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और कमजोर हुआ चंडीगढ़ पर पंजाब का दावा

Tue, 29 Mar 2022 01:48 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 01:48 AM IST
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Punjab's claim on Chandigarh weakened further
चंडीगढ़। राजधानी चंडीगढ़ के सरकारी मुलाजिमों को केंद्र के सर्विस रूल से जोड़े जाने के फैसले से पंजाब को जोर का झटका लगा है। हमेशा इस केंद्र शासित प्रदेश पर अपना दावा जताते रहे पंजाब के सभी सियासी दलों ने केंद्र के नए फैसले को देश के फेडरल ढांचे पर हमला और पंजाब के अधिकारों का हनन करार दिया है।
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केंद्र सरकार द्वारा चंडीगढ़ के मुलाजिमों को अपने सर्विस रूल के अधीन लाने से एक तरफ तो पंजाब का चंडीगढ़ पर दावा कमजोर हुआ है, वहीं कई मायनों में चंडीगढ़ से पंजाब का रिश्ता भी टूटने जा रहा है। इसमें सबसे बड़ा नुकसान भाषाई अधिकार को लेकर होगा क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते चंडीगढ़ की प्रथम भाषा हिंदी थी, लेकिन पंजाब के दबाव के चलते केंद्र की कांग्रेस सरकार ने पंजाबी भाषा को भी अनिवार्य कर दिया था। अब केंद्रीय सर्विस रूल के तहत जो भी भरती होगी, उसमें प्रथम भाषा हिंदी ही जरूरी होगी। इसके कारण पंजाब के युवाओं को चंडीगढ़ में नौकरी के अवसर नहीं मिल सकेंगे और हरियाणा समेत अन्य हिंदी राज्यों के लोगों को यहां सरकारी नौकरी हासिल करने में ज्यादा कठिनाई नहीं होगी। इस तरह पंजाब का चंडीगढ़ पर दावा लगातार कमजोर होता जाएगा।
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हालांकि पंजाब में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और विपक्षी कांग्रेस व अकाली दल केंद्र के फैसले को ‘बदलाखोरी’ की संज्ञा दे रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह भी है कि अकाली-भाजपा गठबंधन और कैप्टन अमरिंदर सिंह के शासन के दौरान चंडीगढ़ पर पंजाब की दावेदारी कमजोर हुई है। दोनों सरकारें सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के मुद्दे पर हरियाणा और केंद्र से उलझती रहीं, लेकिन चंडीगढ़ में 60:40 के अनुपात में अपनी हिस्सेदारी के प्रति उदासीन हो गईं। हालात यहां तक पहुंचे कि चंडीगढ़ में पंजाब के अफसरों की नियुक्ति में भी कोताही बरती जाने लगी। कई मामलों में तो सूबे के अधिकारियों ने ही चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर जाने से मना कर दिया।
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बीबीएमबी में पंजाब का प्रतिनिधित्व खत्म होते देख प्रदेश सरकार हरकत में तो आई, लेकिन उसी दौरान पंजाब से डेपुटेशन पर भेजे गए 112 डॉक्टरों को यूटी चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा वापस भेज दिए जाने से साफ हो गया कि यूटी के अफसर पंजाब की दावेदारी से किनारा करने लगे हैं। पंजाब सरकार भी चंडीगढ़ में अपने हिस्से के विभिन्न पदों के लिए, बार-बार अफसरों के पैनल मांगे जाने के बावजूद अफसर भेजने में असमर्थता जताती रही है, जिसके परिणामस्वरूप पंजाब के हिस्से के पदों पर हरियाणा, हिमाचल और यूटी कॉडर के अधिकारियों को तैनात किए जाने का नया पैटर्न शुरू हो चुका है।

पंजाब सरकार के ही पूर्व अधिकारियों का मानना है कि अब तक चंडीगढ़ में पंजाब का हिस्सा 60 से घटकर 40 फीसदी ही रह गया है। चंडीगढ़ में एसएसपी का पद पंजाब के हिस्से का है, लेकिन लंबे समय से राज्य सरकार इसके लिए पैनल ही तैयार नहीं कर पा रही। इसी तरह डीएसपी के पदों पर भी दानिक्स कॉडर के अफसरों को तैनात किया जा रहा है। पंजाब पुलिस हर बार स्टाफ कम होने की दुहाई देती रही है। चंडीगढ़ में ही पीआरओ का पद भरने के लिए यूटी प्रशासन ने 25 अप्रैल, 2014 को पंजाब से तीन अधिकारियों का पैनल मांगा, जिस पर पंजाब ने असमर्थता जता दी। नतीजतन यह पद हरियाणा के अधिकारी से भरा गया। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) में वर्कर्स मैनेजर का पद भरने के लिए भी पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग से पैनल मांगा गया, लेकिन हद तो तब हो गई जब ट्रांसपोर्ट विभाग ने यूटी प्रशासन को लिखित तौर पर कहा कि हमारे पास स्टाफ नहीं है और आप चाहें तो इस पद को अपने स्तर पर भर लें।
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