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Panchkula News: फार्मासिस्ट योगेश्वर पर रेगुलर ड्यूटी के दौरान एलएलबी करने का आरोप, चार्जशीट की सिफारिश पर अधिकारियों ने चलाई कैंची
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पंचकूला। स्वास्थ्य विभाग पंचकूला में कार्यरत फार्मासिस्ट योगेश्वर शर्मा पर रेगुलर ड्यूटी के दौरान पंजाब यूनिवर्सिटी से नियमित रूप से एलएलबी करने का गंभीर आरोप सामने आया है। यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है क्योंकि शिकायत के बावजूद कार्रवाई की बजाय विभागीय अधिकारी आरोपी कर्मचारी को बचाने में जुटे हैं।
सिविल अस्पताल से रिटायर्ड कर्मचारी जसविंदर सिंह ने बुधवार को रेड बिशप पंचकूला में पत्रकारवार्ता कर इस मामले का खुलासा किया। जसविंदर का कहना है कि योगेश्वर शर्मा ने वर्ष 2020 में एलएलबी में नियमित दाखिला लिया जबकि वह नियमित रूप से अस्पताल में भी ड्यूटी करता रहा। उसे दोपहर 2 से रात 8 बजे तक की ड्यूटी देकर विश्वविद्यालय में पढ़ाई की छूट दी गई, जो नियमों के विरुद्ध है।
जसविंदर के अनुसार योगेश्वर ने यूनिवर्सिटी पढ़ाई के दौरान ही नेशनल स्तर पर ड्रेगन बोट प्रतियोगिता में भाग लिया और उस दौरान भी अस्पताल में हाजिरी लगती रही। यहां तक कि उसने अतिरिक्त भत्ते भी लिए। सीएसआर रूल्स 2016 के अनुसार कोई भी तृतीय श्रेणी कर्मचारी रेगुलर हाजिरी देकर उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता।
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इस मामले की शिकायत पर एचसीएस अधिकारी ने जांच के बाद सितंबर 2024 में योगेश्वर समेत अधीक्षक भूपिंदर नैन और एक सहायक को चार्जशीट करने की सिफारिश की थी। अक्टूबर 2024 में तत्कालीन डीजी हेल्थ डॉ. मनीष बंसल ने भी चार्जशीट के आदेश दिए थे, लेकिन उनके अवकाश पर जाते ही सेकेंड डीजी डॉ. कुलदीप कुमार ने फाइल बंद करते हुए क्लीनचिट दे दी। जसविंदर सिंह का कहना है कि नियम सबके लिए बराबर हैं। अगर यह सही है तो पूर्व में जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, उन्हें बहाल किया जाए। उन्होंने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को भी शिकायत भेजी है।
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सिविल अस्पताल से रिटायर्ड कर्मचारी जसविंदर सिंह ने बुधवार को रेड बिशप पंचकूला में पत्रकारवार्ता कर इस मामले का खुलासा किया। जसविंदर का कहना है कि योगेश्वर शर्मा ने वर्ष 2020 में एलएलबी में नियमित दाखिला लिया जबकि वह नियमित रूप से अस्पताल में भी ड्यूटी करता रहा। उसे दोपहर 2 से रात 8 बजे तक की ड्यूटी देकर विश्वविद्यालय में पढ़ाई की छूट दी गई, जो नियमों के विरुद्ध है।
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जसविंदर के अनुसार योगेश्वर ने यूनिवर्सिटी पढ़ाई के दौरान ही नेशनल स्तर पर ड्रेगन बोट प्रतियोगिता में भाग लिया और उस दौरान भी अस्पताल में हाजिरी लगती रही। यहां तक कि उसने अतिरिक्त भत्ते भी लिए। सीएसआर रूल्स 2016 के अनुसार कोई भी तृतीय श्रेणी कर्मचारी रेगुलर हाजिरी देकर उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकता।
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इस मामले की शिकायत पर एचसीएस अधिकारी ने जांच के बाद सितंबर 2024 में योगेश्वर समेत अधीक्षक भूपिंदर नैन और एक सहायक को चार्जशीट करने की सिफारिश की थी। अक्टूबर 2024 में तत्कालीन डीजी हेल्थ डॉ. मनीष बंसल ने भी चार्जशीट के आदेश दिए थे, लेकिन उनके अवकाश पर जाते ही सेकेंड डीजी डॉ. कुलदीप कुमार ने फाइल बंद करते हुए क्लीनचिट दे दी। जसविंदर सिंह का कहना है कि नियम सबके लिए बराबर हैं। अगर यह सही है तो पूर्व में जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, उन्हें बहाल किया जाए। उन्होंने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव को भी शिकायत भेजी है।