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राजनीति करने से पहले कृषि अध्यादेशों को अच्छे से पढ़ ले विपक्ष : दलाल

Fri, 11 Sep 2020 11:13 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2020 11:13 PM IST
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Opposition should read agriculture ordinances well before doing politics:  dalal
वेबिनार को संबोधित करते हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल। - फोटो : chandigarh
चंडीगढ़। हरियाणा में केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेशों पर राजनीति तेज हो गई है। पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने शुक्रवार को किसानों व आढ़तियों को वेबिनार के जरिए कृषि अध्यादेशों के फायदे बताए। उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा है कि अध्यादेशों पर राजनीति करने से पहले उन्हें अच्छी तरह से पढ़ लें। लोकतंत्र में जन समर्थन सर्वोपरि है। किसानों से बातचीत के दरवाजे सदैव खुले हैं और किसान हित में यदि कोई सुझाव देगा तो सरकार उसका स्वागत करेगी।
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सरकार किसान हित में हर निर्णय ले रही है और भविष्य में लेती रहेगी। सरकार की मंशा है कि किसान आत्मनिर्भर हो और इस के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में केंद्र के तीन नए अध्यादेशों कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता अध्यादेश, 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 किसानों की बेहतरी के लिए ही हैं। इनमें एक भी ऐसी लाइन नहीं है, जिससे किसान का अहित हो। उन्होंने विपक्षी पार्टियों से भी अपील की कि वे इन पर राजनीति न करें। दलाल ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान औद्योगिक एवं अन्य वाणिज्यिक गतिविधियां बंद होने के दौरान कृषि क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था को जिंदा रखा। उन्हें फख्र है कि देश के अन्नदाता ने आपदा की इस घड़ी में अर्थव्यवस्था को बचाने में अपना योगदान दिया। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अत्याधुनिक तकनीक से खेती करें। उन्होंने बागवानी विभाग के अधिकारियों से अपील की है कि वे फल, सब्जी व फूलों के बीज की हरियाणा के नाम से ब्रांडिंग कर एक नया उत्पाद बनाएं ताकि किसानों को सस्ते व गुणवत्तापरक बीज उपलब्ध हो सकें। भले ही यह ब्रांड पीपीपी मोड पर लाया जाए। मशरूम उत्पादन में भी हरियाणा का नाम देश में है और इसके लिए कोई प्रोसेसिंग प्लांट हरियाणा ब्रांडिंग के नाम से लगाया जाना चाहिए। दलाल ने कहा कि दूध उत्पादन में भी हरियाणा को आगे लाना है। वीटा को भी अपने ब्रांड को बढ़ावा देना चाहिए। वीटा गुजरात के आणन्द अमूल दूध प्लांट का अध्ययन दौरा हरियाणा के दूध उत्पादक किसानों को करवाए।
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