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लाल किला हिंसा : दिल्ली पुलिस को 1700 पंजाबी नौजवानों की तलाश
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किसान आंदोलन के दौरान लाल किला हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस करीब 1700 पंजाबी नौजवानों की तलाश कर रही है। इस सिलसिले में शुक्रवार को दिल्ली पुलिस ने सीसीटीवी फूटेज के आधार पर करीब 1200 नौजवानों के फोटो भी जारी किए। लेकिन शुक्रवार को राज्य के 8 जिलों में दबिश देने पहुंची दिल्ली पुलिस की 22 टीमों को उस समय खाली हाथ लौटना पड़ा, जब अधिकांश गांवों के मुख्य रास्तों पर दिल्ली पुलिस का प्रवेश वर्जित के बोर्ड लगा दिए गए। वहीं, पंजाब पुलिस भी इस मामले में दिल्ली पुलिस की कोई मदद नहीं कर रही। हालांकि राज्य पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि दिल्ली पुलिस की ओर से इस बाबत उनसे संपर्क नहीं किया गया।
शनिवार को किसान संगठनों ने ग्रामीणों के हवाले से चेतावनी दी है कि दिल्ली पुलिस की टीमें अगर जबरन गांव में घुसीं तो उन्हें बंधक बनाया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में राज्य के जिला अदालतों और हाईकोर्ट से जुड़े वकील भी आगे आ गए हैं। उन्होंने लाल किला हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की 27 जनवरी को दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए लोगों से कहा है कि पुलिस के किसी भी नोटिस का जवाब न दिया जाए। क्योंकि लाल किला हिंसा एफआईआर में किसी भी व्यक्ति को नामजद नहीं किया गया है और पुलिस केवल फोटो के आधार पर किसानों और नौजवानों को निशाना बना रही है। एडवोकेट इंद्रजीत का कहना है कि केवल फोटो के आधार पर किसी को सजा नहीं हो सकती। दिल्ली पुलिस के लिए लाल किला हिंसा मामले में किसी को दोषी साबित कर पाना संभव नहीं है। अब तक इस मामले में जिन नौजवानों की जमानत हुई है, उनके लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्य कर रही है।
न नोटिस का जवाब दूंगा न गिरफ्तारी: रुलदू सिंह
इस बीच, किसान नेता रुलदू सिंह, जिन्हें दिल्ली पुलिस की तरफ से लाल किला हिंसा मामले में नोटिस जारी किया गया है, ने शनिवार को चंडीगढ़ में किसान महापंचायत के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए साफ कर दिया कि वे न तो नोटिस का जवाब देंगे और न ही गिरफ्तारी देंगे। उन्होंने हैरानी जताई कि किसान मार्च के दौरान वे कुछ अन्य किसान नेताओं और मीडियाकर्मियों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा बताए मार्ग पर चल रहे थे, तो उन्हें लाल किले पर किसने देख लिया?
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सब्र का इम्तिहान न ले दिल्ली पुलिस
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस किसान आंदोलन को दबाने की साजिश के तहत झूठे केस बना रही है और अगर किसी में हिम्मत है तो वह साबित करे कि रुलदू सिंह 26 जनवरी को लाल किले पर गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली पुलिस के सहारे किसानों को परेशान करके उनके सब्र का इम्तिहान न ले। उधर, राज्य पुलिस की ओर से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस की राज्य में दबिश के बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है और न ही दिल्ली पुलिस ने ऐसी किसी कार्र्रवाई के लिए राज्य पुलिस से संपर्क किया है।
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शनिवार को किसान संगठनों ने ग्रामीणों के हवाले से चेतावनी दी है कि दिल्ली पुलिस की टीमें अगर जबरन गांव में घुसीं तो उन्हें बंधक बनाया जा सकता है। इस पूरे घटनाक्रम में राज्य के जिला अदालतों और हाईकोर्ट से जुड़े वकील भी आगे आ गए हैं। उन्होंने लाल किला हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की 27 जनवरी को दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए लोगों से कहा है कि पुलिस के किसी भी नोटिस का जवाब न दिया जाए। क्योंकि लाल किला हिंसा एफआईआर में किसी भी व्यक्ति को नामजद नहीं किया गया है और पुलिस केवल फोटो के आधार पर किसानों और नौजवानों को निशाना बना रही है। एडवोकेट इंद्रजीत का कहना है कि केवल फोटो के आधार पर किसी को सजा नहीं हो सकती। दिल्ली पुलिस के लिए लाल किला हिंसा मामले में किसी को दोषी साबित कर पाना संभव नहीं है। अब तक इस मामले में जिन नौजवानों की जमानत हुई है, उनके लिए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी कार्य कर रही है।
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न नोटिस का जवाब दूंगा न गिरफ्तारी: रुलदू सिंह
इस बीच, किसान नेता रुलदू सिंह, जिन्हें दिल्ली पुलिस की तरफ से लाल किला हिंसा मामले में नोटिस जारी किया गया है, ने शनिवार को चंडीगढ़ में किसान महापंचायत के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए साफ कर दिया कि वे न तो नोटिस का जवाब देंगे और न ही गिरफ्तारी देंगे। उन्होंने हैरानी जताई कि किसान मार्च के दौरान वे कुछ अन्य किसान नेताओं और मीडियाकर्मियों के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा बताए मार्ग पर चल रहे थे, तो उन्हें लाल किले पर किसने देख लिया?
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सब्र का इम्तिहान न ले दिल्ली पुलिस
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस किसान आंदोलन को दबाने की साजिश के तहत झूठे केस बना रही है और अगर किसी में हिम्मत है तो वह साबित करे कि रुलदू सिंह 26 जनवरी को लाल किले पर गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली पुलिस के सहारे किसानों को परेशान करके उनके सब्र का इम्तिहान न ले। उधर, राज्य पुलिस की ओर से कहा गया है कि दिल्ली पुलिस की राज्य में दबिश के बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है और न ही दिल्ली पुलिस ने ऐसी किसी कार्र्रवाई के लिए राज्य पुलिस से संपर्क किया है।