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मुकदमे में हो रही लंबी देर आरोपी के मूल अधिकारों का उल्लंघन : हाईकोर्ट

Tue, 25 Nov 2025 02:00 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 02:00 AM IST
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Prolonged delay in trial violates fundamental rights of accused: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में एक आरोपी को जमानत देते हुए साफ किया कि मुकदमे में हो रही लंबी देर आरोपी के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट के अनुसार संविधान के तहत हर व्यक्ति को समय पर सुनवाई का अधिकार मिलता है।
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मामला अमृतसर में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। वहां पुलिस ने बबलू और उसके साथी से 279 ग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया था। यह मात्रा कॉमर्शियल श्रेणी में आती है और आम तौर पर ऐसे मामलों में जमानत देना बहुत कठिन माना जाता है। जस्टिस सुमित गोयल ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 कठोर है लेकिन जब मुकदमा आगे नहीं बढ़ रहा हो और आरोपी लंबे समय से जेल में हो तो अदालत इस कठोरता को कुछ हद तक नरम कर सकती है।
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अदालत ने माना कि देरी की जिम्मेदारी आरोपी पर नहीं है और अगर ऐसे हालात में जमानत न दी जाए तो यह हिरासत एक तरह से सजा बन जाती है। अदालत ने यह भी दोहराया कि स्पीडी ट्रायल कोई सुविधा नहीं बल्कि सांविधानिक अधिकार है जिसे हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। जमानत देते समय कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई हैं। आरोपी को पासपोर्ट जमा करना होगा, हर महीने हलफनामा देना होगा कि उसने कोई आपराधिक गतिविधि नहीं की है और वह सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।
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हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर वह किसी शर्त का उल्लंघन करता है तो राज्य जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है। एनडीपीएस जैसे गंभीर मामलों में भी अगर मुकदमा समय पर नहीं चलता तो आरोपी की स्वतंत्रता को अनिश्चित समय तक सीमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पहले भी ऐसे कई मामलों में देरी को आधार बनाकर जमानत दी है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की सुस्ती आरोपी के सांविधानिक अधिकारों पर भारी नहीं पड़ सकती।
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