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Panchkula News: विभाजन की पीड़ा को याद कर साझा किए अनुभव, भाईचारा मजबूत करने पर जोर

Fri, 14 Aug 2026 01:48 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 01:48 AM IST
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Shared experiences recalling the pain of Partition; emphasis on strengthening brotherhood.
डॉ. चंद्र त्रिखा ने पाकपटन से भारत आने की सुनाई कहानी, दिखाई गई फीचर फिल्म ‘यादें 1947’
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। विभाजन की त्रासदी और उससे जुड़ी स्मृतियों को याद करते हुए हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के उर्दू प्रकोष्ठ की ओर से बुधवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। सेक्टर-14 स्थित अकादमी भवन के महाराजा दाहिर सेन सभागार में हुए कार्यक्रम में ‘विचार गोष्ठी एवं फीचर फिल्म-यादें 1947’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाजन की पीड़ा, उसके कारणों और उससे मिले सबक पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने की। उर्दू प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने विभाजन से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय उनकी उम्र महज तीन वर्ष थी। विभाजन की त्रासदी के दौरान वह अपने परिवार के साथ पाकपटन से भारत आए थे।
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विभाजन की स्मृतियों ने लेखन को दी गहराई
डॉ. चंद्र त्रिखा ने विभाजन के दौरान झेली गई पीड़ा और उससे जुड़ी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के अनुभवों का उनके साहित्यिक लेखन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने विभाजन पर लिखी अपनी साहित्यिक रचनाओं का भी उल्लेख किया और बताया कि उस दौर की घटनाओं और मानवीय पीड़ा ने उनके लेखन को नई दिशा और गहराई दी।
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इतिहास से सबक लेना जरूरी : अग्निहोत्री
प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है। इसके मूल कारणों का गंभीरता से अध्ययन करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतिहास की ऐसी घटनाओं से सबक लेकर भविष्य में इस तरह की विभाजनकारी और मानवीय त्रासदी दोबारा न हो, इसके लिए समाज को सजग रहना होगा। उन्होंने आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान विभाजन की घटनाओं और उससे जुड़ी स्मृतियों पर आधारित फीचर फिल्म यादें 1947 भी प्रदर्शित की गई।
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