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हरियाणा : उद्योगों पर पाबंदियां कम कराने दिल्ली पहुंचे चावल व्यापारी, नहीं हुई सुनवाई, आज करनाल में बैठक कर लेंगे फैसला
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चंडीगढ़। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में उद्योगों पर लगाई गई कड़ी पाबंदियों को कम कराने को लेकर सभी जगह गुहार लगाने के बाद अब राइस मिलर्स और एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से आपात बैठक बुलाई है। मंगलवार को करनाल में होने वाली बैठक में ही आगामी रणनीति तय की जाएगी। मिलर्स ने चेताया है कि फैसले पर दोबारा विचार नहीं किया तो वे हड़ताल पर भी जा सकते हैं।
आयोग ने 3 दिसंबर से एनसीआर में पीएनजी पर चलने वाले उद्योगों को छोड़कर सभी के लिए सप्ताह में पांच दिन और एक दिन में 8 घंटे उद्योग चलाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का राइस मिलर्स और एक्सपोर्टर्स विरोध कर रहे हैं। इसको लेकर चावल कारोबारी करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी मिले थे। सीएम ने आश्वासन दिया था कि वह केंद्र से बात करेंगे। सोमवार को ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान नाथी राम गुप्ता, पूर्व प्रधान विजय सेतिया और राज्य प्रधान सुशील जैन समेत अन्य व्यापारी दिल्ली में उद्योग मंत्रालय में पहुंचे। मंत्रालय के अधिकारियों ने भी इसको लेकर हाथ खड़े कर दिए। बाद में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के चेयरमैन एमएम पुट्टी से भी मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। तमाम जगह गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं होने से नाराज मिलर्स और एक्सोपोर्टर्स ने अब करनाल में संयुक्त बैठक बुलाई है। मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद गोयल ने बताया कि बैठक में व्यापारियों को आ रही समस्याओं पर मंथन होगा और आगामी रणनीति का खुलासा किया जाएगा।
कारोबारियों के ये हैं तर्क
एक्सपोर्टर नाथी राम गुप्ता और सुशील जैन का तर्क है कि चावल कारोबार आवश्यक सेवाओं में आता है। पूरे लॉकलाउन में भी सरकार ने मिल को चलाने की अनुमति दी थी। इसके अलावा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इसकी मंजूरी दी थी। इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। मिलों में लाखों मीट्रिक टन धान पड़ा है, अगर इसकी कुटाई नहीं की तो यह खराब हो जाएगा। साथ ही व्यापारी न तो विदेशों में समय पर चावल दे सकेंगे और न ही वापस एफसीआई को। इसलिए इस फैसले से चावल उद्योग को राहत दी जाए।
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पाबंदियों को लेकर मंगलवार को करनाल में मिलर्स और एक्सपोर्टर्स की संयुक्त बैठक होगी। इसी में आगे की रणनीति तय की जाएगी। हमने तमाम प्लेटफार्मों पर अपनी बात रखी है, लेकिन कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। इसलिए सभी व्यापारी मिलकर तय करेंगे कि आगे उद्योग चलाने हैं या बंद करने हैं। - विजय सेतिया, आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, पूर्व प्रधान।
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आयोग ने 3 दिसंबर से एनसीआर में पीएनजी पर चलने वाले उद्योगों को छोड़कर सभी के लिए सप्ताह में पांच दिन और एक दिन में 8 घंटे उद्योग चलाने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले का राइस मिलर्स और एक्सपोर्टर्स विरोध कर रहे हैं। इसको लेकर चावल कारोबारी करनाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल से भी मिले थे। सीएम ने आश्वासन दिया था कि वह केंद्र से बात करेंगे। सोमवार को ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान नाथी राम गुप्ता, पूर्व प्रधान विजय सेतिया और राज्य प्रधान सुशील जैन समेत अन्य व्यापारी दिल्ली में उद्योग मंत्रालय में पहुंचे। मंत्रालय के अधिकारियों ने भी इसको लेकर हाथ खड़े कर दिए। बाद में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के चेयरमैन एमएम पुट्टी से भी मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। तमाम जगह गुहार लगाने के बाद भी सुनवाई नहीं होने से नाराज मिलर्स और एक्सोपोर्टर्स ने अब करनाल में संयुक्त बैठक बुलाई है। मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद गोयल ने बताया कि बैठक में व्यापारियों को आ रही समस्याओं पर मंथन होगा और आगामी रणनीति का खुलासा किया जाएगा।
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कारोबारियों के ये हैं तर्क
एक्सपोर्टर नाथी राम गुप्ता और सुशील जैन का तर्क है कि चावल कारोबार आवश्यक सेवाओं में आता है। पूरे लॉकलाउन में भी सरकार ने मिल को चलाने की अनुमति दी थी। इसके अलावा, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी इसकी मंजूरी दी थी। इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। मिलों में लाखों मीट्रिक टन धान पड़ा है, अगर इसकी कुटाई नहीं की तो यह खराब हो जाएगा। साथ ही व्यापारी न तो विदेशों में समय पर चावल दे सकेंगे और न ही वापस एफसीआई को। इसलिए इस फैसले से चावल उद्योग को राहत दी जाए।
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पाबंदियों को लेकर मंगलवार को करनाल में मिलर्स और एक्सपोर्टर्स की संयुक्त बैठक होगी। इसी में आगे की रणनीति तय की जाएगी। हमने तमाम प्लेटफार्मों पर अपनी बात रखी है, लेकिन कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही है। इसलिए सभी व्यापारी मिलकर तय करेंगे कि आगे उद्योग चलाने हैं या बंद करने हैं। - विजय सेतिया, आल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन, पूर्व प्रधान।