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हुण मैं सेठ हां ने बयां की विदेश में बसने के सपने लिए मां-बाप कैसे बच्चों पर अपने सपने थोपते हैं
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चंडीगढ़। यह थी गगन की कहानी.. पिता के कनाडा में लाइव टाइम के लिए बसने के सपने के पूरा करने के लिए वह अपनी सपनों को खत्म कर लेता है। उस युवा सपने को तोड़ देता है जिसका वह बचपन से देखता आया था। यह दिखाया गया ‘हुण मैं सेठ हां’ नाटक में। इसी के साथ ही पंजाब कला भवन में आयोजित चार दिवसीय थियेटर फेस्टिवल ‘अशर्फिया’ का समापन हो गया। नाटक को दर्शकों ने खूब पसंद किया। यह फेस्टिवल इम्पैक्ट आर्ट्स मोहाली ने इस नाटक को प्रस्तुत किया। वीना वर्मा की कहानी का निर्देशन बनिंदरजीत सिंह बन्नी ने किया।
नाटक में दिखाया गया कि गगन के पिता एक लिटरेरी कांफ्रेंस में कनाडा के लाइफ स्टाइल से ऐसे प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी से लेकर सभी जुगाड़ से बेटे को कनाडा में सेटल करने के लिए कोशिश करनी शुरू कर दी। गगन के दिल पर अपने पिता के इस सपने को पूरा करने का बोझ किस तरह उसे मानसिक तौर पर परेशान करता है उस दर्द को बयां किया। नाटक में पंजाब के हर उस युवा के संघर्ष को दिखाया गया जो मां-बाप के सपनों को पूरा करने के लिए विदेश जाते हैं। लेकिन उनका संघर्ष भारत के साथ खत्म नहीं होता बल्कि विदेश जाकर यह संघर्ष और बढ़ता है। कैसे वे इस संघर्ष का सामना करते हैं और किस तरह की मानसिक परेशानी से जूझते हैं यह सब नाटक ने बखूबी बयां किया।
कहानी के हर डायलॉग ने बटोरी तालियां
कहानी ने जैसे गगन की नहीं, बल्कि पंजाब के हर उस लड़के की कहानी को बयां किया जो सिर्फ मां-बाप के विदेश में बसने के सपने की वजह से वहां जाता है। उस संघर्ष को दिखाया जो गगन जैसे हर लड़के दिल और दिमाग पर हावी होता है। कहानी ने दर्शकों की खूब तारीफ बटोरी। इसमें मुख्य भूमिका हितेश कुमार, नवदीप बाजवा, कमलदीप कौर, चंदन कुमार, मनोज कुमार, रवितेज बराड़, नेहा धीमान, अंकुश राणा, अजय चौधरी, अमृतपाल, रवीन, शुभम गांधी, संदीप सिंह ने निभाई। वहीं लाइटिंग सौरभ शर्मा और संगीत जशनदीप सिंह ने की।
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नाटक में दिखाया गया कि गगन के पिता एक लिटरेरी कांफ्रेंस में कनाडा के लाइफ स्टाइल से ऐसे प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी जमा पूंजी से लेकर सभी जुगाड़ से बेटे को कनाडा में सेटल करने के लिए कोशिश करनी शुरू कर दी। गगन के दिल पर अपने पिता के इस सपने को पूरा करने का बोझ किस तरह उसे मानसिक तौर पर परेशान करता है उस दर्द को बयां किया। नाटक में पंजाब के हर उस युवा के संघर्ष को दिखाया गया जो मां-बाप के सपनों को पूरा करने के लिए विदेश जाते हैं। लेकिन उनका संघर्ष भारत के साथ खत्म नहीं होता बल्कि विदेश जाकर यह संघर्ष और बढ़ता है। कैसे वे इस संघर्ष का सामना करते हैं और किस तरह की मानसिक परेशानी से जूझते हैं यह सब नाटक ने बखूबी बयां किया।
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कहानी के हर डायलॉग ने बटोरी तालियां
कहानी ने जैसे गगन की नहीं, बल्कि पंजाब के हर उस लड़के की कहानी को बयां किया जो सिर्फ मां-बाप के विदेश में बसने के सपने की वजह से वहां जाता है। उस संघर्ष को दिखाया जो गगन जैसे हर लड़के दिल और दिमाग पर हावी होता है। कहानी ने दर्शकों की खूब तारीफ बटोरी। इसमें मुख्य भूमिका हितेश कुमार, नवदीप बाजवा, कमलदीप कौर, चंदन कुमार, मनोज कुमार, रवितेज बराड़, नेहा धीमान, अंकुश राणा, अजय चौधरी, अमृतपाल, रवीन, शुभम गांधी, संदीप सिंह ने निभाई। वहीं लाइटिंग सौरभ शर्मा और संगीत जशनदीप सिंह ने की।
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