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रेलवे यूनियनों ने निजीकरण और निगमीकरण का किया विरोध

Tue, 07 Jan 2020 07:42 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2020 07:42 PM IST
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railway gate meeting, agitation
एनआरएमयू कालका-शिमला ब्रांच ने रेलवे में होने जा रहे निजीकरण और निगमीकरण के विरोध में कालका रेलवे स्टेशन पर जोरदार प्रदर्शन किया। एनआरएमयू कालका-शिमला शाखा सचिव सुुुुभाष ने बताया कि आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के आह्वान पर नार्दन रेलवे मेंस यूनियन 2 से 7 जनवरी तक सघन विरोध सप्ताह मना रहा है। इसमें शाखा स्तर पर धरना, प्रदर्शन और रैलियां की गईं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन मुख्यतया 2019 को परिवर्तन संगोष्ठी के निर्णयों को निरस्त कर रेलों को उनके वर्तमान स्वरूप में बनाए रखा जाए। उत्पादन इकाइयों का निगमीकरण, रेलों की आउटसोर्सिंग व प्रिंटिंग प्रेसों को बंद करने कार निर्णय वापस लिया जाए। रेलवे कॉलोनियों, रनिंग रूमों, विश्रामालयों और गैंग हटों की दयनीय दशा में सुधार किया जाए। न्यू पेंशन स्कीम समाप्त कर गारंटेड पेंशन योजना लागू की जाए। सीधी भर्ती के 10 प्रतिशत कोटे के अंतर्गत पात्र कर्मचारियों को अंतरविभागीय समायोजन का लाभ जल्द दिया जाए। ग्रेड पे रुपये 1800 के 50 प्रतिशत पदों को अविलंब ग्रेड पे रुपये 1000 में उन्नयन किया जाए। इस अवसर पर भारी संख्या में एनआरएमयू के सदस्य मौजूद रहे।
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कालका। रेलवे के निजीकरण और निगमीकरण के खिलाफ ऑल इंडिया रेलवे मैंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के पदाधिकारियों ने कालका वर्कशॉप के मेन गेट पर मीटिंग कर सरकार का विरोध किया। एआईआरएफ के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि सरकार भारतीय रेलवे के ढांचे को तोड़ने में जुटी है। इससे रेलवे का कोई भला तो होगा नहीं, लेकिन वह गहरे संकट में जरूर फंस जाएगा। इस संकट का जल्द हल निकलना भी मुश्किल होगा।
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उन्होंने कहा कि विश्व के जिन देशों ने रेलवे का निजीकरण किया, उन्हें दोबारा राष्ट्रीयकरण के लिए विवश होना पड़ा। ब्रिटेन ने वर्ष 1989 में रेलवे का निजीकरण किया, लेकिन अब वहां व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए सरकार को पांच-छह गुना ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। अर्जेंटीना को भी दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी के बाद वर्ष 2015 में रेलवे का फिर से राष्ट्रीयकरण करना पड़ा। न्यूजीलैंड ने वर्ष 1980 में रेलवे का निजीकरण किया, लेकिन भारी घाटे के बाद वर्ष 2008 में दोबारा राष्ट्रीयकरण को मजबूर होना पड़ा। यही स्थिति आस्ट्रेलिया में भी देखी गई, जहां ‘गिव अवर ट्रैक बैक’ आंदोलन के बाद सरकार ने रेलवे को फिर से अपने हाथों में लिया है। इस मौके पर अध्यक्ष प्रदीप कुमार, सचिव संजीव कुमार, सह सचिव गगन दीप, कमल कुमार, कैशियर प्रकाश चौधरी, उपप्रधान किरन रेखा, जतिंद्र नेगी, जगपाल अजित, दीपक सैनी, इंद्रपाल सहित अन्य मौजूद रहे।
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