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ट्राइसिटीवासियों को नहीं मिली राहत, टूटे स्लीपर से ही गुजरेंगी ट्रेनें
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 16 Apr 2016 08:53 PM IST
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टूटे स्लीपर से गुजरती ट्रेन।
- फोटो : अमर उजाला
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ट्राईसिटी के लोगों को चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर अभी टूटे स्लीपरों के बीच ही सफर करना पड़ेगा। जब तक चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर नए प्लेटफार्म का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक चंडीगढ़ प्लेटफार्म नंबर वन के रेलवे लाइन के टूटे स्लीपर नहीं बदले जाएंगे।
रेलवे लाइन का स्लीपर बदलने के लिए 95 दिनों के तक रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का आवागमन बंद करना पड़ेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पंचकूला की ओर बन रहे प्लेटफार्म नंबर छह के निर्माण के बाद के बाद इधर का ट्रैफिक नए प्लेटफार्म पर डायवर्ट किया जाएगा। इसके बाद स्लीपर बदलने का काम शुरू होगा।
प्लेटफार्म नंबर वन पर सेफ्टी पिन गायब
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहले ही 189 स्लीपर टूटे हैं और 36 स्लीपर धंस चुके हैं। इसके अलावा पटरी की सेफ्टी के लिए लगाए गए सेफ्टी पिन भी कई जगह पटरी से गायब हैं। ऐसे में ट्रेन कभी भी पटरी से पलट सकती है।
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इस ट्रैक से गुजरती हैं 20 ट्रेनें
इस जर्जर ट्रैक से कालका और चंडीगढ़ शताब्दी समेत 24 घंटे में 20 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। इसमें पैसेंजर और मालगाड़ी भी शामिल हैं। ऐसे में मालगाड़ी की पटरी से उतरने की संभावना ज्यादा रहती है। इंजीनियरिंग विंग के जानकारों के मुताबिक एक साथ सात से अधिक स्लीपर टूट जाते हैं, तो ट्रेन पटरी से उतर सकती है। यहां तो डेढ़ सौ से ज्यादा स्लीपर टूटे हैं।
पंचकूला साइड बन रहे नए प्लेटफार्म के निर्माण के बाद प्लेटफार्म नंबर वन के स्लीपर बदले जाएंगे। क्योंकि 90 दिनों तक प्लेटफार्म नंबर वन बंद रखना पड़ेगा। यहां के ट्रैफिक को नए प्लेटफार्म पर डायवर्ट किया जाएगा।
- दिनेश कुमार, डीआरएम अंबाला रेल मंडल
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रेलवे लाइन का स्लीपर बदलने के लिए 95 दिनों के तक रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का आवागमन बंद करना पड़ेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार पंचकूला की ओर बन रहे प्लेटफार्म नंबर छह के निर्माण के बाद के बाद इधर का ट्रैफिक नए प्लेटफार्म पर डायवर्ट किया जाएगा। इसके बाद स्लीपर बदलने का काम शुरू होगा।
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प्लेटफार्म नंबर वन पर सेफ्टी पिन गायब
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पहले ही 189 स्लीपर टूटे हैं और 36 स्लीपर धंस चुके हैं। इसके अलावा पटरी की सेफ्टी के लिए लगाए गए सेफ्टी पिन भी कई जगह पटरी से गायब हैं। ऐसे में ट्रेन कभी भी पटरी से पलट सकती है।
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इस ट्रैक से गुजरती हैं 20 ट्रेनें
इस जर्जर ट्रैक से कालका और चंडीगढ़ शताब्दी समेत 24 घंटे में 20 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं। इसमें पैसेंजर और मालगाड़ी भी शामिल हैं। ऐसे में मालगाड़ी की पटरी से उतरने की संभावना ज्यादा रहती है। इंजीनियरिंग विंग के जानकारों के मुताबिक एक साथ सात से अधिक स्लीपर टूट जाते हैं, तो ट्रेन पटरी से उतर सकती है। यहां तो डेढ़ सौ से ज्यादा स्लीपर टूटे हैं।
पंचकूला साइड बन रहे नए प्लेटफार्म के निर्माण के बाद प्लेटफार्म नंबर वन के स्लीपर बदले जाएंगे। क्योंकि 90 दिनों तक प्लेटफार्म नंबर वन बंद रखना पड़ेगा। यहां के ट्रैफिक को नए प्लेटफार्म पर डायवर्ट किया जाएगा।
- दिनेश कुमार, डीआरएम अंबाला रेल मंडल