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Panchkula News: फर्जी कॉल सेंटर मामले में हवाला और क्रिप्टो नेटवर्क खंगाल रही पुलिस
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चार आरोपियों से पूछताछ के बाद ट्राइसिटी समेत कई स्थानों पर छापे, साइबर ठगी की रकम के नेटवर्क की पड़ताल
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-2 स्थित फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर के भंडाफोड़ के बाद पंचकूला पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मामले में गिरफ्तार चार मुख्य आरोपियों से पूछताछ के आधार पर डिटेक्टिव स्टाफ की टीम ट्राइसिटी समेत कई अन्य स्थानों पर छापे मार रही है। पुलिस साइबर ठगी से अर्जित रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
सूत्रों के अनुसार जांच में हवाला ऑपरेटरों, क्रिप्टोकरेंसी के जरिये लेनदेन करने वाले एजेंटों और गिफ्ट कार्ड रिडीम करने वाले सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि ठगी की रकम किन-किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था।
जांच के दौरान जब्त किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क ट्राइसिटी तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला हो सकता है।
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जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशी नागरिकों का डाटा आरोपियों तक कैसे पहुंचता था और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। मामले में जल्द कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। सेक्टर-2 स्थित फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर के भंडाफोड़ के बाद पंचकूला पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मामले में गिरफ्तार चार मुख्य आरोपियों से पूछताछ के आधार पर डिटेक्टिव स्टाफ की टीम ट्राइसिटी समेत कई अन्य स्थानों पर छापे मार रही है। पुलिस साइबर ठगी से अर्जित रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
सूत्रों के अनुसार जांच में हवाला ऑपरेटरों, क्रिप्टोकरेंसी के जरिये लेनदेन करने वाले एजेंटों और गिफ्ट कार्ड रिडीम करने वाले सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस यह पता लगा रही है कि ठगी की रकम किन-किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था।
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जांच के दौरान जब्त किए गए कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क ट्राइसिटी तक सीमित नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला हो सकता है।
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जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशी नागरिकों का डाटा आरोपियों तक कैसे पहुंचता था और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। मामले में जल्द कुछ और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।