनुसूचित जाति के वोट वर्ग पर दाव खेला है। अब जाखड़ को पार्टी में रखकर पार्टी सूबे के हिंदू वोट को साधना चाहती है।