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Panchkula News: अब ट्रेनसेट की तकनीकी खामियों को कालका में ही दुरुस्त किया जाएगा
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अब इंजीनियर इंजन गरम होने की दिक्कत का कालका में करेंगे निवारण, ट्रेन सेट बेंगलुरू नहीं भेजा जाएगा
संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग पर ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) के तीन ट्रायल असफल होने के बाद अब कालका में ही बेंगलुरू के इंजीनियर इसकी तकनीकी खामियों को दुरुस्त करेंगे। पहले कहा जा रहा था कि ट्रेन सेट को दुरुस्त करने के लिए बेंगलुरू भेजा जाएगा। अंबाला रेल मंडल के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की थी। सूत्रों के अनुसार ट्रांसपोर्ट खर्च सहित अन्य परेशानियों से बचने के लिए ट्रेन सेट को सड़क मार्ग से बेंगलुरू नहीं भेजा जाएगा। जब पहली बार ट्रेन सेट कालका पहुंचा था तब विशालकाय क्रेनों की सहायता से इसे बड़ी सावधानी से उतारा से गया था। फिलहाल ट्रेन सेट सीनियर सेक्शन इंजीनियर कैरिज एवं वैगन कार्यालय के सामने खड़ी है। ट्रेन का पहला ट्रायल 16 फरवरी 2023 को हुआ था। इसमें ट्रेन सेट केवल 500 मीटर तक दौड़ पाई थी। इसके बाद 19 को करीब छह किलोमीटर जबकि 22 फरवरी को करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय कर पाई थी। इस बारे में रेलवे का कोई भी अधिकारी अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
ट्रायल असफल होने के बाद लौट गई थी टीम
ट्रेन सेट के लगातार दो ट्रायल असफल होने के बाद आरडीएसओ (अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन) लखनऊ की टीम और ट्रेन सेट के साथ बेंगलुरू से आई इंजीनियरों की टीम को बहुत आशा थी कि तीसरा ट्रायल सफल हो जाएगा लेकिन तीसरी असफलता ने भी सबको निराश कर दिया। दोनों टीमें कुछ दिन कालका में रहने के बाद वापस लौट गईं थीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कालका। विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग पर ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) के तीन ट्रायल असफल होने के बाद अब कालका में ही बेंगलुरू के इंजीनियर इसकी तकनीकी खामियों को दुरुस्त करेंगे। पहले कहा जा रहा था कि ट्रेन सेट को दुरुस्त करने के लिए बेंगलुरू भेजा जाएगा। अंबाला रेल मंडल के अधिकारियों ने भी इस बात की पुष्टि की थी। सूत्रों के अनुसार ट्रांसपोर्ट खर्च सहित अन्य परेशानियों से बचने के लिए ट्रेन सेट को सड़क मार्ग से बेंगलुरू नहीं भेजा जाएगा। जब पहली बार ट्रेन सेट कालका पहुंचा था तब विशालकाय क्रेनों की सहायता से इसे बड़ी सावधानी से उतारा से गया था। फिलहाल ट्रेन सेट सीनियर सेक्शन इंजीनियर कैरिज एवं वैगन कार्यालय के सामने खड़ी है। ट्रेन का पहला ट्रायल 16 फरवरी 2023 को हुआ था। इसमें ट्रेन सेट केवल 500 मीटर तक दौड़ पाई थी। इसके बाद 19 को करीब छह किलोमीटर जबकि 22 फरवरी को करीब 10 किलोमीटर की दूरी तय कर पाई थी। इस बारे में रेलवे का कोई भी अधिकारी अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
ट्रायल असफल होने के बाद लौट गई थी टीम
ट्रेन सेट के लगातार दो ट्रायल असफल होने के बाद आरडीएसओ (अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन) लखनऊ की टीम और ट्रेन सेट के साथ बेंगलुरू से आई इंजीनियरों की टीम को बहुत आशा थी कि तीसरा ट्रायल सफल हो जाएगा लेकिन तीसरी असफलता ने भी सबको निराश कर दिया। दोनों टीमें कुछ दिन कालका में रहने के बाद वापस लौट गईं थीं।
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