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खिलवाड़ : सप्तमी पर नहीं होगा जागरण, श्रद्धालुओं में रोष, बोले- नियम व शर्तों के साथ बोर्ड माता के गुणगान की दे अनुमति
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कालका। काली माता मंदिर में अश्विन नवरात्र के दौरान सप्तमी पर जागरण न करवाए जाने को लेकर श्रद्धालुओं में रोष है। श्रद्धालुओं ने मांग की है कि जब कोरोना गाइडलाइन की पालना करते हुए एक दिन में मंदिर में श्रद्धालु हजारों की संख्या में दर्शन करने जा सकते हैं तो फिर ऐसे में माता का जागरण क्यों नहीं करवाया जा सकता। बता दें कि लंबे समय से नवरात्र के हर वर्ष मंदिर में सातवें नवरात्र के अवसर पर स्थानीय लोगों द्वारा माता का जागरण करवाया जाता था जोकि कोरोना के चलते लॉकडाउन में पाबंदियों के कारण नहीं हो पाया था, लेकिन अब जब मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं तो ऐसे में श्रद्धालुओं की मांग है कि नियम व शर्तों के साथ माता का जागरण भी होना चाहिए।
अजय शर्मा, साधू शर्मा, संतोष टगरा, अच्छर चंद, संजय लोहट, शुभम शर्मा, गिरीश शर्मा ने कहा कि मंदिर के साथ लोगों की आस्था जुड़ी है। इसका ख्याल करते हुए माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड को सप्तमी पर मां का जागरण करने की अनुमति दे देनी चाहिए। यदि बोर्ड को लगता है कि जागरण के दौरान श्रद्धालुओं की ज्यादा तादाद इकट्ठा न हो जाए तो केवल जागरण मंडली को जागरण करने की परमिशन दे देनी चाहिए ताकि लोगों की आस्था को ठेस न पहुंचे।
मंदिर खुला तो गुणगान भी जरूरी
स्थानीय निवासी संतोष टगरा ने कहा कि जब माता का मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल गया है तो मां का गुणगान क्यों नहीं किया जा सकता। राजनीतिक कार्यक्रम हो रहे हैं, विवाह-शादियां हो रही हैं तो मां काली के गुणगान पर क्यों रोक लगाई गई है। बोर्ड को कोरोना की गाइडलाइन के अनुसार माता का जागरण भी करवाना चाहिए।
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कई सालों से हो रहा है जागरण
अजय शर्मा ने बताया कि बोर्ड को जागरण मंडली को जागरण की अनुमति दे देनी चाहिए। चाहे जागरण में श्रद्धालुओं की नियमित संख्या निर्धारित करनी पड़े। पिछले लंबे अरसे से नवरात्र पर मां का जागरण होता रहा है। अब जब मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है तो जागरण की अनुमति देनी चाहिए थी।
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अजय शर्मा, साधू शर्मा, संतोष टगरा, अच्छर चंद, संजय लोहट, शुभम शर्मा, गिरीश शर्मा ने कहा कि मंदिर के साथ लोगों की आस्था जुड़ी है। इसका ख्याल करते हुए माता मनसा देवी श्राइन बोर्ड को सप्तमी पर मां का जागरण करने की अनुमति दे देनी चाहिए। यदि बोर्ड को लगता है कि जागरण के दौरान श्रद्धालुओं की ज्यादा तादाद इकट्ठा न हो जाए तो केवल जागरण मंडली को जागरण करने की परमिशन दे देनी चाहिए ताकि लोगों की आस्था को ठेस न पहुंचे।
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मंदिर खुला तो गुणगान भी जरूरी
स्थानीय निवासी संतोष टगरा ने कहा कि जब माता का मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुल गया है तो मां का गुणगान क्यों नहीं किया जा सकता। राजनीतिक कार्यक्रम हो रहे हैं, विवाह-शादियां हो रही हैं तो मां काली के गुणगान पर क्यों रोक लगाई गई है। बोर्ड को कोरोना की गाइडलाइन के अनुसार माता का जागरण भी करवाना चाहिए।
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कई सालों से हो रहा है जागरण
अजय शर्मा ने बताया कि बोर्ड को जागरण मंडली को जागरण की अनुमति दे देनी चाहिए। चाहे जागरण में श्रद्धालुओं की नियमित संख्या निर्धारित करनी पड़े। पिछले लंबे अरसे से नवरात्र पर मां का जागरण होता रहा है। अब जब मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है तो जागरण की अनुमति देनी चाहिए थी।