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Panchkula News: सरकारी फंड घोटाले में रणधीर सिंह और मनीष जिंदल को झटका, जमानत याचिकाएं खारिज
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सीबीआई कोर्ट ने कहा- साजिश में भूमिका के प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य, जांच पर पड़ सकता है असर
विशेष सीबीआई अदालत ने दोनों आरोपियों को राहत देने से किया इन्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के सरकारी फंड गबन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को आरोपी रणधीर सिंह और मनीष जिंदल की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ साजिश में शामिल होने के प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। मामले की जांच अभी जारी है, ऐसे में इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत के आदेश के अनुसार, मामला पहले एसीबी पंचकूला में दर्ज हुआ था। जांच में सामने आया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और अन्य खातों के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी विभागों की जमा राशि निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई। बाद में राज्य सरकार के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई के अनुसार, तत्कालीन एचएसएसपीपी के कंट्रोलर फाइनेंस एंड अकाउंट्स रणधीर सिंह ने वित्त विभाग की मंजूरी के बिना बैंक खाता खुलवाने में भूमिका निभाई। खाते से जुड़े लेनदेन के एसएमएस उसके मोबाइल नंबर पर आते रहे, लेकिन उसने किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की सूचना संबंधित अधिकारियों को नहीं दी। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि उसके पास से मूल नोटशीट बरामद हुई और उसे सह-आरोपी से गोवा यात्रा सहित अन्य आतिथ्य लाभ मिले।
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बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारी के बीच कड़ी बनने का आरोप
सीबीआई ने मनीष जिंदल पर आरोप लगाया है कि उसने बैंक अधिकारियों और एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के बीच कड़ी का काम किया। एजेंसी के अनुसार, उसने खाते खुलवाने और सरकारी धन स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। सीबीआई ने इसके समर्थन में कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे।
आर्थिक अपराध गंभीर, जांच पर पड़ सकता है असर
विशेष सीबीआई अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामला करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के कथित गबन से जुड़ा आर्थिक अपराध है, जिसकी प्रकृति अत्यंत गंभीर है। जांच में दोनों आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री सामने आई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सह-आरोपी को मिली जमानत के आधार पर रणधीर सिंह और मनीष जिंदल को समानता का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि दोनों की भूमिका अलग और स्वतंत्र बताई गई है। अदालत ने माना कि मामले में अभी जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान होने बाकी हैं। ऐसे में जमानत दिए जाने पर जांच प्रभावित होने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं आधारों पर दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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विशेष सीबीआई अदालत ने दोनों आरोपियों को राहत देने से किया इन्कार
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। हरियाणा के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के सरकारी फंड गबन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को आरोपी रणधीर सिंह और मनीष जिंदल की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ साजिश में शामिल होने के प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। मामले की जांच अभी जारी है, ऐसे में इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत के आदेश के अनुसार, मामला पहले एसीबी पंचकूला में दर्ज हुआ था। जांच में सामने आया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और अन्य खातों के माध्यम से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी विभागों की जमा राशि निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर की गई। बाद में राज्य सरकार के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
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सीबीआई के अनुसार, तत्कालीन एचएसएसपीपी के कंट्रोलर फाइनेंस एंड अकाउंट्स रणधीर सिंह ने वित्त विभाग की मंजूरी के बिना बैंक खाता खुलवाने में भूमिका निभाई। खाते से जुड़े लेनदेन के एसएमएस उसके मोबाइल नंबर पर आते रहे, लेकिन उसने किसी भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन की सूचना संबंधित अधिकारियों को नहीं दी। जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि उसके पास से मूल नोटशीट बरामद हुई और उसे सह-आरोपी से गोवा यात्रा सहित अन्य आतिथ्य लाभ मिले।
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बैंक अधिकारियों और सरकारी अधिकारी के बीच कड़ी बनने का आरोप
सीबीआई ने मनीष जिंदल पर आरोप लगाया है कि उसने बैंक अधिकारियों और एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के बीच कड़ी का काम किया। एजेंसी के अनुसार, उसने खाते खुलवाने और सरकारी धन स्थानांतरित कराने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। सीबीआई ने इसके समर्थन में कॉल डिटेल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे।
आर्थिक अपराध गंभीर, जांच पर पड़ सकता है असर
विशेष सीबीआई अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामला करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के कथित गबन से जुड़ा आर्थिक अपराध है, जिसकी प्रकृति अत्यंत गंभीर है। जांच में दोनों आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री सामने आई है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सह-आरोपी को मिली जमानत के आधार पर रणधीर सिंह और मनीष जिंदल को समानता का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि दोनों की भूमिका अलग और स्वतंत्र बताई गई है। अदालत ने माना कि मामले में अभी जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान होने बाकी हैं। ऐसे में जमानत दिए जाने पर जांच प्रभावित होने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इन्हीं आधारों पर दोनों आरोपियों की नियमित जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।