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Panchkula News: खेतों में जमा पानी को 4 दिन में निकालने के आदेश
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने 10 जिलों में सेम की समस्या के चलते खेतों में पानी को आगामी 3 से 4 दिन में निकालने के आदेश दिए हैं। इससे पहले, सभी डीसी को जलभराव वाले क्षेत्रों का दौरा करने करना होगा और पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध करने होंगे। पानी निकालने के बाद अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को देनी होगी। इसके लिए बकायादा सभी कार्यकारी अभियंताओं को यह प्रमाणित करना होगा कि वह उसके क्षेत्र में कहीं पर भी जलभराव नहीं है। अगर इसके बाद भी किसी क्षेत्र में पानी जमा मिला तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, झूठी रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों से स्प्ष्टीकरण मांगे गए हैं।
इस संबंध में प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने मुख्य सचिव संजीव कौशल के साथ साथ 10 प्रभावित जिलों के डीसी से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बैठक की। बैठक में प्रत्येक जिले का फीडबैक लिया गया। कृषि मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि संबंधित जिलों के कृषि व सिंचाई विभाग के अधिकारी मिलकर इस कार्य को मिलकर पूरा करेंगे। पानी निकासी के लिए बड़ी क्षमता वाले पंप लगाए जाएं। जींद, फतेहाबाद, हिसार, सिरसा, भिवानी, रोहतक, सोनीपत, झज्जर, नूंह और चरखी दादरी जिलों में किसानों की जमीन पर जलभराव की समस्या है। इसका समाधान शीघ्र ही किया जाएगा। कृषि मंत्री ने सभी डीसी को आदेश दिए वह इस मामले की गंभीरता को समझें और हर हाल में पानी निकासी तय करें, ताकि किसान समय से गेहूं की बिजाई कर सकें। इस बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के आयुक्त एवं सचिव पंकज अग्रवाल, कृषि विभाग के निदेशक नरहरि सिंह बांगड़, मुख्यमंत्री के सलाहकार (सिंचाई) देवेंद्र सिंह सहित कृषि, सिंचाई और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
निकासी का स्थाई समाधान की तलाश
बैठक में बताया गया कि इस समय प्रदेश में करीब 50 हजार एकड़ जमीन में पानी जमा है। इससे यहां पर किसानों को फसलों की बिजाई करने में दिक्कत आ रही है। बैठक में इस बात पर मंथन किया गया कि हर साल यह समस्या सामने आती है। इसलिए इसका स्थाई समाधान तलाशा जाए। इसके तहत आगामी दिनों में होने वाले फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक होगी। इसमें बोर्ड का बजट बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा, विभाग अगले साल एक कंट्रोल फ्री नंबर जारी करेगा, ताकि किसान जमा पानी की सूचना दे सकें। इसके बाद सरकार के पास पुख्ता डाटा तैयार हो जाएगा। इसके बाद ऐसा मानिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे अधिकारी, किसान और कृषि मंत्रालय भी जुड़ा रहेगा।
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इस संबंध में प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने मुख्य सचिव संजीव कौशल के साथ साथ 10 प्रभावित जिलों के डीसी से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से बैठक की। बैठक में प्रत्येक जिले का फीडबैक लिया गया। कृषि मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि संबंधित जिलों के कृषि व सिंचाई विभाग के अधिकारी मिलकर इस कार्य को मिलकर पूरा करेंगे। पानी निकासी के लिए बड़ी क्षमता वाले पंप लगाए जाएं। जींद, फतेहाबाद, हिसार, सिरसा, भिवानी, रोहतक, सोनीपत, झज्जर, नूंह और चरखी दादरी जिलों में किसानों की जमीन पर जलभराव की समस्या है। इसका समाधान शीघ्र ही किया जाएगा। कृषि मंत्री ने सभी डीसी को आदेश दिए वह इस मामले की गंभीरता को समझें और हर हाल में पानी निकासी तय करें, ताकि किसान समय से गेहूं की बिजाई कर सकें। इस बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के आयुक्त एवं सचिव पंकज अग्रवाल, कृषि विभाग के निदेशक नरहरि सिंह बांगड़, मुख्यमंत्री के सलाहकार (सिंचाई) देवेंद्र सिंह सहित कृषि, सिंचाई और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
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निकासी का स्थाई समाधान की तलाश
बैठक में बताया गया कि इस समय प्रदेश में करीब 50 हजार एकड़ जमीन में पानी जमा है। इससे यहां पर किसानों को फसलों की बिजाई करने में दिक्कत आ रही है। बैठक में इस बात पर मंथन किया गया कि हर साल यह समस्या सामने आती है। इसलिए इसका स्थाई समाधान तलाशा जाए। इसके तहत आगामी दिनों में होने वाले फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक होगी। इसमें बोर्ड का बजट बढ़ाने की योजना है। इसके अलावा, विभाग अगले साल एक कंट्रोल फ्री नंबर जारी करेगा, ताकि किसान जमा पानी की सूचना दे सकें। इसके बाद सरकार के पास पुख्ता डाटा तैयार हो जाएगा। इसके बाद ऐसा मानिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिससे अधिकारी, किसान और कृषि मंत्रालय भी जुड़ा रहेगा।
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