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Haryana: पौधरोपण घोटाले के बाद वन महकमे में ऑपरेशन क्लीन शुरू, घोटाला उजागर करने वाले को भी हटाया

Thu, 06 Oct 2022 01:54 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 06 Oct 2022 01:54 AM IST
सार

पूर्व मुख्य वन संरक्षक के पास सचिव, वन विभाग का भी जिम्मा रहा। उन पर आरोप लगे कि वह उत्तरी जोन के अतिरिक्त प्रभार पर पूरा ध्यान नहीं दे रहे। अगर गहन निगरानी होती तो मोरनी, यमुनानगर में पौधरोपण और नारायणगढ़ रिटेनिंग वॉल, क्रेट वायर इत्यादि कार्यों में घोटाला न होता।

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Operation clean in forest department after plantation scam in Haryana
हरियाणा में पौधारोपण घोटाला - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा के उत्तरी वन जोन में हुए पौधरोपण घोटाले के बाद महकमे में उच्च स्तर पर ऑपरेशन क्लीन शुरू हो गया है। सीसीएफ उत्तरी क्षेत्र को पद से हटाते हुए उनसे अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया है। इसके साथ ही घोटाले उजागर करने वाले जांच एवं मूल्यांकन विंग करनाल के वन संरक्षक भी हटा दिए गए हैं। अब मोरनी, यमुनानगर और नारायणगढ़ में पौधरोपण और अन्य कार्यों में हुई गड़बड़ी मे शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी है, इनमें कुछ डीएफओ भी रडार पर हैं।

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वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विनीत गर्ग की तरफ से जारी आदेश अनुसार 1997 बैच के आईएफएस एस नारायणन मुख्य वन संरक्षक उत्तरी जोन अंबाला के साथ वन संरक्षक जांच एवं मूल्यांकन करनाल का अतिरिक्त प्रभार देखेंगे। नारायणन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पद से कार्यमुक्त होने के बाद नियुक्ति के इंतजार में थे। मुख्य वन संरक्षक उत्तरी जोन का अतिरिक्त जिम्मा अभी तक आईएफएस टीपी सिंह के पास था, जबकि जांच एवं मूल्यांकन विंग करनाल के वन संरक्षक की अतिरिक्त जिम्मेदारी आईएफएस विनोद भाटिया संभाल रहे थे।
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पूर्व मुख्य वन संरक्षक के पास सचिव, वन विभाग का भी जिम्मा रहा। उन पर आरोप लगे कि वह उत्तरी जोन के अतिरिक्त प्रभार पर पूरा ध्यान नहीं दे रहे। अगर गहन निगरानी होती तो मोरनी, यमुनानगर में पौधरोपण और नारायणगढ़ रिटेनिंग वॉल, क्रेट वायर इत्यादि कार्यों में घोटाला न होता। पैनी नजर न होने के कारण ही निचले स्तर के अधिकारियों ने डीग्रेडेड वन पुनर्वास के तहत हुए पौधरोपण में बड़ा घोटाला कर डाला। जांच एवं मूल्यांकन विंग ने जैसे ही पड़ताल शुरू की, मोरनी में सौ एकड़ से भी कम क्षेत्र में हुए पौधरोपण में चार करोड़ रुपये के घोटाले के साक्ष्य मिले। इससे वन महकमे मे हड़कंप मच गया और जांच रोक दी गई। 
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आंच ऊपर तक पहुंचने के कारण मुख्यमंत्री कार्यालय को खुद कड़ी कार्रवाई के आदेश देने पड़े। नारायणगढ़ में तो रिटेनिंग वॉल, क्रेट वायर सीसी स्टड चार दिन की बारिश में ही टूट गए। घोटालेबाजों में नारायणन का खौफ आईएफएस एस नारायणन की गिनती ईमानदार अफसरों में होती है। वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों की शिकायतों की वह खुद पड़ताल कर कड़ी कार्रवाई करते हैं। घोटालेबाजों में उनका खौफ रहता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा जब तीन-चार महीने उनके पास सीसीएफ अंबाला का अतिरिक्त प्रभार रहा तो उन्हें गलत कार्य करने वाले अनेक अफसर निलंबित कर दिए थे। जांच एवं मूल्यांकन परिमंडल की शुरूआती रिपोर्ट को आधार बनाते हुए अगर उन्होंने खुद पड़ताल की तो मोरनी, नारायणगढ़ और यमुनानगर में कई अधिकारी नप सकते हैं। चूंकि, गड़बड़ी की जांच बंद होने के बाद मोरनी में लाखों नए पौधे लगाए गए हैं।

इन अधिकारियों को ये मिला जिम्मा

आईएफएस विनीत कुमार अब हरियाणा वन विकास निगम पंचकूला के प्रबंध निदेशक होंगे। पंकज गोयल को राज्य जैव विविधता बोर्ड पंचकूला के चेयरमैन के साथ मुख्य वन्य जीव वार्डन पंचकूला का अतिरिक्त जिम्मा दिया गया है। अनंत प्रकाश पांडेय वर्तमान कार्यभार के अलावा वन संरक्षण प्रचार और प्रशिक्षण लगाए गए हैं। बी निवेदिता को वन संरक्षक वेस्ट, हिसार का कार्यभार दिया गया है।

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