{"_id":"68ec1825514d62aa62088817","slug":"relief-for-former-civil-hospital-doctor-dr-rajesh-gera-case-of-negligence-in-treatment-dismissed-panchkula-news-c-87-1-pan1009-128148-2025-10-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Panchkula News: सिविल अस्पताल के पूर्व डॉक्टर डॉ. राजेश गेरा को राहत, इलाज में लापरवाही का केस खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Panchkula News: सिविल अस्पताल के पूर्व डॉक्टर डॉ. राजेश गेरा को राहत, इलाज में लापरवाही का केस खारिज
विज्ञापन
पंचकूला। चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अजय कुमार की अदालत ने सेक्टर-6 सिविल अस्पताल के पूर्व डॉ. राजेश गेरा के खिलाफ दायर आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया है। डॉ. गेरा पर इलाज में लापरवाही (धारा 304ए आईपीसी) के कारण एक बच्ची की मौत का आरोप लगाया गया था।
यह शिकायत इंदिरा कॉलोनी सेक्टर-17 के रहने वाले महीपाल ने सितंबर 2018 में दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक उनकी बेटी निशा को 30 अगस्त 2017 को बीमारी के चलते सेक्टर-6 सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसका इलाज डॉ. गेरा कर रहे थे। महीपाल ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर ने समय पर सही जांच नहीं कराई। 2 और 3 सितंबर की रात को बच्ची की हालत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में दिक्कत हुई और ब्लीडिंग शुरू हो गई। पिता का कहना था कि उन्होंने नर्स से डॉक्टर को बुलाने को कहा लेकिन डॉक्टर नहीं आए। बाद में बच्ची को सेक्टर-32 चंडीगढ़ अस्पताल रेफर किया गया, जहां पहुंचते ही उसकी मौत हो गई।
अदालत ने मामले की फाइल और गवाहों के बयान देखने के बाद कहा कि बच्ची का इलाज बुखार और प्लेटलेट कम होने (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) के लिए किया गया था और उसके प्लेटलेट की जांच तीन बार की गई थी। कोर्ट ने पाया कि बच्ची की मौत कार्डियो रेस्पिरेटरी अरेस्ट से हुई थी।
विज्ञापन
कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले (गुरजीत सिंह बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा 2023) का हवाला देते हुए कहा कि मेडिकल लापरवाही के आरोप केवल अंदाज़े या आरोपों पर नहीं बल्कि ठोस सबूत और स्वतंत्र मेडिकल राय पर आधारित होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि डॉ. गेरा ने इलाज में कोई गलती या लापरवाही की। इसलिए अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया।
विज्ञापन
यह शिकायत इंदिरा कॉलोनी सेक्टर-17 के रहने वाले महीपाल ने सितंबर 2018 में दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक उनकी बेटी निशा को 30 अगस्त 2017 को बीमारी के चलते सेक्टर-6 सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसका इलाज डॉ. गेरा कर रहे थे। महीपाल ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर ने समय पर सही जांच नहीं कराई। 2 और 3 सितंबर की रात को बच्ची की हालत बिगड़ गई। उसे सांस लेने में दिक्कत हुई और ब्लीडिंग शुरू हो गई। पिता का कहना था कि उन्होंने नर्स से डॉक्टर को बुलाने को कहा लेकिन डॉक्टर नहीं आए। बाद में बच्ची को सेक्टर-32 चंडीगढ़ अस्पताल रेफर किया गया, जहां पहुंचते ही उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन
अदालत ने मामले की फाइल और गवाहों के बयान देखने के बाद कहा कि बच्ची का इलाज बुखार और प्लेटलेट कम होने (थ्रोम्बोसाइटोपेनिया) के लिए किया गया था और उसके प्लेटलेट की जांच तीन बार की गई थी। कोर्ट ने पाया कि बच्ची की मौत कार्डियो रेस्पिरेटरी अरेस्ट से हुई थी।
विज्ञापन
कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले (गुरजीत सिंह बनाम स्टेट ऑफ हरियाणा 2023) का हवाला देते हुए कहा कि मेडिकल लापरवाही के आरोप केवल अंदाज़े या आरोपों पर नहीं बल्कि ठोस सबूत और स्वतंत्र मेडिकल राय पर आधारित होने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि डॉ. गेरा ने इलाज में कोई गलती या लापरवाही की। इसलिए अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत को खारिज कर दिया।