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कोरोना, किसान आंदोलन, ठंड और तीन छुट्टियां...मतदान घटा
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पंचकूला। निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत में आई गिरावट चिंता का विषय है। सन् 2013 में पहली बार हुए निकाय चुनाव में 2.30 लाख मतदाताओं में से कुल 65 प्रतिशत मतदान हुआ था, लेकिन इस बार 1.85 लाख 707 मतदाताओं में से करीब 50 प्रतिशत ने ही अपने मत का प्रयोग किया। मतदान प्रतिशत कम होने का कारण विशेषज्ञ और राजनीतिज्ञ अलग-अलग बता रहे हैं। राजनीति से संबंध रखने वाले इसे कोरोना महामारी, किसान आंदोलन और एक साथ तीन छुट्टियां से जोड़ रहे हैं, जबकि अन्य विशेषज्ञ इसे दूसरे नजरिए से देख रहे हैं। उनका मानना है कि मतदान कम होने के पीछे शहरी मतदाताओं का घरों से बाहर नहीं निकलना है, क्योंकि वह स्थानीय मुद्दों में ज्यादा रुचि नहीं लेते हैं। वहीं, आमजन की मानें तो ठंड भी इसके पीछे एक मुख्य वजह है। सन् 2013 का मतदान 4 जून को गर्मी में हुआ था, जबकि इस बार 27 दिसंबर को कड़ाके की ठंड का मौसम है।
मतदान प्रतिशत कम होने के पीछे कोरोना महामारी का भय नहीं है, क्योंकि हर पोलिंग बूथ पर पुख्ता प्रबंध किया गया था। किसान आंदोलन का भी ज्यादा असर चुनाव पर नहीं पड़ा है। शहरी आदमी घरों से बाहर बहुत ही कम निकलता है। यही कारण है कि इस बार मतदान प्रतिशत में कमी आई है। हालांकि मतदान को लेकर मतदाताओं को लगातार जागरूक भी किया गया था। लेकिन, कुल मिलाकर देखा जाए तो मतदान प्रतिशत ठीक हुआ है। - मुकेश कुमार आहूजा, डीसी पंचकूला।
चंडीगढ़-पंचकूला के लोग लोकसभा और विधानसभा में तो बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं, लेकिन स्थानीय चुनाव में बहुत कम हिस्सा लेते हैं। यही कारण है कि पंचकूला में हुए निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है। दूसरा कारण कोरोना भी है। ऐसे में शहरी मतदाता किसी भी तरह का जोखिम उठाना पसंद नहीं करते हैं। ग्रामीण और स्लम एरिया के लोग बिना किसी परवाह के घरों से बाहर निकलते हैं। - विवेक अत्रे, पूर्व आईएएस।
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शहर के लोग कोरोना के चलते जहां घरों से बाहर नहीं निकले, वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने किसान आंदोलन के चलते निकाय चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। यही कारण है कि मतदान कम हुआ है। यदि देखा जाए तो कोरोना, किसान आंदोलन और ठंड के बाद भी लोग घरों से बाहर निकले और लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान किया। - आरपी मल्होत्रा, फोरा प्रधान पंचकूला।
2013 निकाय चुनाव से इस बार मतदान कम होने के कारण कोरोना महामारी है। इसके अलावा तीन दिन की एक साथ छुट्टियां आना भी एक कारण माना जा सकता है। चुनाव में बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन थोड़ा असर किसान आंदोलन का पड़ा है। लेकिन कुल मिलाकर निकाय चुनाव का मतदान प्रतिशत ठीक है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में ही 62 प्रतिशत मतदान हुआ था। हमें पूरा विश्वास है कि भाजपा जीत कर निगम में पहुंचेगी और विकास करवाएगी। - ज्ञानचंद गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष हरियाणा।
मतदाताओं में किसान आंदोलन को लेकर नाराजगी है। यही कारण है कि निकाय चुनाव में शहरी मतदाताओं ने भाजपा को सबक सिखाने का फैसला लेकर कम मतदान किया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं ने अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए बढ़ चढ़कर मतदान किया है।
- राम किशन गुर्जर, राजनीतिक सलाहकार कांग्रेस।
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मतदान प्रतिशत कम होने के पीछे कोरोना महामारी का भय नहीं है, क्योंकि हर पोलिंग बूथ पर पुख्ता प्रबंध किया गया था। किसान आंदोलन का भी ज्यादा असर चुनाव पर नहीं पड़ा है। शहरी आदमी घरों से बाहर बहुत ही कम निकलता है। यही कारण है कि इस बार मतदान प्रतिशत में कमी आई है। हालांकि मतदान को लेकर मतदाताओं को लगातार जागरूक भी किया गया था। लेकिन, कुल मिलाकर देखा जाए तो मतदान प्रतिशत ठीक हुआ है। - मुकेश कुमार आहूजा, डीसी पंचकूला।
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चंडीगढ़-पंचकूला के लोग लोकसभा और विधानसभा में तो बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं, लेकिन स्थानीय चुनाव में बहुत कम हिस्सा लेते हैं। यही कारण है कि पंचकूला में हुए निकाय चुनाव में मतदान प्रतिशत में गिरावट आई है। दूसरा कारण कोरोना भी है। ऐसे में शहरी मतदाता किसी भी तरह का जोखिम उठाना पसंद नहीं करते हैं। ग्रामीण और स्लम एरिया के लोग बिना किसी परवाह के घरों से बाहर निकलते हैं। - विवेक अत्रे, पूर्व आईएएस।
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शहर के लोग कोरोना के चलते जहां घरों से बाहर नहीं निकले, वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने किसान आंदोलन के चलते निकाय चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। यही कारण है कि मतदान कम हुआ है। यदि देखा जाए तो कोरोना, किसान आंदोलन और ठंड के बाद भी लोग घरों से बाहर निकले और लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदान किया। - आरपी मल्होत्रा, फोरा प्रधान पंचकूला।
2013 निकाय चुनाव से इस बार मतदान कम होने के कारण कोरोना महामारी है। इसके अलावा तीन दिन की एक साथ छुट्टियां आना भी एक कारण माना जा सकता है। चुनाव में बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन थोड़ा असर किसान आंदोलन का पड़ा है। लेकिन कुल मिलाकर निकाय चुनाव का मतदान प्रतिशत ठीक है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में ही 62 प्रतिशत मतदान हुआ था। हमें पूरा विश्वास है कि भाजपा जीत कर निगम में पहुंचेगी और विकास करवाएगी। - ज्ञानचंद गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष हरियाणा।
मतदाताओं में किसान आंदोलन को लेकर नाराजगी है। यही कारण है कि निकाय चुनाव में शहरी मतदाताओं ने भाजपा को सबक सिखाने का फैसला लेकर कम मतदान किया है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं ने अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए बढ़ चढ़कर मतदान किया है।
- राम किशन गुर्जर, राजनीतिक सलाहकार कांग्रेस।