{"_id":"68d81a6bae60ee16a300c0ad","slug":"promotion-without-pay-hike-is-legally-invalid-high-court-panchkula-news-c-16-1-pkl1098-830360-2025-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना वेतन वृद्धि पदोन्नति कानूनी रूप से असंगत: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना वेतन वृद्धि पदोन्नति कानूनी रूप से असंगत: हाईकोर्ट
विज्ञापन
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के समूह की याचिका मंजूर करते हुए कहा कि वेतन में वृद्धि के बिना पदोन्नति कानूनी रूप से असंगत है, क्योंकि यह सेवा में उन्नति के मूल सार को ही नष्ट कर देती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि पदोन्नति केवल पदनाम में परिवर्तन नहीं है बल्कि रैंक, ग्रेड या स्थिति में उन्नति है। इसमें अनिवार्य रूप से वित्तीय लाभ शामिल है।
पंजाब अनुसूचित जाति भूमि विकास एवं वित्त निगम के सुमेर पॉल और अन्य कर्मचारियों की याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति केवल पदनाम में परिवर्तन नहीं है बल्कि उच्च पद पर उन्नति है। इससे उच्च दर्जा और बेहतर पारिश्रमिक प्राप्त होता है। पीठ ने कहा कि यदि पदोन्नति फीडर पद से कम वेतन पर समाप्त होती है, तो पदोन्नति की अवधारणा ही भ्रामक और अर्थहीन हो जाती है। ऐसी पदोन्नति वरिष्ठता और सराहनीय सेवा के लिए पुरस्कार के बजाय दंड मात्र रह जाती है।
सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि फीडर संवर्ग में 800-1,400 रुपये के वेतनमान पर सहायक जिला प्रबंधक के रूप में कार्यरत याचिकाकर्ताओं को जिला प्रबंधक के रूप में पदोन्नत किया गया था। विडंबना यह है कि उच्च पद का वेतनमान 700-1,200 रुपये था जिससे उन्हें फीडर संवर्ग में बने रहने वाले अपने कनिष्ठों की तुलना में कम वेतन मिल रहा था।
विज्ञापन
इस विसंगति पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को फीडर संवर्ग से पदोन्नत किया गया था और उन्हें निचले पद पर उच्च वेतनमान मिल रहा था। बाद में पदोन्नति के बाद उनका वेतनमान निचले पद पर प्राप्त वेतनमान से कम था। इससे उन्हें फीडर संवर्ग में अपने कनिष्ठों की तुलना में भी कम वेतन मिलेगा, जो कनिष्ठ होने के बावजूद अपने वरिष्ठों से अधिक कमा रहे होंगे, जो पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है और समानता व निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। अदालत ने आदेश दिया कि जिला प्रबंधक के रूप में उनकी पदोन्नति की तिथि से उन्हें मिलने वाले सभी परिणामी लाभ छह सप्ताह के भीतर उन्हें जारी किए जाएं।
विज्ञापन
पंजाब अनुसूचित जाति भूमि विकास एवं वित्त निगम के सुमेर पॉल और अन्य कर्मचारियों की याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति केवल पदनाम में परिवर्तन नहीं है बल्कि उच्च पद पर उन्नति है। इससे उच्च दर्जा और बेहतर पारिश्रमिक प्राप्त होता है। पीठ ने कहा कि यदि पदोन्नति फीडर पद से कम वेतन पर समाप्त होती है, तो पदोन्नति की अवधारणा ही भ्रामक और अर्थहीन हो जाती है। ऐसी पदोन्नति वरिष्ठता और सराहनीय सेवा के लिए पुरस्कार के बजाय दंड मात्र रह जाती है।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान पीठ को बताया गया कि फीडर संवर्ग में 800-1,400 रुपये के वेतनमान पर सहायक जिला प्रबंधक के रूप में कार्यरत याचिकाकर्ताओं को जिला प्रबंधक के रूप में पदोन्नत किया गया था। विडंबना यह है कि उच्च पद का वेतनमान 700-1,200 रुपये था जिससे उन्हें फीडर संवर्ग में बने रहने वाले अपने कनिष्ठों की तुलना में कम वेतन मिल रहा था।
विज्ञापन
इस विसंगति पर ध्यान देते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को फीडर संवर्ग से पदोन्नत किया गया था और उन्हें निचले पद पर उच्च वेतनमान मिल रहा था। बाद में पदोन्नति के बाद उनका वेतनमान निचले पद पर प्राप्त वेतनमान से कम था। इससे उन्हें फीडर संवर्ग में अपने कनिष्ठों की तुलना में भी कम वेतन मिलेगा, जो कनिष्ठ होने के बावजूद अपने वरिष्ठों से अधिक कमा रहे होंगे, जो पूरी तरह से भेदभावपूर्ण है और समानता व निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। अदालत ने आदेश दिया कि जिला प्रबंधक के रूप में उनकी पदोन्नति की तिथि से उन्हें मिलने वाले सभी परिणामी लाभ छह सप्ताह के भीतर उन्हें जारी किए जाएं।