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डायबिटीज की तरह स्क्लेरोडर्मा को किया जा सकता है नियंत्रित
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पीजीआई में स्क्लेरोडर्मा डे पर मरीजों को जानकारी देते डाक्टर।
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चंडीगढ़। स्क्लेरोडर्मा एक गंभीर बीमारी है। यदि इसका इलाज सही ढंग से नहीं किया तो यह जानलेवा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी का इलाज उपलब्ध है। जिस ढंग से डायबिटीज को काबू कर अच्छी जिंदगी जी सकते हैं, ठीक उसी तरह से स्क्लेरोडर्मा को भी नियंत्रित किया जा सकता है। कई मरीज ऐसे हैं, जो एक बार डॉक्टर को दिखाने के बाद वापस नहीं आते। वे देशी इलाज की ओर मुड़ जाते हैं। वहां इलाज कराते रहते हैं, जबकि वहां उन्हें फायदा नहीं होता। जब उनकी हालत और ज्यादा खराब होती है तो वे फिर से पीजीआई या दूसरे रेफरल संस्थान में जाते हैं। उसके बाद उनका इलाज करना मुश्किल होता है।
शनिवार को पीजीआई में आयोजित स्क्लेरोडर्मा डे के उपलक्ष्य पर पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की डॉक्टर शैफाली के शर्मा ने बताया कि इस बीमारी से निपटने का सबसे सही तरीका यही है कि जल्द से जल्द इसकी पहचान कर स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखाएं। यदि पेशेंट डॉक्टर के पास जल्दी पहुंच जाएं तो इस बीमारी को रोका जा सकता है और इसके अच्छे परिणाम आते हैं। इसके लिए पेशेंट में स्क्लेरोडर्मा के बारे में जानना होगा। जब उन्हें लक्षण और इसके इलाज के बारे में पता होगा, तब उसका इलाज सही ढंग से हो सकेगा। इस बीमारी में मरीज की लंग व पल्मोनेरी ऑटरीज सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।
क्या होता है स्क्लेरोडर्मा
स्क्लेरोडर्मा एक ऑटो इम्यून बीमारी है। स्किन का कठोर हो जाना, इस बीमारी का मुख्य लक्षण है। हालांकि, अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि इसका क्या कारण है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। मुख्य रूप से यह 22 से 55 साल की उम्र में होता हैै। पुरुषों के मुकाबले यह महिलाओं में ज्यादा होता है।
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स्क्लेरोडर्मा के क्या लक्षण होते हैं
रक्तप्रवाह होने के कारण उंगुलियां सफेद पड़ जाती हैं।
कई मरीजों में उंगुलियां नीली पड़ जाती हैं
हाथ पैर के अलावा कान, नाक और जीभ का हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है
रात में मांसपेशियां की गति रुकने से उंगुलिया सूज जाती हैं
सूजन की वजह से मुठ्ठी बंद करने में दिक्कत आती है
भोजन के पचने में दिक्कत आ सकती है
भोजन निगलने में कठिनाई आती है
आंख व मुंह में सूखापन होना
कैसे करें स्क्लेरोडर्मा की देखभाल
लक्षणों के प्रति सचेत रहना
शारीरिक उपचार व व्यायाम करना
जोड़ों की रक्षा करना
डाक्टर की ओर दी गई दवा का सही इस्तेमाल करना
पर्याप्त आराम करना
तनाव कम करना
संतुलित खाना अपना वजन कम करना
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शनिवार को पीजीआई में आयोजित स्क्लेरोडर्मा डे के उपलक्ष्य पर पीजीआई के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की डॉक्टर शैफाली के शर्मा ने बताया कि इस बीमारी से निपटने का सबसे सही तरीका यही है कि जल्द से जल्द इसकी पहचान कर स्पेशलिस्ट डॉक्टर को दिखाएं। यदि पेशेंट डॉक्टर के पास जल्दी पहुंच जाएं तो इस बीमारी को रोका जा सकता है और इसके अच्छे परिणाम आते हैं। इसके लिए पेशेंट में स्क्लेरोडर्मा के बारे में जानना होगा। जब उन्हें लक्षण और इसके इलाज के बारे में पता होगा, तब उसका इलाज सही ढंग से हो सकेगा। इस बीमारी में मरीज की लंग व पल्मोनेरी ऑटरीज सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।
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क्या होता है स्क्लेरोडर्मा
स्क्लेरोडर्मा एक ऑटो इम्यून बीमारी है। स्किन का कठोर हो जाना, इस बीमारी का मुख्य लक्षण है। हालांकि, अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि इसका क्या कारण है। यह किसी भी उम्र में हो सकता है। मुख्य रूप से यह 22 से 55 साल की उम्र में होता हैै। पुरुषों के मुकाबले यह महिलाओं में ज्यादा होता है।
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स्क्लेरोडर्मा के क्या लक्षण होते हैं
रक्तप्रवाह होने के कारण उंगुलियां सफेद पड़ जाती हैं।
कई मरीजों में उंगुलियां नीली पड़ जाती हैं
हाथ पैर के अलावा कान, नाक और जीभ का हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है
रात में मांसपेशियां की गति रुकने से उंगुलिया सूज जाती हैं
सूजन की वजह से मुठ्ठी बंद करने में दिक्कत आती है
भोजन के पचने में दिक्कत आ सकती है
भोजन निगलने में कठिनाई आती है
आंख व मुंह में सूखापन होना
कैसे करें स्क्लेरोडर्मा की देखभाल
लक्षणों के प्रति सचेत रहना
शारीरिक उपचार व व्यायाम करना
जोड़ों की रक्षा करना
डाक्टर की ओर दी गई दवा का सही इस्तेमाल करना
पर्याप्त आराम करना
तनाव कम करना
संतुलित खाना अपना वजन कम करना