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श्रीलंका को भायी हरियाणा की मुर्राह भैंसें और जैविक खेती
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श्रीलंका के कृषिमंत्री से बात करते हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय।
- फोटो : a
चंडीगढ़। श्रीलंका को विशेष रूप से हरियाणा की जैविक खेती और दुग्ध उत्पादन में मुर्राह भैंसों की नस्ल पसंद आई है। पड़ोसी देश ने इन्हें अपने यहां बढ़ावा देने में हरियाणा से विशेष अपेक्षा जाहिर की है। श्रीलंका के पिछड़ा ग्रामीण क्षेत्र विकास, पशुपालन व सूक्ष्म आर्थिक कृषि फसल मंत्री सथासिवम व्यालेंद्रन सोमवार को राजभवन में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मिलने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि किसानों को खेती के लिए बड़े-बड़े जोत पट्टे व पशुपालन के लिए फार्म आदि से संबंधित बेहतर सुविधाएं देंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में फालतू पड़ी भूमि को उपयोग में लाने के लिए अनेक योजनाएं बनाई हैं। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि कृषि, डेयरी उत्पादन व ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में श्रीलंका का हर संभव सहयोग करेेंगे। इससे भारत और श्रीलंका के संबंधों को और मजबूती मिलेगी। भारत और श्रीलंका की जलवायु, परंपराएं, संस्कृति व भौगोलिक स्थिति परस्पर मिलती जुलती है।
व्यालेंद्रन ने राज्यपाल के साथ शिष्टाचार मुलाकात में श्रीलंका के सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विषयों के साथ-साथ सरकारी की योजनाओं पर बातचीत की। उन्होंने हरियाणा सरकार से पूंजी निवेशकों, प्रगतिशील किसानों और पशुपालकों के माध्यम से श्रीलंका में पूंजीनिवेश और कृषि विकास को बढ़ावा देने में सहयोग की अपेक्षा की। साथ ही भूमि आदि से संबंधित सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
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सथासिवम ने कहा कि हरियाणा की जैविक खाद और हाईब्रीड बीजों की तकनीक सराहनीय है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों, कृषि विशेषज्ञों का उनके देश में स्वागत है। सभी विषयों से संबंधित विशेषज्ञों का श्रीलंका का दौरा करवाने के लिए श्रीलंका सरकार पूरी तरह तैयार है। इस अवसर पर राज्यपाल ने व्यालेंद्रन को भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्मृति चिन्ह के रूप में व शाल भेंट कर सम्मानित किया। श्रीलंका के मंत्री ने राज्यपाल को श्रीलंका के नक्शे वाला स्मृति चिन्ह भेंट किया।
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उन्होंने कहा कि किसानों को खेती के लिए बड़े-बड़े जोत पट्टे व पशुपालन के लिए फार्म आदि से संबंधित बेहतर सुविधाएं देंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में फालतू पड़ी भूमि को उपयोग में लाने के लिए अनेक योजनाएं बनाई हैं। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि कृषि, डेयरी उत्पादन व ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में श्रीलंका का हर संभव सहयोग करेेंगे। इससे भारत और श्रीलंका के संबंधों को और मजबूती मिलेगी। भारत और श्रीलंका की जलवायु, परंपराएं, संस्कृति व भौगोलिक स्थिति परस्पर मिलती जुलती है।
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व्यालेंद्रन ने राज्यपाल के साथ शिष्टाचार मुलाकात में श्रीलंका के सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक विषयों के साथ-साथ सरकारी की योजनाओं पर बातचीत की। उन्होंने हरियाणा सरकार से पूंजी निवेशकों, प्रगतिशील किसानों और पशुपालकों के माध्यम से श्रीलंका में पूंजीनिवेश और कृषि विकास को बढ़ावा देने में सहयोग की अपेक्षा की। साथ ही भूमि आदि से संबंधित सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
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सथासिवम ने कहा कि हरियाणा की जैविक खाद और हाईब्रीड बीजों की तकनीक सराहनीय है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों, कृषि विशेषज्ञों का उनके देश में स्वागत है। सभी विषयों से संबंधित विशेषज्ञों का श्रीलंका का दौरा करवाने के लिए श्रीलंका सरकार पूरी तरह तैयार है। इस अवसर पर राज्यपाल ने व्यालेंद्रन को भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति स्मृति चिन्ह के रूप में व शाल भेंट कर सम्मानित किया। श्रीलंका के मंत्री ने राज्यपाल को श्रीलंका के नक्शे वाला स्मृति चिन्ह भेंट किया।