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हरियाणा में अब पानी की चोरी करने वालों पर लगेगी लगाम, मुख्यमंत्री ने नहरी पानी के रियल टाइम डाटा सिस्टम का किया लोकार्पण
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चंडीगढ़। हरियाणा में नहरी पानी की चोरी पर लगाम लगाने के लिए रियल टाइम डाटा एक्विजिशन सिस्टम (आरटीडीएएस) की शुरुआत हो गई है। शनिवार को हरियाणा निवास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सीएम मनोहर लाल ने इसका लोकार्पण किया। पहले चरण में प्रदेशभर में 90 स्थानों पर आरटीडीएएस को स्थापित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में जल प्रबंधन के लिए तकनीक बेहद आवश्यक है, इसलिए आरटीडीएएस की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि जल को हम पैदा नहीं कर सकते, उसका केवल प्रबंधन किया जा सकता है। अलग-अलग अध्ययनों से तस्वीर उभर कर सामने आ रही है कि यदि इसी तरह जल का दोहन होता रहा तो आने वाले 30 से 35 वर्ष के बाद हमारे प्रदेश में मरुस्थल जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है। इसलिए समय रहते जल प्रबंधन अति आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जल संकट पूरे प्रदेश में एक समान नहीं है। कहीं, जलस्तर बेहद नीचे है तो कहीं पर बहुत ऊपर है। ऐसे में सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली योजना लागू की गई है, ताकि दक्षिण हरियाणा के उन खेतों तक भी पानी पहुंच सके, जहां पानी की बेहद किल्लत है। इस मौके पर हरियाणा जल संरक्षण अभियान की गुडविल एंबेसडर नियुक्त की गई मनिका श्योकंद, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह, इंजीनियर-इन-चीफ सतबीर कादियान मौजूद रहे।
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नहरों में उपलब्ध पानी का होगा डाटा
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि नहर में कितना पानी छोड़ा गया और आखिरी टेल तक कितना पानी पहुंचा, इसे अब आरटीडीएएस के माध्यम से पता लगाया जा सकेगा। कहीं बीच में पानी की चोरी हुई हो तो संबंधित अधिकारी को मैसेज जाएगा कि किस कारण टेल के आखिरी छोर तक पानी कम हुआ है। आरटीडीएएस के माध्यम से विभाग के पास यह डाटा भी उपलब्ध होगा कि नहरों में कितना पानी उपलब्ध है, कितना होना चाहिए और टेल पर कितना पानी पहुंचना चाहिए और कितना पानी पहुंचा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में जल प्रबंधन के लिए तकनीक बेहद आवश्यक है, इसलिए आरटीडीएएस की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि जल को हम पैदा नहीं कर सकते, उसका केवल प्रबंधन किया जा सकता है। अलग-अलग अध्ययनों से तस्वीर उभर कर सामने आ रही है कि यदि इसी तरह जल का दोहन होता रहा तो आने वाले 30 से 35 वर्ष के बाद हमारे प्रदेश में मरुस्थल जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका है। इसलिए समय रहते जल प्रबंधन अति आवश्यक है।
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उन्होंने कहा कि जल संकट पूरे प्रदेश में एक समान नहीं है। कहीं, जलस्तर बेहद नीचे है तो कहीं पर बहुत ऊपर है। ऐसे में सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली योजना लागू की गई है, ताकि दक्षिण हरियाणा के उन खेतों तक भी पानी पहुंच सके, जहां पानी की बेहद किल्लत है। इस मौके पर हरियाणा जल संरक्षण अभियान की गुडविल एंबेसडर नियुक्त की गई मनिका श्योकंद, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह, इंजीनियर-इन-चीफ सतबीर कादियान मौजूद रहे।
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नहरों में उपलब्ध पानी का होगा डाटा
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि नहर में कितना पानी छोड़ा गया और आखिरी टेल तक कितना पानी पहुंचा, इसे अब आरटीडीएएस के माध्यम से पता लगाया जा सकेगा। कहीं बीच में पानी की चोरी हुई हो तो संबंधित अधिकारी को मैसेज जाएगा कि किस कारण टेल के आखिरी छोर तक पानी कम हुआ है। आरटीडीएएस के माध्यम से विभाग के पास यह डाटा भी उपलब्ध होगा कि नहरों में कितना पानी उपलब्ध है, कितना होना चाहिए और टेल पर कितना पानी पहुंचना चाहिए और कितना पानी पहुंचा।