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400 स्टूडेंट्स का मेडिकल कैरियर दांव पर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2016 01:30 AM IST
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400 स्टूडेंट्स का मेडिकल
- फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद गोल्ड फील्ड मेडिकल कालेज के चार सौ छात्रों का कैरियर दांव पर लग गया है। इसीलिए अपनी समस्या का समाधान करवाने के लिए वह ढूंढ रहे हैं हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को। परीक्षाएं नवंबर में हैं और दो माह से स्टूडेंट्स की कक्षाएं नियमित नहीं हो पा रही हैं। इन स्टूडेंट्स का कोर्स भी पूरा नहीं हो पा रहा है। पंचकूला में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलने के लिए पहुंचे एमबीबीएस के इन स्टूडेंट्स ने अमर उजाला को अपनी समस्याएं बताईं।
स्टूडेंट्स का कहना है कि परीक्षा के लिए 75 फीसदी अटेंडेंस अनिवार्य है। ऐसे में अपने कैरियर को लेकर परेशान मेडिकल स्टूडेंट्स 22 मार्च को दिल्ली में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिले थे। मुख्यमंत्री ने उनको आश्वासन दिया था कि छात्रों को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। मेडिकल स्टूडेंट्स का कहना है कि अगर उन्हें जल्द दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो उनकी अटेंडेंस पूरी नहीं हो सकेगी।
ऐसी स्थिति में एक साल बर्बाद हो जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी स्टूडेंट्स को आश्वासन दिया था। इसी उम्मीद को लेकर मेडिकल छात्र उनसे मिलने पंचकूला पहुंचे थे। उनको सूचना मिली थी कि पंचकूला सेक्टर 3 के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में स्वास्थ्य मंत्री एक लीग क्रिकेट चैंपियशिप के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री किसी कारणवश पंचकूला नहीं पहुंच पाए। ऐसी स्थिति में मेडिकल छात्रों को शाम को निराश होकर घर लौटना पड़ा।
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दो साल से कॉलेज की मान्यता रद्द
साल 2010 में शुरू हुएि मेडिकल कॉलेज को कांग्रेस सरकार ने अनुमति दी थी। स्टूडेंट्स का आरोप है कि छह वर्षों में कॉलेज प्रबंधन अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं कर पाया। जांच में कमियां मिलने पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया एफसीआई ने यहां 2015-16 में नए नए दाखिले पर रोक लगा दिया। अब कॉलेज पर कॉलेज पर ताला लगा हुआ है। अब कॉलेज में न कोई पढ़ाने वाले है और न ही स्टूडेंट्स की सुनने वाला है।
कोट्स
एमडीबीएस फानल ईयर का स्टूडेंट हूं। दो माह से एक भी क्लासेज नहीं चली हैं। नवंबर में फाइनल एग्जाम है। अगर जल्द हमें दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। आयुष मित्तल, निवासी दिल्ली।
कोट्स
नवंबर में फाइनल एग्जाम है। परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य है। अगर जल्द सभी स्टूडेंट्स को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो हमारा एक साल बर्बाद हो जाएगा।
गोविंद शर्मा, निवासी गुड़गांव।
कोट्स
एमबीबीएस फाइल इयर की स्टूडेंट्स हूं। हमे दूसरे कॉलेज में शिफ्ट करने का आश्वासन सीएम ने 22 मार्च को दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। अगर जल्द हमें दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
माधुरी गिरधर, निवासी, बल्बगढ़
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स्टूडेंट्स का कहना है कि परीक्षा के लिए 75 फीसदी अटेंडेंस अनिवार्य है। ऐसे में अपने कैरियर को लेकर परेशान मेडिकल स्टूडेंट्स 22 मार्च को दिल्ली में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मिले थे। मुख्यमंत्री ने उनको आश्वासन दिया था कि छात्रों को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। मेडिकल स्टूडेंट्स का कहना है कि अगर उन्हें जल्द दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो उनकी अटेंडेंस पूरी नहीं हो सकेगी।
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ऐसी स्थिति में एक साल बर्बाद हो जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी स्टूडेंट्स को आश्वासन दिया था। इसी उम्मीद को लेकर मेडिकल छात्र उनसे मिलने पंचकूला पहुंचे थे। उनको सूचना मिली थी कि पंचकूला सेक्टर 3 के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में स्वास्थ्य मंत्री एक लीग क्रिकेट चैंपियशिप के समापन पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री किसी कारणवश पंचकूला नहीं पहुंच पाए। ऐसी स्थिति में मेडिकल छात्रों को शाम को निराश होकर घर लौटना पड़ा।
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दो साल से कॉलेज की मान्यता रद्द
साल 2010 में शुरू हुएि मेडिकल कॉलेज को कांग्रेस सरकार ने अनुमति दी थी। स्टूडेंट्स का आरोप है कि छह वर्षों में कॉलेज प्रबंधन अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं कर पाया। जांच में कमियां मिलने पर मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया एफसीआई ने यहां 2015-16 में नए नए दाखिले पर रोक लगा दिया। अब कॉलेज पर कॉलेज पर ताला लगा हुआ है। अब कॉलेज में न कोई पढ़ाने वाले है और न ही स्टूडेंट्स की सुनने वाला है।
कोट्स
एमडीबीएस फानल ईयर का स्टूडेंट हूं। दो माह से एक भी क्लासेज नहीं चली हैं। नवंबर में फाइनल एग्जाम है। अगर जल्द हमें दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। आयुष मित्तल, निवासी दिल्ली।
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नवंबर में फाइनल एग्जाम है। परीक्षा में बैठने के लिए 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य है। अगर जल्द सभी स्टूडेंट्स को दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो हमारा एक साल बर्बाद हो जाएगा।
गोविंद शर्मा, निवासी गुड़गांव।
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एमबीबीएस फाइल इयर की स्टूडेंट्स हूं। हमे दूसरे कॉलेज में शिफ्ट करने का आश्वासन सीएम ने 22 मार्च को दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। अगर जल्द हमें दूसरे कॉलेज में शिफ्ट नहीं किया गया तो पूरा साल बर्बाद हो जाएगा।
माधुरी गिरधर, निवासी, बल्बगढ़